ब्रिक्स व्यवस्था से भारत की बुनियादी सुविधा के निर्माण में प्रेरक शक्ति मिली

2019-06-28 16:40:32
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2019 ब्रिक्स थिंक-टैंक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 26 जून को पेइचिंग में आयोजित हुई, जिसकी थीम है“वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद”। पांच ब्रिक्स देशों के थिंक-टैंक विद्वानों ने“एकतरफावाद उभरने के रूझान में ब्रिक्स देश कैसे बहुपक्षवाद की रक्षा करेंगे”,“वैश्विक विकास और शासन में ब्रिक्स देशों का उत्तरदायित्व और भूमिका”,“विश्व आर्थिक व्यापारिक व्यवस्था के नियमों के पुनर्निर्माण में ब्रिक्स देश कैसे मार्गदर्शन करेंगे”और“नई औद्योगिक क्रांति की पृष्ठभूमि में वैश्विक शासन में ब्रिक्स देशों की भूमिका”चार पहलुओं में गहन रूप से विचारों का आदान-प्रदान किया।

संगोष्ठी में उपस्थित इंडियन ऑब्जर्वर फाउंडेशन के शोधकर्ता एचएचएस विश्वनाथन और उप शोधकर्ता रितिका पासी ने सीआरआई से बात की। विश्वनाथन ने कहा कि गत दस सालों में चीन-भारत आर्थिक व व्यापारिक संबंध घनिष्ठ हो रहे हैं। चीन भारत का सबसे बड़ा साझेदार बन गया है। ब्रिक्स व्यवस्था से ब्रिक्स देशों को आदान-प्रदान और संपर्क का उचित मंच दिया गया है। वर्तमान वैश्वीकरण की स्थिति में ब्रिक्स देशों को अपनी-अपनी श्रेष्ठता को उजागर करते हुए ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आदि संस्थाओं की भूमिका अच्छी तरह से अदा करना चाहिए, ताकि समान विकास प्राप्त हो सके।

रितिका पासी ने कहा कि चीन भारत का सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। गत बीस सालों में भारत और चीन ने बड़ा विकास प्राप्त किया। लेकिन भारत की बुनियादी सुविधा कमजोर है। ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना से भारत के विकास के लिए अनुकूल मौका तैयार किया गया है और भारत के दीर्घकालिक विकास में प्रेरक शक्ति डाली गयी है।

मीनू

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