भारत में महामारी की स्थिति गंभीर, सरकार की मुकाबला क्षमता उन्नत

2020-05-20 17:21:46
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भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 19 मई को देश भर में कोरोनावायरस निमोनिया से संक्रमित मरीजों की संख्या एक लाख से ज्यादा हो गई है। इसके साथ ही भारत में वायरस की जांच, मरीजों के इलाज, रक्षात्मक उपकरणों के उत्पादन आदि क्षेत्रों में क्षमता लगातार बढ़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले एक या दो महीनों में भारत में महामारी की स्थिति चरम सीमा तक पहुंच जाएगी।

एक लाख से ज्यादा मरीज होने की वजह से भारत विश्व में कोविड-19 से ग्रस्त 11वां बड़ा देश बन गया है। मंगलवार को जारी आंकड़ों से पता चला है कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली चार क्षेत्रों की स्थिति सबसे गंभीर है, जहां पुष्टिकृत मामलों की संख्या दस हज़ार से अधिक हैं।

इधर के दिनों में भारत में मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह जांच क्षमता के बढ़ने से संबंधित है। 19 मई तक भारत में 24 लाख नमूनों की जांच की गईं, प्रति दस लाख लोगों में 1500 से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकती है।

इसके अलावा, भारत में मरीजों का इलाज करने, रक्षात्मक उपकरणों के उत्पादन आदि क्षेत्रों में क्षमता भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 10 मई तक भारत में मरीजों के लिए कुल 6.5 लाख बिस्तर तैयार हुए, जिनमें एक लाख बिस्तरों की ऑक्सिजन आपूर्ति है और 34 हजार बिस्तर गंभीर स्थिति मरीजों के लिए तैयार हैं। भारत में व्यक्तिगत रक्षात्मक उपकरण और मास्क की उत्पादन क्षमता भी महामारी के शुरु की तुलना में काफ़ी हद तक उन्नत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को कहा कि भारत में रोजाना 2 लाख व्यक्तिगत रक्षात्मक उपकरण और 2 लाख एन95 मास्क का उत्पादन करने में सक्षम है।

भारतीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने 18 मई को कहा कि 25 मार्च के बाद से लेकर अब तक महामारी के मुकाबले के लिए सरकार ने क्रमशः तीन बार राष्ट्रीय लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाया। वर्तमान में लॉकडाउन चौथे चरण में प्रवेश हो चुका है। महामारी पर अंकुश लगाने के कदम कारगर साबित हुए हैं। अभी तक भारत में प्रति एक लाख लोगों में 7.1 मामले संक्रमित होते हैं, जो वैश्विक स्तर से कम है। डॉ. हर्ष वर्धन के मुताबिक, आने वाले दिनों में भारत सरकार की कार्य प्रधानता महामारी से प्रभावित अर्थतंत्र को बहाल करना होगी।

लेकिन, कुछ विशेषज्ञों के विचार में आने वाले एक या दो महीनों में भारत में महामारी का प्रकोप चरम पर होगा। दिल्ली में अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि मॉडल डेटा और पुष्टिकृत मामलों की वृद्धि स्थिति के अनुसंधान के अनुसार, अनुमान है कि जून और जुलाई में भारत में महामारी की स्थिति चरम पर होगी। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष दूत डॉ. डेविड नाबर्रो ने हाल में भारतीय मीडिया को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि भारत में महामारी की स्थिति संभवतः जुलाई के अंत में शीर्ष पर पहुंचेगी, इसके बाद वृद्धि वक्र समतल होगा। उनके विचार में भारत में लॉकडाउन हटाए जाने के बाद और ज्यादा पुष्टिकृत मामले सामने आएंगे, लेकिन आम स्थिति फिर भी स्थिर बनी रहेगी।

(श्याओ थांग)

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