टिप्पणी:ब्रिटेन के“हार्ड ब्रेक्सिट”से इंकार, कौन देगा पहले रियायत ?

2019-03-14 18:53:47
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ब्रिटिश संसद ने मंगलवार (12 मार्च) को मतदान से प्रधानमंत्री थेरेसा मई सरकार द्वारा संशोधित ब्रेक्सिट संधि को अस्वीकार कर दिया। बुधवार (13 मार्च) को ब्रिटेन की“29 मार्च को बिना संधि ब्रेक्सिट”वाले प्रस्ताव को भी इंकार कर दिया गया, साथ ही ब्रेक्सिट की तिथि को 22 मई तक टालने की मांग की गई। इस तरह लोगों की चिंता में ब्रिटेन के“हार्ड ब्रेक्सिट”वाला जोखिम कम हुआ।

तथाकथित“बिना संधि ब्रेक्सिट”का मतलब यह है कि अगर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच आगामी 29 मार्च के पहले“ब्रेक्सिट”संघि पर हस्ताक्षर न किया जाए, तो दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता में प्राप्त सभी फल बेकार होंगे। “ब्रेक्सिट”के बाद ब्रिटेन के पास कोई संक्रमण काल नहीं होगा, यूरोपीय संघ का कानून उसके लिए उचित भी नहीं होगा। ब्रिटेन और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के ढांचे में वापस लौटेगा, दोनों पक्षों को आपस में टैरिफ़ उन्नत होने और व्यापारिक बाधा बढ़ने की समस्या से जुझना पड़ेगा।

यह स्पष्ट है कि“संधि सहित ब्रेक्सिट”और“विलंब ब्रेक्सिट”दो प्रस्तावों की तुलना में“बिना संधि ब्रेक्सिट”ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के लिए अनुचित विकल्प साबित होगा। इसी वजह से यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ज्यां क्लाड जंकर ने कहा कि बिना संधि“ब्रेक्सिट”एक आपदा होगी, यूरोपीय संघ इसे रोकेगा। वहीं ब्रिटिश विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने बल देते हुए कहा कि बिना संधि“ब्रेक्सिट”ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच संबंध पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, जो कि एक बड़ी भू-रणनीतिक गलती होगी।

अभी ब्रिटिश संसद ने स्पष्ट रूप से“बिना संधि ब्रेक्सिट”का विरोध किया, जाहिर है कि ब्रिटेन के भीतर“ब्रेक्सिट”पक्ष और“गैर-ब्रेक्सिट”पक्ष के बीच संघर्ष तीव्र रहा, जिससे“हार्ड ब्रेक्सिट”का जोखिम बढ़ा। दोनों पक्षों को मालूम है कि ऐसा करने का परिणाम गंभीर होगा और इसे लेकर बड़े चिंतित भी हुए। इस तरह अंतिम क्षण में उन्होंने विश्राम देते हुए तर्कसंगत विकल्प चुना।

ब्रिटेन के लिए“बिना संधि ब्रेक्सिट”आसान नहीं है, जिससे उसे खुद को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। फरवरी में ब्रिटेन द्वारा जारी“बिना संधि ब्रेक्सिट”से देश में उद्योग और व्यापार पर पड़े प्रभाव की आकलन रिपोर्ट के अनुसार, सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों पर प्रभाव पड़ेगा। अनुमान है कि यूरोपीय संघ से आयातित करीब 30 प्रतिशत खाद्य पदार्थ प्रभावित होंगे, परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ेगें।“बिना संधि ब्रेक्सिट”से आने वाले 15 सालों में ब्रिटेन के अर्थतंत्र की 6.3 प्रतिशत से 9 प्रतिशत गिरावट होगी। ब्रिटिश राष्ट्रीय आर्थिक सामाजिक अनुसंधान संस्थान (एनआईईएसआर) के अनुमान के अनुसार, अगर“ब्रेक्सिट संधि”संपन्न होगी, तो साल 2019 और साल 2020 दो सालों में ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि क्रमशः 1.9 प्रतिशत और 1.6 प्रतिशत होगी। अगर बिना संधि ब्रेक्सिट हुआ, तो इन दो सालों में ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि केवल 0.3 प्रतिशत होगी। बाजार के अनुमान के अनुसार, आर्थिक स्थिति अभूतपूर्व मुसीबतों में फंसने के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड की विनिमय दर में बड़ी गिरावट आएगी।

ब्रिटिश संसद ने 14 मार्च को“ब्रेक्सिट”की तिथि को 30 जून तक स्थगित करने पर मतदान करने की योजना बनाई, ताकि संसद के पास ब्रेक्सिट संधि पारित करने के लिए अधिक समय मिल जाए। अगर ब्रिटिश संसद और यूरोपीय संघ दोनों ने स्वीकार किया, तो 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग नहीं होगा। वर्तमान में प्रधानमंत्री थेरेसा मई ने ब्रिटिश संसद और यूरोपीय संघ से उन्हें ज्यादा समय देने की अपील की और संसद से 20 मार्च को ब्रेक्सिट संधि को लेकर तीसरी बार मतदान करने का सुझाव पेश किया। लेकिन यूरोपीय संघ के साथ संधि पर वार्ता जारी रखना, या सांसदों की रियायत प्राप्त करना, दोनों ही कठिन है। यूरोपीय संघ के“ब्रेक्सिट”मामले पर जिम्मेदार वाले प्रथम वार्ताकार मिशेल बार्नियर ने कड़े रुख से कहा कि सलाह मशविरा का दौर समाप्त हो चुका है। यूरोपीय संघ कोई रियायत नहीं देगा।

ब्रिटेन के“ब्रेक्सिट”का रास्ता लम्बा है।“ब्रेक्सिट”पक्ष और“गैर-ब्रेक्सिट”पक्ष एक दूसरे से रियायत लेना चाहते हैं, ताकि अपना हितों की बड़े हद तक रक्षा की जा सके। तो परिणामस्वरूप“ब्रेक्सिट”संबंधी प्रस्ताव अनेक बार अस्वीकार किया गया। दोनों पक्ष अभी तक एक आम सहमति वाला प्रस्ताव पेश नहीं कर सकते। तीव्र संघर्ष के दौरान ब्रिटेन का राजनीतिक चक्र दिन प्रति दिन बदल रहा है और सामाजिक विभाजन भी बढ़ रहा है। आज तक ब्रिटेन में“ब्रेक्सिट”प्रक्रिया को उलटने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं। अगर इसके लिए दूसरा आम चुनाव सचमुच आयोजित किया जाएगा, और पिछले 2 सालों में“ब्रेक्सिट”से संबंधी वार्ता में प्राप्त प्रगति को अस्वीकार किया जाएगा, तो इससे ब्रिटेन की घरेलू राजनीति, अर्थतंत्र और समाज पर असीमित प्रभाव पड़ेगा।

“ब्रेक्सिट”21वीं शताब्दी की समस्या मानी जाती है। इसके प्रति प्रधानमंत्री थरेसा मई ने भाव विभोर होकर कहा कि एक मात्र निश्चितता है लगातार अनिश्चितता। हालांकि“ब्रेक्सिट” देखने में मुसिबतों में फंस गया, लेकिन विचारधारा को बदल कर विभिन्न पक्ष दूसरे की रियायत पर ज्यादा ख्याल न रखें, और आम सहमति की प्राप्ति की कोशिश करे, तो“ब्रेक्सिट”का रास्ता साफ़ होगा।

(श्याओ थांग)

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