कोरोना महामारी : चीन में कम, भारत में ज्यादा, क्या है वजह?

2020-07-26 19:42:07
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“इस समय भारत में कोरोना संक्रमण लगातार फैल रहा है, जबकि चीन में कोरोना पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है चीन और भारत दोनों देशों में आधारभूत संरचनाओं में अंतर होना।” चीन में बिजनेस करने वाले एक भारतीय व्यापारी राजेश पुरोहित ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के संवाददाता अखिल पाराशर को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।

चीन में लाइट और लैंप का बिजनेस करने वाले राजेश पुरोहित ने चीन और भारत में कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप को करीब से देखा है। जब चीन में कोविड-19 महामारी फैल रही थी, तब वे चीन में थे और अब जब भारत में यह महामारी अपने उफान पर है, तो इस समय भारत में हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान परिवार के साथ रहना जरूरी था, जिसकी वजह से वे भारत वापिस चले आये हैं।

उन्होंने सीएमजी को दिए इंटरव्यू में कहा कि चीन और भारत की जनसंख्या लगभग बराबर है, लेकिन भारत का भौगोलिक क्षेत्र चीन से तीन गुना कम है, जिसकी वजह से भारत में जनसंख्या घनत्व चीन से अधिक है। चीन में आधारभूत संरचनाएं बेहद उन्नत और विकसित हैं, साथ ही कोरोना से लड़ने में टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है, जबकि भारत में आधारभूत संरचनाएं उतनी उन्नत नहीं है।

पिछले 5 सालों से चीन में रह रहे राजेश पुरोहित ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि हालांकि, भारत सरकार ने संक्रमण के प्रसार को धीमा करने के लिए बहुत-से प्रयास किए हैं, लेकिन चीन ने संपर्क ट्रेसिंग की उन्नत टेक्नोलॉजी के चलते संक्रमण की चेन को तोड़ने में बहुत जल्द सफल हुआ है, जिसकी वजह से आज वहां संक्रमण के मामले लगभग थम गये हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत में कोरोना संक्रमण ने एक ऐसे मुकाम को पार कर लिया है, जिसकी शुरू में न कल्पना थी और न आशंका। दरअसल, चीन में कोरोना के अधिकांश मामले लक्षण दिखने वाले थे, जबकि भारत में ज्यादातर मामले बगैर लक्षण के हैं। इसके अलावा, चीन और दोनों देशों के लोगों की जीवनशैली अलग-अलग है। आमतौर पर भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक है, जिसके चलते दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में संक्रमण की ऊष्मायन अवधि अधिक है। अधिकांश मामलों में भारतीयों में कोरोना संक्रमण के लक्षण आने में बहुत अधिक समय लग जाता है, या फिर आते ही नहीं है लेकिन उस दौरान संक्रमण फैला सकते हैं।

उन्होंने इंटरव्यू में यह भी कहा कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए शरीर के तापमान की जांच करना, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना, मास्क लगाना आदि कारगर कदम हैं, लेकिन बगैर लक्षण वाले मामलों में ये कदम उतने ज्यादा कारगर नहीं है। उसके लिए न्यूक्लिक एसिड परीक्षण करना आवश्यक होता है।

हालांकि, राजेश पुरोहित ने पोर्टेबल पल्‍स ऑक्‍सीमीटर को कोरोना वायरस स्‍क्रीनिंग और परीक्षण प्रणाली में मददगार बताया है। दरअसल, पल्‍स ऑक्‍सीमीटर एक छोटी सी डिवाइस होती जो मरीज़ की उंगली में फिट की जाती है। इससे मरीज़ की नब्‍ज़ और खून में ऑक्‍सीजन की मात्रा का पता चलता है। इससे मरीज़ों में 'कोविड निमोनिया' का भी पता चलता है।

(अखिल पाराशर---चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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