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“शांतिपूर्ण विकास रास्ते पर आगे बढ़ना चीन का रणनीतिक विकल्प”- भारत में चीनी राजदूत

2020-01-30 16:27:23
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भारत में चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने 29 जनवरी को अखबार“ इंडियन एक्सप्रेस”में नामांकित लेख प्रकाशित किया।“शांतिपूर्ण विकास रास्ते पर आगे बढ़ना चीन का रणनीतिक विकल्प है”शीर्षक इस लेख में कहा गया कि शांतिपूर्ण विकास वाला चीन का विकल्प चीन के सांस्कृतिक जीन, कष्टपूर्ण अनुभव, घरेलू मांग और वैश्विक भावना पर आधारित है। चीन एक शांतिपूर्ण विकास, सहयोग और उभय जीत वाले रास्ते पर आगे बढ़ने पर विश्वासबद्ध और सक्षम है। यह रास्ता चीन द्वारा किए गया सामरिक विकल्प और गंभीर वादा है।

लेख में कहा गया कि चीन के शांतिपूर्ण विकास को चुनना चीनी सांस्कृतिक जीन पर आधारित है। चीनी राष्ट्र शांति-प्रेमी है। पाँच हज़ार से अधिक सालों में शांति, सामंजस्य और मेल मिलाप की खोज चीनी राष्ट्र की मानसिक दुनिया में बसती है। प्राचीन चीनी दार्शनिकों द्वारा प्रस्तुत “दुनिया भर में सद्भाव”, ”सद्भाव अनमोल है”,”सद्भाव लेकिन भिन्नता मौजूदा” और ”युद्धप्रिय मर जाएगा”आदि विचारधराओं का आज तक चीनियों पर प्रभाव है। औद्योगिक क्रांति के पूर्व कई हज़ार से अधिक सालों में चीन की शक्ति विश्व की अग्रिम पंक्ति में रही, लेकिन चीन के पास उपनिवेश और विस्तार का कोई रिकॉर्ड कभी नहीं रहा।

चीन के शांतिपूर्ण विकास को चुनना चीनियों के कष्टपूर्ण अनुभव पर आधारित है। आधुनिक काल में प्रवेश होने के बाद चीन का विकास युगात्मक विकास से पीछे रहा। विदेशी ताकतवर देश चीन पर लगातार आक्रमण किया करते थे। चीनी जनता कष्ट वाली स्थिति में पड़ती थी। प्राचीन पूर्वी शक्तिशाली देश अर्ध-सामंती अर्ध-औपनिवेशिक समाज बन चुका था। सौ वर्षों के संघर्ष में करोड़ों चीनियों के बलिदान होने से राष्ट्रीय स्वतंत्रता और मुक्ति हासिल हुई। युद्ध के कष्ट चीनियों की अविस्मरणीय यादें हैं। कंफ्यूशियस का कहना है कि “जो कुछ स्वयं आप नहीं चाहते हों, दूसरे के सिर पर न थोपें”। चीन अपने पीड़ित हुए कष्ट को दूसरे देशों पर कतई नहीं थोप देता।

लेख में कहा किया कि चीन के शांतिपूर्ण विकास को चुनना घरेलू मांग पर आधारित है। विकास प्रथम मिशन है, यह सिद्धांत विभिन्न देशों के अनुकूल है। पिछले 70 सालों में चीन ने ऐतिहासिक विकसित कामयाबियां प्राप्त कीं, आर्थिक मात्रा विश्व के दूसरे स्थान पर रही। लेकिन इसके साथ ही चीन फिर भी विश्व में सबसे बड़ा विकासशील देश है। कुल आर्थिक मात्रा को 1.4 अरब जनसंख्या विभाजित किया जाए, तो प्रति व्यक्ति की औसतन जीडीपी विश्व में 70वें स्थान के आसपास है। हर साल चीन को 1.5 करोड़ जनसंख्या के रोजगार वाले सवाल का समाधान करना पड़ता है। बेशक इतनी बड़ी जनसंख्या वालों के समृद्ध जीवन की प्राप्ति के लिए दीर्घकालिक कठोर प्रयास की जरूरत है। चीन अपने निर्माण पर जुटा रहा है, इसके लिए एक शांतिपूर्ण बाहरी वातावरण की आवश्यकता है।

चीन के शांतिपूर्ण विकास को चुनना चीनियों की वैश्विक भावना पर आधारित है। चीन के विकास को शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल से लाभ मिला है। चीन खुद के विकास से वैश्विक शांति को आगे बढ़ाना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक देशों में एक, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन के लिए दूसरा बड़ा पूंजी देने वाले देश होने के नाते पिछले 70 सालों में चीन विदेशों की सहायता के लिए कुल 4 खरब युआन की राशि दे चुका है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के बाद से लेकर अब तक वैश्विक आर्थिक विकास में चीनी आर्थिक वृद्धि की सालाना योगदान दर 30 प्रतिशत से अधिक है। वर्तमान में चीन सरकार न्यू कोरोना वायरस निमोनिया की कारगर राकथाम और अंकुश के लिए दृढ़ और जबरदस्त कदम उठा रही है। इसके साथ ही चीन विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ घनिष्ठ सहयोग कर रहा है। वायरस और महामारी स्थिति से संबंधित सूचना को समय पर साझा करता है। इस से वैश्विक स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति चीन का उच्च स्तरीय जिम्मेदाराना रूख जाहिर हुआ।

लेख में यह भी कहा गया कि चीन से वैश्विक विकास को मौका मिलता है। चीन का शक्तिशाली बनना अपरिहार्य रुझान है। लेकिन चीन दूसरे देश के हितों के बदले खुद का विकास नहीं करता। इसके साथ ही चीन अपने उचित अधिकारों और हितों को कभी नहीं छोड़ देगा। चीन हमेशा से राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा, विकास हित को दृढ़ता के साथ रक्षा करता है। किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा थाईवान, हांगकांग, तिब्बत और शिनच्यांग मुद्दे को लेकर देश के अंदरूनी मामलों पर हस्तक्षेप करने की कतई इजाजत नहीं देता। बीते सालों में चीन शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वातावरण की प्राप्ति से खुद का विकास करता है, और साथ ही खुद के विकास से वैश्विक शांति को बनाए रखता है और उसका संवर्धन करता है। भविष्य में चीन अपने शांतिपूर्ण विकास रास्ते पर दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगा, इसके साथ ही चीन को आशा है कि विश्व के दूसरे देश शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। समान रूप से मानव जाति के एकमात्र घर के रूप में पृथ्वी की शांति, स्थिरता और समृद्धि की रक्षा करेंगे।

लेख में कहा गया कि चीन ने ”शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर डटा रहने, आपसी लाभ उभय जीत और खुलेपन वाली रणनीति पर डटा रहने” को संविधान में शामिल किया। चाहे कितना भी विकसित हो जाए, चीन दुनिया भर में अपना प्रभुत्व नहीं जमाएगा, विस्तार नहीं करता और अपना प्रभावित क्षेत्र नहीं खोजता। यह युक्तियुक्तता के लिए चीन का अस्थाई कदम नहीं है, यह चीन द्वारा किया गया रणनीतिक विकल्प और गंभीर वादा ही है।

(श्याओ थांग)

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