थाईवान की स्वाधीनता के पक्षधर को मंच न दें

2020-10-17 17:38:56
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इंडिया टुडे ने 15 अक्तूबर को थाईवान की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेस पार्टी के विदेश मामला विभाग के प्रमुख वू जोसेफ के साथ लिये इंटरव्यू को प्रसारित किया। चीन इसका दृढ़ विरोध करता है, क्योंकि यह एक चीन की नीति का खुलेआम उल्लंघन है और भारत सरकार के हमेशा रुख के विरुद्ध भी है।

सब लोग जानते हैं कि दुनिया में सिर्फ एक चीन है, थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न भाग रहा है। चीन लोक गणराज्य एकमात्र कानूनी सरकार है, जो पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करती है। यह संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव में मान्यता प्राप्त मूल तथ्य है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आम सहमति भी है। भले ही डेमोक्रेटिक प्रोग्रेस पार्टी और थाईवान की स्वाधीनता के पक्षधर कैसे इतिहास को तोड़ते हैं और थाईवान की स्वाधीनता का प्रचार करते हैं, परंतु इसमें कोई दोराय नहीं कि थाईवान चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अभिन्न भाग है। चीन के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करने वाले सभी देशों को एक चीन की नीति का दृढ़ता से पालन करना चाहिए, यह भारत सरकार का रुख भी है।

हाल के कुछ अरसे में थाईवान की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेस पार्टी विदेशी शक्तियों के साथ जुड़कर बराबर झगड़े की आग को भड़काती है और चीन को विभाजित करने की कार्रवाई करती है। इससे थाईवान वासियों के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, दोनों तटों के बीच शांतिपूर्ण संबंधों को क्षति पहुंची है और राष्ट्रीय प्रभुसत्ता, सुरक्षा व विकास के हित को खतरे में डाला गया है।

थाईवान का मामला चीन के मूल हित से संबंधित है। चीन तथाकथित थाईवान की स्वाधीनता का दृढ़ विरोध करता है। चीन की छवि पर लांछन लगाने, चीन व अन्य देशों के बीच संबंध खराब बनाने और थाईवान प्रशासन का समर्थन करने वाली सभी कुचेष्टा अवश्य विफल होंगी।

आशा है कि भारत की संबंधित मीडिया चीन की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता से संबंधित मुख्य मुद्दों पर सही रुख अपनाएगी और एक चीन की नीति का पालन करेगी। भारतीय मीडिया को थाईवान की स्वाधीनता के पक्षधर को बोलने का मंच नहीं देना चाहिए, ताकि गलत सूचना देने से बच सके।

(ललिता)

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