चीन में पर्यावरण को लेकर युवाओं को जागरूक करने वाली निधि शर्मा से ख़ास बातचीत

2019-10-23 19:07:04
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पर्यावरण और प्रकृति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आम लोगों के लिए जो प्रकृति है, उसे विज्ञान में पर्यावरण कहा जाता है। पर्यावरण का संबंध उन जीवित और गैर-जीवित वस्तुओं से हैं, जो हमारे आसपास मौजूद है, और जिनका होना हमारे लिए बड़ा महत्वपूर्ण है, लेकिन आज वही अब संकट की स्थिति में है। आज उसकी सुरक्षा के सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस सवाल के निवारण में बहुत-सी संस्थाएं, व्यक्तिगत लोग, समाजसेवी आदि प्रयासरत हैं। पिछले 9 सालों से चीन के शांगहाई शहर में रह रही भारतवंशी निधि शर्मा भी पर्यावरण को लेकर लोगों को जागरूक करने में अपना योगदान दे रही हैं। उन्होंने साल 2016 में एक पेरेंटिंग ग्रुप (अभिभावक समूह) का गठन किया, जहां पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं को जागरूक करती हैं।

शांगहाई के एक इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाती निधि शर्मा ने चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के साथ ख़ास बातचीत में कहा, “पर्यावरण पूरी दुनिया की समस्या है, किसी खास एक देश या शहर की समस्या नहीं है। हमने सोचा कि पर्यावरण के प्रति बच्चों व युवाओं को जागरूक किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा, “युवाओं को संवेदनशील बनाने की जरूरत है, क्योंकि वे हमारे पथप्रदर्शक हैं, और आगे जाकर वे ही देश की भागडोर संभालेंगे। युवावस्था में ही जब पर्यावरण के प्रति जागरूक हो जाएंगे तो उसका असर ज्यादा गहरा होगा।”

निधि शर्मा ने सीआरआई को बताया कि उनके पेरेंटिंग ग्रुप (अभिभावक समूह) की तरफ से हर साल यूथ इन्वाइरन्मेंट समिट का आयोजन किया जाता है, जहां स्कूली बच्चे, अध्यापक, अभिभावक आमंत्रित होते हैं और पर्यावरण संरक्षण पर बातचीत की जाती है। उनका यह भी कहना है कि इस तरह के समिट में अध्यापकों, अभिभावकों, स्कूलों, संस्थाएं आदि का योगदान होता है।

बकौल निधि शर्मा इस साल 2 नवम्बर को चौथा यूथ इन्वाइरन्मेंट समिट होने जा रहा है, जो बाकि 3 बार की तुलना में थोड़ा अलग है। इस बार शांगहाई के कई इंटरनेशनल स्कूल भी इस समिट से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समिट में छात्र अपने पर्यावरण संबंधी प्रोजेक्ट पर बातचीत करेंगे, छात्रों और विशेषज्ञों के बीच एक पैनल चर्चा होगी, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता होगी और छोटे बच्चों का एक फैशन शो भी होगा।

अपनी मुहिम के बीच आनी वाली चुनौतियों पर बात करते हुए निधि शर्मा ने कहा, “चुनौतियां आती तो जरूर हैं, लेकिन उन चुनौतियां का सामना किया जाए तो वही अवसर बन जाती हैं।” उन्होंने बताया कि उन्हें पूंजी और भाषा की चुनौतियों से जुझना पड़ता है, लेकिन सभी की मदद और योगदान से काफी हद तक चुनौतियां से पार पा लेती हैं।

निधि शर्मा से पूरी बातचीत का ओडियो सुनने के लिए यहां क्लिक कीजिए

(अखिल पाराशर)

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