अली ख़ान – रामलीला से फ़िल्मों तक

2019-10-15 16:18:58
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हम अपनी थकान मिटाने और मनोरंजन करने के लिये सिनेमा हॉल में जाकर फिल्में देखते हैं, दर्शक फ़िल्मों का आनंद उठाते हैं, और अपने पसंदीदा कलाकार की फ़िल्में दुबारा भी देखते हैं, लेकिन अधिकतर सिनेमाप्रेमी हीरो, हिरोइन, विलेन और हास्य कलाकार के बारे में ही जानते हैं लेकिन फिल्मों में जो कलाकार अपेक्षाकृत छोटी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी होती है, लेकिन ये कलाकार भी पाए के कलाकार होते हैं, इनमें भी गज़ब का हुनर होता है और लोगों तक अपने हुनर को सिनेमा के ज़रिये पहुंचाने की इच्छा होती है। ऐसे ही एक नामचीन कलाकार हैं अली खान, अली खान बिहार के गया शहर के पास बसे छोटे से गाँव मैगरा चुनहा के रहने वाले हैं जो बचपन से गाँव की रामलीला में राम और रावण बनते थे, और वहीं से इन्हें फ़िल्मों में हीरो बनने का शौक पैदा हुआ। हालांकि अली ख़ान ने फ़िल्मों में आने से पहले अपनी पढ़ाई को पूरी तवज्जो दी और मगध यूनिवर्सिटी से बीएससी और फिर एलएलबी किया, इसी दौर में वर्ष 1980 में एक फिल्म में अली खान को काम करने का मौका मिला था, जिसके लिये वो मुंबई और तब के बॉम्बे गए थे, लेकिन किन्हीं कारणों से बात बनी नहीं फिर अली वापस गया लौट गए जहां पर अपनी पढ़ाई में वो फिर से जुट गए।

अगले चार साल अली खान गया में ही रहे, दोबारा बॉम्बे जाने का मौका मिला वर्ष 1984 में, इस बार मुंबई में अली खान का इंतज़ार एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फ़िल्म कर रही थी जिसका नाम था “सोमाली दरवेश” इस फिल्म में 15 देशों के कलाकार काम कर रहे थे, जिसकी शूटिंग सोमालिया में हुई, इस फिल्म में अली ख़ान को इतालवी राजदूत का रोल निभाने में मदद मिली।

साक्षात्कार के दौरान अली ख़ान वर्ष 1975 की एक बात बताते समय कहते हैं कि उस समय वो मुंबई, तब के बॉम्बे आए थे बड़े बहनोई के पिता जी उमरा कर के लौट रहे थे उन्हें लेने आए थे तो मुंबई में आर के स्टूडियो में अमिताभ बच्चन और खलनायक रंजीत से मुलाकात हुई और बाद में उन्हीं के साथ काम करने का मौका मिला। इसे अली ख़ान अपना नसीब मानते हैं कि एक ज़माने में अमिताभ बच्चन से वो ऑटोग्राफ़ लेने आए थे और आज वो उनके साथ फ़िल्मों में काम कर रहे हैं। अली ख़ान ने रहमदिल जल्लाद फ़िल्म में मज़हर खान के साथ काम किया जिसमें ये विलेन थे, बाद में शत्रुघ्न सिन्हा के साथ कालका फिल्म में काम किया, अल्लाहरक्खा, तूफ़ान, और इसके बाद फ़िल्में मिलने का सिलसिला चल निकाल। अली ख़ान को पहला बड़ा ब्रेक मिला फ़िल्म खुदा गवाह से जिसके बाद सरफ़रोश, कोहराम, मां तुझे सलाम, इंडियन, अली बाबा चालीस चोर समेत कई फिल्मों में काम मिलता चला गया। अब तक अली ख़ान ने करीब सौ सवा सौ फ़िल्मों में खलनायकी की है। इसके साथ ही अली ख़ान ने टेलीविज़न धारावाहिकों में भी काम किया है जिसमें द ग्रेट मराठा, टीपू सुल्तान में हैदर का रोल किया, महाभारत में यक्ष की भूमिका निभाई इसके साथ करीब सत्तर-अस्सी धारावाहिकों में काम किया, रामलीला भी की जिसमें दिल्ली की रामलीला में तीन साल तक काम किया यहां पर बखूबी रावण और कुम्भकरण का किरदार निभाया।

जिस तरह प्रतिभा किसी एक जगह बंध कर नहीं रहती उसी तरह अली ख़ान भी सिर्फ़ हिन्दी फिल्मों तक ही बंध कर नहीं रहे इन्होंने भोजपुरी, गुजराती, कन्नड़, तमिल, तेलुगु समेत कई प्रांतीय भाषा की फ़िल्मों में भी काम किया। इतना काम करने के बाद भी अली ख़ान खुद को मिली कामयाबी का सारा श्रेय ईश्वर को देते हैं। पाँच वक्त के नमाज़ी अली खान से बात करके महसूस हुआ कि निहायत की सरल स्वभाव के व्यक्ति जिसमें ज़रा सा भी घमंड या अहंकार नहीं है। शायद उनकी कामयाबी का एक राज़ ये भी है कि वो बहुत विनम्र स्वभाव के हैं।

अक्सर रज़ा मुराद के साथ फिल्मों में नज़र आने वाले अली खान का ये कहना है कि वर्ष 1984 में जब वो दुबारा मुंबई आए तब रज़ा मुराद से इनकी मुलाकात हुई, रज़ा मुराद, के साथ कई फ़िल्मों में काम किया और रज़ा मुराद ने अली को कई फिल्में भी दिलवाईं, तभी से दोनों के बीच बड़े और छोटे भाई का रिश्ता बना हुआ है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अली ख़ान ने बताया कि संघर्ष के शुरुआती दौर में जब उन्हें काम नहीं मिल रहा था और वो ईद के समय मुंबई छोड़कर वापस अपने घर लौटने का मन बना चुके थे तब इनके एक दोस्त ने एक शेर में अपनी बात कहकर इनका इतना हौसला बढ़ाया कि अली ने ठान लिया कि अब तो मुंबई में ही अपना भविष्य बनाना है। वो शेर कुछ इस तरह है - “अली ख़ान उलझे रहो इस कदर परेशानियों में तुम, कि तमाम परेशानियां खुद परेशान हो जाएं”।

बदलते समय के साथ नए निर्देशकों के साथ काम करने के अनुभव के बारे में अली ख़ान बताते हैं कि काम करने का तरीका बदल गया है, और बदलते समय के साथ खुद को बदलना चाहिए, जिससे काम करने में भी सहूलियत हो।

पहले के दौर मुकाबले आज फ़िल्मों, टीवी सीरियल, वेब सीरीज़ में बड़ी संख्या में कलाकारों को काम मिलने लगा है, अली बताते हैं कि पहले का दौर अच्छा था लेकिन आज कलाकारों के पास काम की कमी नहीं है, और ये दौर कलाकारों और कला के लिहाज से ज्यादा अच्छा है। फिल्मों में आने वाले समय के बारे में अली ख़ान का कहना है कि आने वाला समय और भी बेहतर होगा क्योंकि बेहतर तकनीक आ रही है, इस समय लोग सिनेमा के बारे में इंस्टीट्यूट्स में सीखकर आ रहे हैं, उनके पास कहानी को कहने का नया तरीका है और निश्चित रूप से इसका फायदा फिल्म जगत को मिलेगा।

पंकज श्रीवास्तव

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