महामारी के कुप्रभाव से भारत का विनिर्माण मंदी में फंसा

2020-07-20 13:02:58
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समूचे भारत में स्थित 300 से अधिक बड़े, मध्य व लघु विनिर्माण उद्यमों पर की गयी जांच से पता चला है कि मोटर वाहन उद्योग महामारी से सबसे अधिक पीड़ित है। इस जांच रिपोर्ट को भारतीय उद्योग व वाणिज्य संघ (फिक्की) ने 19 जुलाई को जारी की।

इस जांच रिपोर्ट से यह पता चला है कि चमड़ा और जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली, टेक्सटाइल मशीनरी आदि व्यवसाय भी मंदी में फंसे हुए हैं। साथ ही इस संस्था ने ऑटोमोबाइल, सीमेंट और सिरेमिक, रसायन, उर्वरक और फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल, चमड़े और जूते, चिकित्सा उपकरण, टेक्सटाइल आदि व्यवसायों का मूल्यांकन भी किया है।

परिणाम से यह जाहिर हुआ है कि इस वर्ष के जनवरी से मार्च तक विनिर्माण व्यवसाय की कुल उत्पादन क्षमता 61.5 प्रतिशत तक कम हुई है। साथ ही अनुमान है कि दूसरी तिमाही में 90 प्रतिशत उद्यमों में उत्पादन नहीं बढ़ा। कम समय में भारतीय विनिर्माण की संभावना आशावान नहीं होगी। केवल 22 प्रतिशत उद्यमों ने आगामी आधे साल में पूंजी-निवेश बढ़ाने की योजना बनायी है। उधर, 85 प्रतिशत उद्यमों के विचार में वे आगामी तीन महीनों में ज्यादा श्रमिकों का प्रयोग नहीं करेंगे।

महामारी के कुप्रभाव से कई व्यवसायों में श्रमिकों का अभाव भी मौजूद है। टेक्सटाइल व टेक्सटाइल मशीनरी व्यवसाय में केवल एक तिहाई मज़दूर काम कर सकते हैं। और ऑटोमोबाइल, चमड़े व जूते आदि व्यवसायों में भी केवल 35 प्रतिशत मजदूर कारखाने में काम कर सकते हैं।

चंद्रिमा

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