सुरक्षा कानून पारित होने से हांगकांग में बनेगा शांति का माहौल- प्रोफेसर दीपक

2020-05-28 17:02:30
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हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी कानून बीजिंग में आयोजित एनपीसी यानी नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में पारित हो गया है। जेएनयू में चीनी भाषा के प्रोफेसर बी.आर. दीपक ने सीएमजी के साथ बातचीत में कहा कि यह कानून हांगकांग की स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम है।

बकौल दीपक दो सत्रों के दौरान चीनी प्रतिनिधियों ने हांगकांग के लिए एक सुरक्षा कानून बनाने पर चर्चा की और इसे पारित किया। यह हांगकांग के मूल कानून के अनुसार है। जैसा कि आर्टिकल-23 में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, राजद्रोह व देश की सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों को लेकर जो कानून पारित किया जाना था, वह लंबे समय से लंबित था। लेकिन अब स्थिति काबू से बाहर हो गयी है, ऐसे में चीन के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। इसलिए देश की सर्वोच्च सभा में इसे पास करने का फैसला किया गया।

इस कानून के लागू हो जाने से हांगकांग में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों को मिलने वाली बाहरी मदद पर रोक लग सकेगी। खासतौर पर राष्ट्र विरोधी ताकतें, जो हांगकांग में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, उन पर काबू पाने में चीन को सफलता मिल पाएगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हांगकांग के मसले पर साफ नजर आता है कि अमेरिका व अन्य पश्चिमी देश दखलंदाजी कर रहे हैं। लेकिन यह कोई नहीं बात नहीं है, हांगकांग में जिस तरह से साल 2003, 2013, 2014 और फिर 2019 में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लेकिन साल 2019 में तो प्रदर्शनकारियों ने कुछ ज्यादा ही हद कर दी। उन्होंने चीनी राष्ट्रीय ध्वज व कार्यालयों को बहुत नुकसान पहुंचाया। इस तरह के कृत्य किसी भी देश के लिए बुरी खबर और चिंता का विषय होते हैं।

प्रत्येक देश ऐसे मामले को गंभीर ढंग से लेता है, चीन ने भी ऐसा ही किया। पिछले साल हांगकांग में लगातार जो घटनाएं हुई, प्रदर्शन हुए, उससे वहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से डांवाडोल हो गयी। उस वक्त भी चीन ने हांगकांग में अशांति फैलाने वालों और बाहरी ताकतों को चेतावनी दी थी। जिसमें अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन भी शामिल थे। चीन ने उक्त देशों से हांगकांग में गड़बड़ी फैलाने की साजिश न करने की मांग की थी। जिस तरह प्रदर्शनकारियों को विदेशी शक्तियों द्वारा शह दी जाती रही है, उन्हें आर्थिक मदद मिलती रही है। हाल के दिनों में जो उग्र प्रदर्शन हुए उसमें पश्चिमी मदद का अहम रोल रहा है। क्योंकि पहले कभी ऐसा नहीं देखा गया था। इन वजहों से हांगकांग में अस्थिरता फैल रही है।

अनिल आज़ाद पांडेय

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