समान दुख से बंधे दो भाई हैं चीन और भारत :मुंबई स्थित चीनी जनरल कॉन्सुल

2020-08-07 09:51:54
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मुंबई स्थित चीनी जनरल कॉन्सुल थांग क्वो त्साई ने हाल ही में एक स्थानीय मीडिया में अपना लेख प्रकाशित किया, शीर्षक है “चीन और भारत समान दुख से बंधे दो भाई हैं”।

लेख में कहा गया है कि कुछ पश्चिमी राजनेताओं ने हांगकांग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की निन्दा की। पर विश्वास है कि भारतीय लोगों , जो औपनिवेशिक दबाव से पीड़ित हो चुके थे, को भी गहरा महसूस होता होगा। क्योंकि उपनिवेशवादियों ने बल से हांगकांग पर कब्जा किया। पर चीन ने शांतिपूर्ण रूप से वार्ता के जरिये हांगकांग को वापस लिया। हांगकांग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का प्रकाशन करने का उद्देश्य अधिकांश हांगकांग वासियों के अधिकारों तथा आर्थिक व सामाजिक विकास की गारंटी करना है। इतिहास में चीन और भारत दोनों को साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। औपनिवेशिक लूट से चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में गरीबी और कमजोरी पैदा की गयी है। चीन और भारत समान दुख से बंधे दो भाई हैं। भले ही उपनिवेशवादियों ने कोई भी अच्छा काम किया हो, लेकिन पापपूर्ण औपनिवेशिक इतिहास को कभी भी महिमामंडित नहीं किया जा सकता है।

लेख में कहा गया है कि हांगकांग और चीन के दूसरे शहरों में काम कर रहे लाखों भारतीय उत्प्रवासियों ने चीन और भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उधर भारत में बिजनेस करने वाले चीनी कंपनियों और उत्प्रवासियों ने भी दोनों देशों के आर्थिक व सांस्कृतिक आदान प्रदान को बढ़ाने के लिए भारी योगदान पेश किया है। आशा है कि भारत अपने यहां काम करने वाले चीनी नागरिकों को एक उचित, न्यायसंगत, पारस्परिक रूप से लाभप्रद वातावरण तैयार कर सके।

लेख में कहा गया है कि हाल ही में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एआईआईबी परिषद की पांचवीं वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय सहयोग के एक नए मॉडल में एआईआईबी का निर्माण किया जाएगा। उधर भारत एआईआईबी के पूंजीनिवेश मुद्दों का सबसे बड़ा लाभार्थी। हमें विश्वास है कि चीन या भारत और यहां तक तमाम मानव समाज का भाग्य समान ही है। शांति और विकास का सिद्धांत सर्वोच्च है।

( हूमिन )

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