येल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरः अमेरिका को ऐतिहासिक सबक लेना चाहिए

2019-05-20 15:35:24
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येल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरः अमेरिका को ऐतिहासिक सबक लेना चाहिए

येल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरः अमेरिका को ऐतिहासिक सबक लेना चाहिए

अमेरिकी अर्थशास्त्री और येल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर स्टीफन रोच ने हाल में कहा कि ट्रम्प सरकार ने चीन द्वारा अमेरिका को निर्यातित वस्तुओं पर टैरिफ़ बढ़ाने की कार्यवाई गत् शताब्दी के 30 के दशक में अमेरिका की व्यापार संरक्षणवादी नीति से बहुत मिलती है। उन्होंने ट्रम्प सरकार से तुरंत हालिया व्यापारिक संरक्षणवाद की कार्यवाई को बंद करने की अपील की, ताकि ऐतिहासिक सबक लेकर इसके पुनः पैदा होने से बचा सके।

हाल में स्टीफन रोच ने ब्लूमबर्ग के साथ साक्षात्कार में कहा कि मई 1930 में 1000 से अधिक अर्थशास्त्रियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति हर्बर्ट क्लार्क हुवर के नाम पत्र लिखकर राष्ट्रपति से द स्मूट-हॉव्लेइ टैरिफ़ एक्ट को वीटो करने की अपील की। तत्कालीन राष्ट्रपति ने अर्थशास्त्रियों के सुझाव को नजरअंदाज कर इस बिल पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद अमेरिका ने 20 हजार से अधिक किस्मों के आयातित वस्तुओं पर उच्च टैरिफ़ लगाया, जिस से अमेरिका के प्रमुख व्यापारी साझेदारियों को बदला लेना पड़ा और विश्व में व्यापारिक युद्ध छिड़ा। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका के निर्यात में करीब 60 प्रतिशत और वैश्विक व्यापारिक पैमाने में दो तिहाई की कटौती आयी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बिल का लागू होना पिछली शताब्दी के 30 के दशक में मंदी पैदा होने का अहम कारण है।

आज भी वैसी ही स्थिति लग रही है। स्टीफन रोच ने कहा कि इतिहास ने लोगों को बताया कि अमेरिका बराबर गलती कर रहा है। जबकि यह गलती अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा विद्वानों के सुझाव को न सुनने से पैदा हुई है।

(श्याओयांग)

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