लॉकडाउन हटाने और उत्पादन बहाली को संतुलित करना भारत सरकार के लिए “अग्नि परीक्षा”

2020-05-21 17:43:52
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इस समय भारत में राष्ट्रीय लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है। इधर के दो महीनों में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक विकास में मंदी आयी है। केंद्र सरकार को आनन-फानन में कामकाज और उत्पादन बहाल करना पड़ा, ताकि देश में वृद्धि और रोजगार की स्थिरता को बरकरार रखा जा सके। लेकिन महामारी की स्थिति लगातार गंभीर होने और नीतियों के प्रचार व मार्गदर्शन की कम कारगरता की वजह से भारत में कामकाज और उत्पादन की बहाली में बड़ी चुनौतियां और बाधित शक्ति पैदा हो रही हैं।

राष्ट्रीय लॉकडाउन से आर्थिक विकास को रोकना पड़ा

भारत में घरेलू उत्पादन मूल्य (जीडीपी) का 60 प्रतिशत भाग सेवा उद्योग से आता है। लॉकडाउन से आर्थिक विकास पर ब्रेक लग गया है। भारतीय आर्थिक निरीक्षण केंद्र द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में देश में बेरोजगार दर 8.7 प्रतिशत रही, जो पिछले 43 महीनों में सबसे ऊंची है। अप्रैल में भारत में बेरोज़गार दर तेज़ी से बढ़कर 23.5 प्रतिशत तक पहुंच गई।

आंकड़ों से पता चला कि हाल ही में भारतीय विनिर्माण उद्योग का विकास साफ तौर पर धीमा हो रहा है। विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) फरवरी के 54.5 से 51.8 तक कम किया गया, और सेवा उद्योग में पीएमआई फरवरी के 57.5 से 49.3 तक घट गया। वहीं, अप्रैल में विनिर्माण पीएमआई 27.4 तक गिर गया और सेवा उद्योग पीएमआई केवल 5.4 रहा, जो पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा खराब है।

अर्थतंत्र के अस्पष्ट भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग संस्था फ़िच ने अप्रैल के अंत में भारत के चालू वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक) में आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 0.8 प्रतिशत तक कम किया। नवीनतम अनुमान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विचार में भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को कम किए जाने की संभावना है।

सात तिमाहियों में लगातार गिरावट के बाद इस वर्ष के पहले दो महीनों में भारत में आर्थिक उत्थान देखने को मिला, लेकिन महामारी की वजह से उत्थान का रुझान रुक गया, यहां तक कि आर्थिक वृद्धि इस वित्तीय वर्ष में बड़ी गिरावट का मुंह देखेगी।

बहु-कदमों से कामकाज और उत्पादन की बहाली

आर्थिक उत्थान में तेजी लाने के लिए भारत सरकार को लॉकडाउन के दौरान आंशिक कारोबारों के उत्पादन को बहाल करना पड़ा। अप्रैल के अंत में कृषि, विनिर्माण और परियोजनाओं के निर्माण जैसे क्षेत्रों को बहाल किया गया। इसी दौरान सरकार प्रशासनिक तरीके अपनाते हुए देश भर में ग्रिड प्रबंधन करती है, महामारी स्थिति के अनुसार कामकाज और उत्पादन की बहाली का मार्गदर्शन करती है।

विश्लेषकों के विचार में ग्रामीण अर्थतंत्र की स्थिरता को बनाए रखना और गांवों में आधारभूत संस्थापनों के निर्माण में निवेश को बढ़ाना भारत सरकार के आर्थिक उत्थान का महत्वपूर्ण तरीका है। हालांकि कृषि उद्योग का भारत की जीडीपी में केवल 17.3 प्रतिशत का अनुपात रहा है, लेकिन इससे आधे से ज्यादा भारतीय जनसंख्या को आजीविका मिलती है। ग्रामीण उपभोग भारत में भी भारत की समग्र उपभोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

12 मई को भारत ने कुल 2 अरब रुपये वाली आर्थिक योजना सार्वजनिक की, जिसका उद्देश्य लघु और मध्यम कारोबारों तथा गैर-बैंकिंग संस्थाओं का समर्थन करना है, ताकि मुश्किल में फंसे कारोबारों को मदद मिल सके और रोजगार को स्थिर बनाया जा सके।

उत्पादन की बहाली में बड़ी चुनौती फिर भी मौजूद

वर्तमान में भारत में महामारी लगातार फैल रही है, जो अभी तक अपनी चरम स्थिति पर नहीं पहुंची है। इस तरह महामारी की रोकथाम और कामकाज व उत्पादन की बहाली के बीच अंतर्विरोध का समन्वय करना अत्यंत आवश्यक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष दूत डॉ. डेविड नाबार्रो ने हाल में भारतीय मीडिया को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि भारत में महामारी की स्थिति संभवतः जुलाई के अंत में शीर्ष पर पहुंचेगी, इसके बाद वृद्धि वक्र समतल होगा। उनके विचार में भारत में लॉकडाउन हटाए जाने के बाद और ज्यादा पुष्टिकृत मामले सामने आएंगे, लेकिन आम स्थिति फिर भी स्थिर बनी रहेगी। लेकिन लॉकडाउन हटाने और उत्पादन की बहाली को संतुलित करना भारत सरकार की सही मायने में “अग्नि परीक्षा” होगी

विशेषज्ञों के विचार में महामारी से आपूर्ति और मांग दोनों तरफ से भारतीय अर्थतंत्र पर दबाव पड़ा है। केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए नवीनतम सर्वेक्षण से पता चला कि वर्तमान में और आने वाले एक साल में भारतीय नागरिकों की खर्च-उम्मीद कम होगी। मांग की कमी से भविष्य में आर्थिक बहाली पर भी कुप्रभाव पड़ेगा।

(श्याओ थांग)

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