खुद की अच्छाई के लिए कार्रवाई करे भारत

2020-09-02 14:40:49
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इधर के दिनों में चीन और भारत की सीमा से फिर एक बार खबरें आयी हैं। सीमांत स्थिति शायद गंभीर होती दिख रही है। एक अहम संकेत है कि 31 से 1 सितंबर को चीन के पश्चिमी रंगमंच, भारत स्थित चीनी दूतावास और चीनी विदेश मंत्रालय ने क्रमशः बयान जारी कर पेंगोंग झील और रेछिन दर्रे के आसपास भारतीय सैनिकों के फिर एक बार चीन में प्रवेश करने की चेतावनी दी।

चीनी पक्ष के बयानों से स्पष्ट रूप से जाहिर है कि तथ्य बहुत स्पष्ट है। भारतीय पक्ष ने सीमा पार की है और 1 सितंबर की शाम तक भी संबंधित सैनिक भारतीय सीमा पक्ष में वापस नहीं लौटे हैं। हालांकि चीन और भारत ने अनेक स्तरीय वार्ताएं कीं और सहमतियां प्राप्त की थीं, फिर भी अब ये प्रयास बेकार हो गये हैं। चीन के पश्चिमी रंगमंच के प्रवक्ता ने 31 अगस्त को कहा कि चीनी सेना आवश्यक कदम उठाकर स्थिति के विकास पर घनिष्ट नजर रखती है और चीनी प्रादेशिक भूमि की प्रभुसत्ता और सीमांत क्षेत्र की शांति व स्थिरता की रक्षा करेगी।

क्यों भारत ने ऐसा किया? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शायद भारत आगे की वार्ता के लिए सौदेबाजी की चिप जोड़ना चाहता है। लेकिन हमें यह जानना चाहिए कि देशों व देशों के बीच संपर्क करने के लिए वचनों का पालन करना बुनियादी सिद्धांतों में से एक है। भारत बड़ा देश बनना चाहता है, लेकिन यदि अपने वचनों का पालन नहीं करता, तो चाहे उनके पास ऊँचा लक्ष्य होता हो, तो भी असली बड़ा देश नहीं बना जा सकता है। चूंकि बड़े देश को और बड़ी जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

हाल में भारत में कोविड-19 की स्थिति अति गंभीर है। देश में आर्थिक विकास को भी बाधा पहुंची है। देश में घरेलू संघर्ष खराब हो रहे हैं। आशा है कि भारत देश की महामारी काम पर ज्यादा ध्यान देकर घरेलू अर्थतंत्र का पुनरुत्थान करने का प्रयास करेगा और चीन के साथ वार्तालाप के जरिए विभिन्न समस्याओं का हल करेगा।

(श्याओयांग)

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