टिप्पणीः ब्रिटिश ब्रेक्सिट एक राजनीतिक खेल

2019-03-21 19:20:41
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ब्रिटिश सरकार ने 20 मार्च को औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ से ब्रिटिश ब्रेक्सिट की समय तिथि को 30 जून तक स्थगित करने का अनुरोध किया। ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मेई ने कहा कि वे इस तिथि को फिर एक बार स्थगित नहीं करेंगी। साथ ही उन्होंने संसद से फिर एक बार ब्रिटिश ब्रेक्सिट समझौते पर मतदान करने की तैयारी करने की अपील की। लेकिन हालिया स्थिति के मुताबिक ब्रिटिश संसद में थेरेसा मेई किसी भी तरह के ब्रेक्सिट समझौते की पुष्टि नहीं कर सकी।

ब्रिटेन की संसद में दोनों पार्टियों यहां तक पार्टी के अंदर इस समस्या को अपना राजनीतिक हथियार बनाती हैं। वास्तव में जनमत-संग्रह से ब्रिटेन के ईयू से हटने का निर्णय लेने के बाद ब्रिटिश समाज में निरंतर यह सवाल पेश किया जाता है कि ब्रिटेन को ईयू से हटना चाहिए या नहीं ? हार्ड ब्रेक्सिट या सॉफ्ट ब्रेक्सिट करेगा?जनमत संग्रह के दो साल के बाद ब्रिटेन का अर्थतंत्र पहले के अनुमान से इतना खराब नहीं रहा। लेकिन यह बड़े हद तक इस बात पर निर्भर है कि कई उपक्रम ब्रिटेन के सॉफ्ट ब्रेक्सिट के प्रति प्रतीक्षा में हैं। एक बार ब्रिटेन सचमुच सॉफ्ट ब्रेक्सिट कर लेगा, तो क्या स्थिति ऐसी रहेगी?गत वर्ष के नवम्बर में ब्रिटिश केंद्रीय बैंक ने एक रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी कि यदि ब्रिटेन हार्ड ब्रेक्सिट करता है, तो जीडीपी में संभवतः 8 प्रतिशत की कटौती आयेगी और ब्रिटिश पाउंड की विनिमय दर में भी 25 की कटौती होगी।

हाल में ब्रिटेन छोटे समय में ब्रेक्सिट सवाल पर सहमति हासिल नहीं कर सका है। इसलिए ब्रिटेन को विवश होकर स्थगित करना पड़ा। लेकिन स्थगित होने से ब्रिटेन को भी नुकसान पहुंचेगा। इस साल ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि दर 1.7 प्रतिशत होगी। यदि ब्रेक्सिट तीन महीनों के लिए स्थगित करता है, तो आर्थिक वृद्धि दर संभवतः 1.5 प्रतिशत तक गिरेगी। यदि छह महीनों के लिए स्थगित करता, तो आर्थिक वृद्धि दर सिर्फ 1.3 प्रतिशत तक कम होगी।

क्यों इतनी अहम बात ब्रिटेन में स्थायी लड़ाई बन सकती है?इस समस्या का मुख्य कारण ब्रिटिश राजनीतिक व्यवस्था ही है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था सभी लोगों की राय प्रतिबिंबित नहीं कर सकती, जबकि राजनीतिक विशिष्ट वर्ग के लोग इस व्यवस्था का प्रयोग कर खुद लाभ हासिल करने की कोशिश करते हैं। देश में सहमतियां पाने की संभावना निरंतर कम होती रहीं। चाहे अमेरिका हो या फ्रांस पश्चिमी देशों में जनमत-संग्रह एक धारा बन चुका है। यह विशिष्ट वर्ग के लोगों द्वारा आम जनता को धोखा देने वाली चाल है।

हाल में ब्रिटिश लेबर पार्टी फिर एक बार जनमत-संग्रह से ब्रेक्सिट के निर्णय को छोड़ने की कोशिश कर रही है। वास्तव में यह भी मौजूदा राजनीतिक नियम को ठुकरा देने वाली कार्यवाई है। जब जनमत संग्रह में परिणाम निकलेगा तो, असंतुष्ट लोग फिर एक बार करने की मांग भी कर सकेंगे। इस तरह निर्णय कभी नहीं लिया जा सकेगा। इसे मद्देनजर थेरेसा मेई ने अंतिम ब्रेक्सिट की तिथि तय करने की बात कायम रखी है।

(श्याओयांग)

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