स्टेफ़ानिया स्टाफ़ुट्टी: चीन-इटली सांस्कृतिक संपर्क की सेतु

2018-10-07 15:43:33
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स्टेफ़ानिया स्टाफ़ुट्टी:  चीन-इटली सांस्कृतिक संपर्क की सेतु

स्टेफ़ानिया स्टाफ़ुट्टी:  चीन-इटली सांस्कृतिक संपर्क की सेतु

वर्ष 1981 में पूर्वी प्राचीन देश के प्रति रुचि और चीनी संस्कृति के प्रति शौक के साथ-साथ 23 वर्षीय इतालवी युवती स्टेफ़ानिया स्टाफ़ुट्टी (Stefania Stafutti) चीन आई। तभी से अब तक करीब 40 सालों तक उन्होंने चीन के साथ घनिष्ठ संबंध कायम किया और वे सुधार और खुलेपन की नीति लागू किए जाने के पिछले 40 सालों में चीन में प्राप्त उपलब्धियों और चीन में आए जमीन आसमान के परिवर्तन की साक्षी भी बनी। 

हाल में चाइना रेडियो इन्टरनेशनल के संवाददाता ने स्टेफ़ानिया स्टाफ़ुट्टी के साथ एक खास साक्षात्कार किया। गत 80 के दशक में चीन में आने के शुरुआती समय की याद करते हुए उन्होंने कहा:“बेशक, उस समय चीन बहुत गरीब था। लेकिन मुझे लगता है कि उस जमाने में इस देश में कुछ न कुछ परिवर्तन हो रहा था। मेरे विचार में गत 80 का दशक चीन के इतिहास में एक स्वर्णिम युग था। लोग आशा से ओतप्रोत थे और देश में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ रहा था और एक नया युग शुरु होने वाला था। हालांकि मैं एक विदेशी हूँ और बहुत जवान भी। पहले मेरे पास चीन के प्रति कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन उस समय मुझे लगा कि कोई न कोई बड़ी बात चीन में हो रही थी। तत्काल में चीन खुलेपन की शुरुआत में था और देश को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। लेकिन चीन के प्रति मेरा पहला संपर्क बहुत अच्छा था और अविस्मरणीय भी।”

पेइचिंग विश्वविद्यालय में अपना अध्ययन समाप्त करके स्टेफ़ानिया सिनोलजी यानी चीन-विद्या की शोधकर्ता बनी। पिछले 20 से अधिक सालों में वे चीन के साथ घनिष्ठ संपर्क कायम रखे हुए हैं। वर्ष 2012 में स्टेफ़ानिया चीन स्थित इतालवी दूतावास में एक स्थाई सांस्कृतिक काउंसलर बनी। उन्होंने इससे लाभ उठाकर नजदीक से व्यापक तौर पर चीन का अनुभव किया। पिछले 40 सालों में चीन में आए परिवर्तनों की चर्चा करते हुए स्टेफ़ानिया ने कहा कि, गत सदी के 80 के दशक के शुरु में चीन में आने के वक्त की तुलना में आज की स्थिति उनके कल्पना से कहीं ज्यादा है। उनका कहना है:“आर्थिक क्षेत्र में परिवर्तन बहुत स्पष्ट है। मसलन् यातायात का बुनियादी संस्थापन। मुझे याद है कि वर्ष 1982 में पेइचिंग से क्वांगचो तक जाने में रेलगाड़ी से 36 घंटे लगते थे। लेकिन आज चीन में यातायात संस्थापन बहुत समुन्नत हो चुके हैं। यह अर्थतंत्र के लिए अहम ही नहीं, देश की एकता के लिए भी महत्वपूर्ण है। लोग इधर-उधर रहते हैं, लेकिन वे आसानी से एक दूसरे से मिल सकते हैं। चीन ने खुलेपन पर बड़ी कोशिश की। आर्थिक क्षेत्र के अलावा वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्कृति आदि क्षेत्रों में चीन ने ज्यादा से ज्यादा विदेशी विद्यार्थियों को आकृष्ट किया। इसके साथ ही विदेशों में आगे अध्ययन करने वाले चीनी छात्रों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन खुद को दिखाने में प्रयासरत है। ये हैं चीन में आए सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन।”

खुलेपन और विकास के चलते चीन में आए परिवर्तनों से इस देश के प्रति बाहरी दुनिया का विचार भी बदल गया है। इधर के सालों में चीन और इटली के बीच सांस्कृतिक क्षेत्र में आदान-प्रदान और सहयोग लगातार बढ़ रहे हैं। इटली में करीब 10 चीनी कंफ़यूशियस कॉलेजों की स्थापना हुई। ट्यूरिन कंफ़यूशियस कॉलेज की प्रधान के रूप में स्टाफ़ानिया ने कहा कि वर्तमान में तमाम इतालवी नागरिक चीन को जानते हैं, अब उन्हें चीन के प्रति ज्यादा से ज्यादा जानकारी दिलवाना हमारा कार्य है। उन्होंने कहा: “चीन के प्रति लोगों के पास कुछ न कुछ जानकारी है। लेकिन वर्तमान में उन्हें चीन की ज्यादा जानकारी दिलानी है। इतालवी मीडिया की रिपोर्टों में चीन के प्रति कुछ न कुछ गलतफहमी मौजूद है, नागरिकों को सही सूचना नहीं मिल पाती। कंफ़यूशियस कॉलेज को अधिक काम करना चाहिए। चीन के पास प्राचीन चाय कला, चीनी लिपि और सुलेख, इनके अलावा, चीन नई वस्तुओं से ओतप्रोत वाला देश है। कुछ चीज़ों पर विचार विमर्श करना या विवाद पैदा होना, यह सामान्य बात है। क्योंकि हर कोई नई चीज़ के पैदा होने के वक्त विवाद जरूर मौजूद है। मेरा विचार है कि चीन को अपना नवीनतम पहलू दिखाना चाहिए। संस्कृति के क्षेत्र में चीन के पास अपार विषय-वस्तुएं उपलब्ध हैं।”   

सांस्कृतिक काउंसलर से कंफ़यूशियस कॉलेज की प्रधान तक, स्टेफ़ानिया सांस्कृतिक आदान-प्रदान की मजबूती में लगी हुई हैं। उनकी नजर में 40 सालों के सुधार और खुलेपन के बाद, चीन ने विकास की शानदार कामयाबियां हासिल कीं। इसी दौरान बाहरी दुनिया में गलतफहमी पैदा हुई। भविष्य में खुलेपन की प्रक्रिया में चीन को दूसरे देशों के साथ मानविकी आदान-प्रदान को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतली में चीन-विद्या की कार्यकर्ता के नाते, शिक्षा देने और वैज्ञानिक अनुसंधान करने के अलावा, चीन के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान मजबूत करना उनका प्रमुख दायित्व है। स्टेफ़ानिया ने कहा: “सांस्कृतिक आदान-प्रदान से हम चीन के विभिन्न कदमों के पीछे मौजूद दर्शनशास्त्र को महसूस कर सकेंगे और साथ ही चीन बाहरी दुनिया के साथ, खासकर यूरोप के साथ बातचीत करने की भाषा और तरीका हासिल कर सकेगा। आज की दुनिया में अर्थतंत्र और संस्कृति को पूरी तरह विभाजित करना मुश्किल है। मेरा विचार है कि संस्कृति के माध्यम से और संतुलित आर्थिक विकास को मदद मिलेगी। चीन से संबंधित विद्वानों के नाते हमारा महत्वपूर्ण दायित्व, इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करना और अपने पेशेवर ज्ञान व अनुभव के जरिए द्विपक्षीय सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच अधिक पुल स्थापित करना है।”

(श्याओ थांग)

 

 

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