सूचना:चाइना मीडिया ग्रुप में भर्ती

चीन द्वारा दिखायी गयी पारदर्शिता व तत्परता प्रशंसनीय

2020-02-09 16:43:57
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नोवल कोरोना वायरस के कहर के बीच यह बताना जरुरी हो जाता है कि चीन ने इस बार 2003 की सार्स महामारी की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शिता और तत्परता दिखायी है। इस बात के लिए चीन की केंद्र सरकार की तारीफ करनी होगी। लेकिन चीन की आलोचना करने वालों को चीन द्वारा उठाए गए कदम नजर नहीं आए, जिनमें वूहान के 1 करोड़ से अधिक लोगों को इस संकट की घड़ी में किस तरह शांत किया गया। इसके साथ ही दस दिन के भीतर दो अस्पतालों का निर्माण भी चीन की तमाम एजेंसियों के व्यापक प्रयास से ही पूरा हो पाया है। यह बात चाइना मीडिया ग्रुप के साथ एक साक्षात्कार में भारत के नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पी.आर.दीपक ने कही।

उन्होंने कहा कि हालांकि सुरक्षात्मक चिकित्सा उपकरणों की कमी और सख्त कदमों ने लोगों में घबराहट और निराशा पैदा की है। फिर भी, वुहान में बुनियादी आवश्यक आपूर्ति की आपूर्ति पर नियंत्रण रखने वाली चीनी सेना लोगों का भरोसा जीतने में सफल रही है।


यहां बता दें कि चीन ने केंद्रीय और स्थानीय आपात प्रतिक्रिया तंत्रों को तेज़ी से सक्रिय किया और मुश्किल समय से उबरने के लिए लचीलापन और आर्थिक साधन उपलब्ध कराए। मुसीबत की इस घड़ी में अन्य देशों को न केवल चीनी लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करनी चाहिए, बल्कि चीन को मदद भी देने की जरूरत है। इस तरह के सहयोग से वायरस से प्रभावित लोगों और चीन सरकार का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही महामारी के मुकाबले में जल्दी सफलता भी हासिल हो सकती है। इस संदर्भ में, चिकित्सा विशेषज्ञ और मदद के लिए टीम भेजने वाली सरकारों का स्वागत किया जाना चाहिए।

यद्यपि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन के खिलाफ यात्रा या व्यापार प्रतिबंधों की सिफारिश नहीं की है, हालांकि, यह भी समझने वाली बात है कि कई सीमावर्ती देशों ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है, कई देशों ने चीन के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं और वुहान से अपने नागरिकों को निकाला है और अपने नागरिकों के लिए ट्रेवल एडवायज़री जारी की है। लेकिन कहना होगा कि चीन के लिए उड़ानों को कैंसल करने से समस्या हल नहीं होगी।

यह भी सच्चाई है कि अगर यह महामारी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे चीन सहित पूरी दुनिया को भारी आर्थिक नुकसान सहना पड़ेगा। क्योंकि चीन वैश्विक विकास में 30 फीसदी से अधिक का योगदान देता है। ऐसा होने से भारत और अमेरिका सहित तमाम देश आर्थिक संकट में फंस जाएंगे।


अनिल आज़ाद पांडेय


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