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लॉकडाउन से किया चीन ने कोरोनावायरस को काबू

2020-03-24 14:37:55
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नया कोरोनावायरस महामारी, जिसे कोविड-19 भी कहा जाता है, ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इससे संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में बढ़कर 3,81,529 हो गई है, जबकि 16,554 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इटली में कोरोनावायरस के कारण 64 हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं, और 6 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चीन में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 81,171 तक जा पहुंची है, और 3277 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

लेकिन चीन में संक्रमण के मामले थम रहे हैं। पिछले कई दिनों से चीन में कोरोनावायरस के नए घरेलू मामले नहीं आए है, और जो भी मामले दिखे हैं वो विदेश से आए हुए लोगों के हैं। वाकई चीन की यह एक बड़ी सफलता है। आज सभी की निगाहें चीन पर टिकी हैं कि आखिर चीन ने ऐसा क्या किया, जो इस भयावह बीमारी को रोक पाने में कामयाब हो पाया है।

सच में, चीन कोरोनावायरस महामारी के इस दौर से उबरने में कामयाब रहा है और निश्चित रूप से त्वरित आर्थिक सुधार पर जोर दे रहा है। चीन ने अब वुहान के सभी 16 अस्थायी अस्पतालों को बंद कर दिया है, जो कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए तैयार किये गये थे। इससे जाहिर है कि चीन के रोकथाम और नियंत्रण के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

चीन में नए पुष्ट मामलों की संख्या कई हजार से गिरकर लगभग 20 के आसपास रह गई है। रोगियों की इलाज दर में वृद्धि हुई है, और 70 हजार से अधिक रोगी स्वस्थ हो गये हैं, जिसका मतलब है कि 76 प्रतिशत रोगियों को अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। इससे तो यही लग रहा है कि चीन में महामारी का दौर खत्म होने की तरफ है।

दरअसल, चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने इस महामारी को चीन के लिए एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल माना है। अन्य प्रांतों और क्षेत्रों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए चीन ने राष्ट्रीय संयुक्त रोकथाम और नियंत्रण तंत्र स्थापित किया। इस दौर में चीनी लोगों ने अपनी सरकार का पूरा साथ दिया है और अपने असाधारण प्रयासों के साथ इस महामारी के खिलाफ जनयुद्ध लड़ा है। चीनी जनता ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि उनमें महामारी के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए पूर्ण आत्मविश्वास, क्षमता और दृढ़ संकल्प है। चीन के इन प्रयासों की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी तारीफ की है।

महामारी पर लगभग विजय पाने के बावजूद भी चीन ने महामारी के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई ढील नहीं बरती है। विभिन्न रोकथाम और नियंत्रण उपायों को सख्ती से जारी रखे हुए है, और अपनी सफलता को मजबूत कर रहा है। आज भी पूरे चीन में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय बंद है और सभी छात्र ऑनलाइन ही पढ़ाई कर रहे हैं, लोग घर से ही अपना काम निपटा रहे हैं, भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में नहीं जा रहे हैं, हर जगह बुखार मापा जा रहा है, मास्क पहनने, हाथ धोने आदि हर जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।

दरअसल, चीन ने इस बीमारी पर काबू वुहान में लॉकडाउन करके किया, और देश के तमाम प्रांतों व शहरों में लोगों की आवाजाही को परिसीमन किया। वुहान करीब छह हफ्तों तक लॉकडाउन रहा। वहां मैट्रो, बस, टैक्सी, एयरपोर्ट आदि सभी सार्वजनिक परिवहन बंद कर दिये, लोगों का घरों से निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया, सभी रास्तों पर पुलिस तैनात कर दी, स्कूल, दुकानें, ऑफिस पूरी तरह से बंद कर दिये, जिसके चलते संक्रमण के फैलने में बेहद कमी आयी। असल में लॉकडाउन जैसा कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इससे लोगों में जागरूकता बढ़ी और लोग इस खतरे से बचने के लिए सतर्क भी हुए।

चीन के बाद दुनिया के 20 से ज्यादा देशों में लॉकडाउन लग चुका है। करीब 120 करोड़ लोग घरों में बंद हैं, लेकिन कहीं पर भी इसका चीन जितना कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। इसलिए इन जगहों पर लॉकडाउन के बावजूद कोरोनावायरस के नए मामलों में कमी नहीं आई है। डब्ल्यूएचओ ने भी माना है कि चीन ने लॉकडाउन के चलते कोरोनावायरस पर काबू पाने में कामयाबी पाई है।

चीन ने इन बातों पर बड़ा ध्यान दिया कि लोगों में वायरस के लक्षण की तुरंत ही पहचान की जाए, तुरंत ही सूचना दी जाए, तुरंत ही उन्हें अलग-थलग किया जाए, और तुरंत ही इलाज किया जाए, ताकि इलाज की दर में बढ़ोतरी हो सके और मरने वालों की दर में गिरावट आ सके।

इसके अलावा, चीन ने रोगियों के प्रभावी उपचार को सक्षम बनाने के लिए बढ़िया से बढ़िया चिकित्सा संसाधनों और मेडिकल पेशेवरों की टीम बनायी। इस दौरान चीन ने हुपेई प्रांत के वुहान शहर में केवल दस दिनों के भीतर ही दो अस्पताल- हुओशनशान और लेइशनशान का निर्माण किया, जो मुख्य तौर पर नये कोरोनावायरस संक्रमण ग्रस्त रोगियों के उपचार के लिए हैं। देश के अन्य प्रांतों से हजारों डॉक्टरों को हुपेइ प्रांत भेजा और करोड़ों लोगों को घर पर अलग रहने की व्यवस्था करवाई। ऐसे कदमों से महामारी के फैलाव को काफी हद तक रोका गया है।

चीन का मानना है कि जब तक वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है तब तक चीन जीत की घोषणा नहीं करेगा, इसलिए उसने सभी रोकथाम और नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए निरंतर प्रयास करना जारी रखा हुआ है। वह वैज्ञानिक तरीके से चिकित्सा संसाधनों और महत्वपूर्ण सामग्रियों को आवंटित कर महामारी के खिलाफ संघर्ष कर रहा है, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग का विस्तार कर रहा है, साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास को गति दे रहा है।

इस समय चीन अपने दोनों हाथों से काम कर रहा है। एक ओर, महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है तो दूसरी ओर, निरंतर और सुदृढ़ आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन बहाल कर रहा है।

ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो 48,000 सरकारी उद्यमों और बड़े औद्योगिक उद्यमों की बहाल दर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई है। चीन के टॉप 500 विनिर्माण उद्यमों में, यह 97 प्रतिशत से अधिक है। फरवरी से 30 करोड़ से अधिक लोग काम पर लौट आए हैं। चीन के अधिकांश हिस्सों में उत्पादन और जीवन धीरे-धीरे और व्यवस्थित रूप से ठीक होना शुरू हो गया है।

चीन सरकार ने अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए वित्त, बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में कई उपाय किए हैं, जैसे कि पूंजी निवेश में वृद्धि, कर में कमी और शुल्क में कमी, तरजीही ब्याज दरों के साथ ऋण समर्थन में वृद्धि की है। स्थानीय सरकारों ने भी रोजगार और लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय किए हैं, जो अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए असरदार हैं।

(अखिल पाराशर)

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