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नई दिल्ली : विश्व पुस्तक मेले में चीन-भारत सांस्कृतिक संबंध की फोटो प्रदर्शनी

2020-01-05 16:37:39
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दिल्ली के प्रगति मैदान में आज से विश्व पुस्तक मेला-2020 के आगाज के साथ किताबों में दिलचस्पी रखने वालों का उत्सव शुरू हो गया है। प्रगति मैदान में हॉल नंबर 7 के अंदर बुक स्टॉल के बीच एक पैवेलियन बनाया गया है, जहां आगंतुकों को तस्वीरों के माध्यम से चीन और भारत के बीच 2,000 से अधिक वर्षों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान की गाथा सुनायी जा रही है।

इस फोटो प्रदर्शनी की उद्घाटन शनिवार को भारत स्थित चीनी राजदूत सुन वेइतोंग ने किया और वहां प्रदर्शित तस्वीरों को बड़े शांत भाव के साथ निहारा।

कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रदर्शनी चीन-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इतिहास में लोगों, वस्तुओं और घटनाओं का एक कालानुक्रमिक और व्यापक विवरण प्रस्तुत करती है।

पेकिंग विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन के प्रोफेसर च्यांग चिनखुई ने कहा, "हमारी तस्वीरें उस रिश्ते का पता लगाती हैं जिसे भारत और चीन ने अतीत में बड़े शानदार ढंग से निभाया। हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं और मैं भारत के लोगों को चीन का दौरा करने और इसका पता लगाने के लिए आमंत्रित करता हूं।"

वहां लगी फोटो प्रदर्शनी में दोनों देशों के प्राचीन नेताओं, दार्शनिकों और आधुनिक समय के राजनीतिक नेताओं की तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है।

इस फोटो प्रदर्शनी के अंत में एक नोट लिखा है, "चीन-भारत संबंध बहुत जटिल है, जिसे सौ तस्वीरों और हजारों शब्दों से चित्रित नहीं किया जा सकता। हमने चीन और भारत के बीच 2,000 साल के सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सामान्य विवरण देने की उम्मीद में विवरण के साथ तस्वीरों का चयन किया है।"

इस पैवेलियन से कुछ ही दूरी पर चीन का बुक स्टॉल है जहां अंग्रेजी भाषा में चीनी पुस्तकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

चीनी राजदूत ने पुस्तक मेले के दौरान चीनी स्टॉल पर एक मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा, "यदि आप चीन को समझना चाहते हैं, तो आपको चीन के बारे में पढ़ना होगा, तभी आप इसके इतिहास, संस्कृति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और इसके अर्थशास्त्र को समझ सकते हैं।"

राजदूत सुन ने यह भी कहा, "जैसा कि आप शी जिनपिंग (चीनी राष्ट्रपति) की किताब "अप एंड आउट ऑफ पॉवर्टी (गरीबी से मुक्त)" पढ़ेंगे, आपको वह रहस्य पता चलेगा जिसने चीन को गरीबी से मुक्त होने में मदद की थी।"

चीनी राजदूत ने अपने व्याखान में यह भी कहा, "भारत और चीन दोनों ही सबसे बड़ी सभ्यताएं हैं और चूंकि बड़ी आबादी हैं तो हम यदि एकसाथ आयें और आवाज दें, तो कोई भी उसे नजरअंदाज नहीं कर सकता।

उन्होंने यह भी कहा, "किताबें बाहर की दुनिया के लिए एक बड़ी खिड़की खोलती हैं। मुझे उम्मीद है कि यहां की किताबें चीन और भारत के बीच पुल का काम करेंगी।"

(अखिल पाराशर)

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