भारतीय नागरिक:भारत-चीन संबंध के स्वस्थ स्थिर विकास की प्रतीक्षा

2019-10-13 13:20:32
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चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच महामुलाकात 12 अक्तूबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। भारतीय समाज ने इस महामुलाकात पर बड़ा ध्यान दिया और उच्च मूल्यांकन किया। भारतीय नागरिकों को आशा है कि दोनों देशों के संबंध का स्वस्थ और स्थिर विकास साकार हो सकेगा।

भारतीय“न्यूज़ मोबाइल”वैबसाइट के संस्थापक और मुख्य संपादक सौरभ शुक्ला के लिए इधर के दिन बहुत व्यस्त भरे हैं। दोनों नेताओं के बीच महामुलाकात के पूर्व “न्यूज़ मोबाइल”ने कुछ दिन कई रिपोर्टें पेश कीं और बड़ी संख्या में न्यू मीडिया वाले उत्पाद बनाये। शुक्ला के विचार में इस प्रकार की व्यस्तता से मौजूदा महामुलाकात के प्रति भारतीय मीडिया का उच्च ध्यान जाहिर हुआ। उन्होंने कहा:“मेरा विचार है कि भारत-चीन संबंध बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि मौजूदा महामुलाकात मील के पत्थर वाला अर्थ मौजूद है। हमने देखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के स्वागत के लिए लाल कालिन बिछाया। हम जानते हैं कि भारत में केवल महत्वपूर्ण दोस्त के लिए लाल कालिन बिछाया जाता है। जाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को अपना पुराना दोस्त मानते हैं। मुझे आशा है कि मौजूदा मुलाकात से दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और विश्वास मजबूत होगा और द्विपक्षीय संबंध के विकास का नया अध्याय जोड़ा जाएगा। मेरा विचार है कि मौजूदा महामुलाकात से अच्छी रासायनिक प्रतिक्रिया पैदा होगी।”

पांडिचेरी में भारत-चीन मैत्री संघ के संस्थापक और महासचिव डॉक्टर दास बिकासकली ने भारतीय मीडिया पर मौजूदा महामुलाकात के सभी सीधा प्रसारण देखा। वे बेहद उत्साहित हैं और गर्व भी महसूस होता है। उन्होंने कहा:“मैंने देखा कि दोनों देशों के नेता मुलाकात के दौरान हमेशा मुस्करा रहे थें। यह दोनों नेताओं के हाथ मिलाकर भारत-चीन संबंध को आगे बढ़ाने का सक्रिय संकेत है। हमें पक्का विश्वास है कि दोनों नेता अच्छी तरह यह कर सकेंगे। गत वर्ष वूहान में हुई महामुलाकात के बाद चीनी और भारतीय सरकारी संस्थाओं के बीच आदान-प्रदान और सहयोग ज्यादा तौर पर बढ़े हैं। मुझे आशा है कि मौजूदा मुलाकात के बाद दोनों देशों के गैर-सरकारी संगठनों के बीच आदान-प्रदान और सहयोग में पर्याप्त विकास प्राप्त हो सकेगा। क्योंकि गैर-सरकारी संगठन भारत-चीन संबंध के भावी विकास के दौरान बहुत बड़ी भूमिका निभा सकेंगे।”

देशों के बीच आदान-प्रदान जनता के बीच घनिष्ठता पर आधारित है, जनता के बीच घनिष्ठता लोगों के मन में संपर्क पर आधारित है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के चीन और दक्षिण पूर्व एशिया अनुसंधान केंद्र के प्रोफेसर प्रियदर्शी मुखर्जी ने कहा कि वे चीनी संस्कृति को बहुत पसंद करते हैं। बहुत पहले से ही उन्होंने चीनी भाषा सीखना शुरु किया। साल 2014 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी से राष्ट्रपति शी के साथ बातचीत की। इसे याद करते हुए प्रियदर्शी मुखर्जी ने कहा:“साल 2014 में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में लगातार दो दिनों में मैं दो बार राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लियुआन से मिला। दूसरे दिन राष्ट्रपति शी ने मुझसे कहा कि कल मैंने आपको देखा था, आपकी चीनी भाषा बहुत अच्छी है। वे मुझे याद है। यह बहुत जादुई बात है।”

चीन के आर्थिक विकास से चीन और भारत के बीच आर्थिक व्यापारिक आवाजाही को आगे बढ़ाया जाता है। लम्बे समय से चीन लगातार भारत के पहला बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है, जबकि भारत दक्षिण एशिया में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारतीय निर्यात संगठन संघ (एफ़आईईओ) के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर अजय सहाय ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के संवाददाता को दिए एक इन्टरव्यू में आशा जतायी कि मौजूदा महामुलाकात से ज्यादा से ज्यादा चीनी निगम निवेश और सहयोग के लिए भारत आएँगे, इसके साथ ही दोनों देशों के विभिन्न जगतों के बीच आदान-प्रदान और आवाजाही मजबूत होंगी। उन्होंने कहा:“भारत और चीन के बीच संबंध मित्रवत है। यह मैत्रिपूर्ण संबंध न केवल आर्थिक क्षेत्र में सीमित नहीं है। हमारे बीच गहरा सांस्कृतिक संबंध कायम है। आजकल ज्यादा से ज्यादा भारतीय पर्यटक चीन दौरे पर जाते हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक चीनी दोस्त निवेश और पर्यटन के लिए भारत आते हैं। हमारी संस्था चीन पर बहुत विश्वास करती है। हम चीन के क्वांगचो आयात निर्यात एक्सपो, खुनमिंग आयात निर्यात एक्सपो, शांगहाई में अंतरराष्ट्रीय आयात एक्सपो और छंगतु एक्सपो आदि एक्सपो में भाग लेते हैं। भारतीय निर्यात व्यापारियों के लिए चीन एक बहुत बड़ा बाज़ार है।”

चीन और भारत के सहयोग की चर्चा में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने दूरगामी रणनीतिक दृष्टि से विश्लेषण करते हुए कहा कि भारत और चीन के प्रतिनिधित्व वाले नवोदित बाज़ार देशों का जोरदार विकास हो रहा है। वर्तमान दुनिया में बहुपक्षवादी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती मौजूद है। ऐसी पृष्ठभूमि में भारत और चीन को विकास का ज्यादा मौका मिलेगा और सहयोग का दायरा और बड़ा होगा। प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने कहा:“बहुपक्षवाद की पुनर्व्याख्या और पुनर्गठन की पृष्ठभूमि में नवोदित आर्थिक समुदाय और देश बहुपक्षीय सहयोग व्यवस्था के नेतृत्व में भारी भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें भारत और चीन सबसे महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में दोनों देशों के बीच किस तरह से परस्पर सहयोग किया जाएगा, नीतियों को कैसे समन्वय किया जाएगा, इससे वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को फिर से परिभाषित करने पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।”

(श्याओ थांग)


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