शी चिनफिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी संबंध की गहराई पर बल दिया

2018-07-27 09:02:18
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चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भाषण देते हुए

ब्रिक्स देशों का 10वां शिखर सम्मेलन 26 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में आयोजित हुआ। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मटामेला सिरिल रामाफ़ोसा, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ब्राज़िल के राष्ट्रपति मिशेल टेमर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें भाग लिया। शी चिनफिंग ने सम्मेलन में भाषण देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों को ऐतिहासिक रूझान को अच्छी तरह से पकड़ते हुए आपस में रणनीतिक साझेदारी संबंध को गहराना चाहिए। “थ्री-टायर-ड्राइव” वाले सहयोगी ढांचे को सुदृढ़ करना चाहिए, ताकि दूसरा“स्वर्णिम दशक”साकार हो सके और साथ ही साथ मानव जाति के साझे भाग्य समुदाय को आगे बढ़ाया जा सके।   

उसी दिन आयोजित शिखर वार्ता में विभिन्न देशों के सर्वोच्च नेताओं ने“अफ्रीका में ब्रिक्स:चौथी औद्योगिक क्रांति में समावेशी वृद्धि और समान समृद्धि की खोज”शीर्षक थीम पर ब्रिक्स सहयोग को लेकर गहन रुप से विचारों का आदान-प्रदान किया। सम्मेलन में“ब्रिक्स नेताओं का जोहानसबर्ग घोषणा-पत्र”जारी किया गया, जिसमें बहुपक्षवाद की रक्षा करने और संरक्षणवाद का विरोध करने को लेकर स्पष्ट संकेत दिये गये, ब्रिक्स नव औद्योगिक क्रांतिकारी साझेदारी संबंध स्थापित करने का फैसला किया गया, इसका लक्ष्य है कि अर्थतंत्र, व्यापार, वित्त, राजनीतिक सुरक्षा और मानविकी आदान प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाए।

शी चिनफिंग ने अपने भाषण में ब्रिक्स के भावी सहयोग को लेकर प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने बल देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों को आपस में हाथ मिलाकर समान प्रयास करने चाहिए, ताकि स्थाई शांति, आम सुरक्षा, समान समृद्धि, खुलेपन, समावेश और स्वच्छ व सुन्दर दुनिया के निर्माण को आगे बढ़ाया जा सके।

शी चिनफिंग ने कहा कि ब्रिक्स देशों को ऐतिहासिक रूझान पकड़ते हुए दूसरे“स्वर्णिम दशक”को बखूबी अंजाम देना चाहिए। आर्थिक सहयोग करना और समान विकास को साकार करना ब्रिक्स सहयोग का प्रारंभिक इरादा और प्रमुख उद्देश्य है, जो कि सबसे बड़ी निहित शक्ति, सबसे समृद्ध विषय और सबसे केंद्रित फल वाला क्षेत्र है। विभिन्न पक्षों को आर्थिक सहयोग की भारी निहित शक्ति दिखानी चाहिए।

शी चिनफिंग ने कहा कि हमें व्यापार, निवेश, वित्त और आपसी संपर्क आदि क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र, जी-20 ग्रुप, विश्व व्यापार संगठन आदि ढांचे में नियम के आधार पर बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की दृढ़ता के साथ रक्षा करनी चाहिए। व्यापार और निवेश के मुक्तिकरण व सुविधा को आगे बढ़ाया जाए और संरक्षणवाद का दृढ़ विरोध किया जाए। हमें सृजनात्मक नेतृत्व पर कायम रहते हुए नव औद्योगिक क्रांतिकारी साझेदारी संबंध का निर्माण करने से समग्र आर्थिक नीतिगत समन्वय को मजबूत करना चाहिए, ताकि विकास रणनीतियों को जोड़ा जा सके।

अगले चरण के विकास की चर्चा करते हुए शी चिनफिंग ने कहा कि चीन 10 चरणों में मानव संसाधन विकास के सहयोग वाली परियोजनाओं का कार्यान्वयन करेगा। नव औद्योगिक क्रांतिकारी सहयोग की रूपरेखा बनाने के लिए पाँचों देशों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि ब्रिक्स देशों, व्यापक नवोदित बाज़ार वाले देशों और विकासमान देशों की स्पर्धा शक्ति को उन्नत किया जा सके।

ब्रिक्स देशों में राजनीतिक सुरक्षा सहयोग को लेकर शी चिनपिंग ने कहा कि हमें बहुपक्षवाद का झंडा फहराते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सिद्धांत की रक्षा करनी चाहिए। विभिन्न पक्षों से आग्रह किया जाता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के आधारभूत मापदंड का पालन करते हुए बातचीत के माध्मय से संघर्षों का समाधान करेंगे, और सलाह मशविरे से मतभेदों को दूर करेंगे। हम विदेश मंत्रियों की भेंटवार्ता, सुरक्षा मामला उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों का सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र स्थित स्थाई प्रतिनिधियों की वार्ता जैसी व्यवस्थाओं की भूमिका निभाकर ब्रिक्स की आवाज़ सुनाएंगे। ब्रिक्स प्रस्ताव पेश कर आपसी सम्मान, निष्पक्ष न्याय, सहयोग और उभय जीत वाले नए अंतरराष्ट्रीय संबंध की स्थापना करेंगे।

शी चिनफिंग ने कहा कि पाँचों ब्रिक्स देशों के पास अपनी-अपनी शानदार और रंगबिरंगी संस्कृति है। मानविकी आदान प्रदान और सहयोग करने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। जनता के बीच संपर्क मज़बूत किया जाए, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और पर्यटन आदि क्षेत्रों में मानविकी आदान प्रदान को व्यापक किया जाए। ब्रिक्स सहयोग के जनमत आधार को लगातार मजबूत किया जाए। चीन का सुझाव है कि ब्रिक्स संग्रहालयों, ललितकला भवनों और पुस्तकालय संघों की संयुक्त प्रदर्शनी वाली गतिविधियों का आयोजन किया जाना चाहिए। संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय शहर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करते हुए और प्रभावकारी ब्रिक्स कहानियां सुनाई जानी चाहिए, ताकि पाँचों देशों की जनता के बीच आपसी समझ और पारंपरिक मैत्री को निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।   

शी चिनफिंग ने यह भी कहा कि ब्रिक्स व्यवस्था की स्थापना की शुरुआत में विभिन्न पक्षों ने समान रुप से खुला और समावेशी सही रास्ता तय किया। पिछले वर्ष श्यामन में आयोजित ब्रिक्स शिखर वार्ता में“ब्रिक्स प्लस”वाली सहयोगी विचारधारा पेश की। विभिन्न पक्षों को और घनिष्ठ साझेदारी संबंध की स्थापना करनी चाहिए।“ब्रिक्स प्लस”का अर्थ है कि पाँचों देशों के बीच एकता और सहयोग की लगातार मजबूती के साथ ब्रिक्स मित्रों के दायरे को फैलाया जाए। लक्ष्य है कि व्यापक नवोदित बाज़ार देशों और विकासशील देशों के साथ समान विकास और समृद्धि को बखूबी अंजाम दिया जाए। हम संयुक्त राष्ट्र और जी-20 ग्रुप के ढांचे में“ब्रिक्स प्लस”सहयोग, नवोदित बाज़ार देशों और विकासमान देशों के समान हितों और विकास की गुंजाइश का विस्तार करना चाहिए, ताकि व्यापाक साझेदारी संबंध की स्थापना को आगे बढ़ाया जा सके और विश्व शांति व विकास कार्य के लिए और ज्यादा योगदान दिया जा सके।

10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के नेताओं ने कहा कि वर्तमान स्थिति में ब्रिक्स देशों को एकता और सहयोग मजबूत करना चाहिए। बहुपक्षवाद का संरक्षण करते हुए मुक्त व्यापार का संवर्धन करना चाहिए।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण देते हुए कहा कि ब्रिक्स देश विश्व वृद्धि का महत्वपूर्ण इंजन है। संरक्षणवाद बढ़ने से बहुपक्षीय व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। हमें विश्व प्रशासन को संपूर्ण बनाकर बहुपक्षवाद का प्रचार करना और मुक्त व्यापार बढ़ाना चाहिए, ताकि वैश्विकरण व्यापक लाभ वाली दिशा की ओर विकसित हो सके और विकासशील देशों के हितों की और अच्छी तरह से रक्षा की जा सके।

(श्याओ थांग)

 

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