(इंटरव्यू) जानिए किस तरह काम करता है वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग

2019-06-13 14:10:19
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दो संस्थान, वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग और केंद्रीय हिंदी निदेशालय किस तरह से काम करते हैं। इन संस्थानों के गठन का क्या उद्देश्य था, ये संस्थान किस रूप में तकनीकी शब्दों का संग्रह करते हैं आदि सवाल अकसर मन में उठते हैं। इन्हीं सब सवालों के जवाब जानने के लिए सीआरआई ने बात की वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष अवनीश कुमार के साथ।


अवनीश कुमार कहते हैं कि, वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग का मुख्य कार्य 8वीं अनुसूची में आने वाली विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ-साथ ज्ञान-विज्ञान के तकनीकी विषयों को लेकर मानक शब्दावली का निर्माण करना है। ज्ञान-विज्ञान के विषयों में सभी प्रकार के विषयों को समाहित किया गया है। जिसमें विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, आयुर्विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान आदि में प्रमुख रूप से मानक शब्द तैयार करने का काम होता है। इसके साथ ही आयोग भारत सरकार की विभिन्न संस्थाओं के लिए विभागीय शब्दावली का भी मानकीकरण करता है। और सभी विभागों को मानक शब्दावली उपलब्ध कराता है। ये शब्दावली न केवल हिंदी में बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध रहती है।

इसके साथ ही शिक्षकों, छात्रों के लिए परिभाषा कोषों का निर्माण भी आयोग द्वारा किया जाता है। वहीं विश्वविद्यालय स्तरीय पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्य पुस्तकें भी तैयार करवायी जाती हैं।

(इंटरव्यू) जानिए किस तरह काम करता है वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग

(इंटरव्यू) जानिए किस तरह काम करता है वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग

बकौल अवनीश आयोग का मुख्य उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों आदि सभी को अपनी भाषा में ज्ञान, विज्ञान की जानकारी मुहैया कराना है।

आम लोगों तक तकनीकी शब्द पहुंचें इसके लिए सरकार क्या कर रही है। इसके जवाब में अवनीश ने बताया कि इस दिशा में सबसे बड़ा प्रयास यह है कि हमारे सभी संग्रहों को प्रकाशन वेबसाइटों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का काम किया गया है। इसमें हर तरह की पाठ्य पुस्तकें, शब्द कोश या परिभाषा कोश वेबसाइट पर मौजूद रहते हैं।

यहां बता दें कि शब्दावली आयोग की स्थापना 1961 में की गयी थी। तब से आज तक लगातार तकनीकी शब्दों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य चल रहा है। वर्तमान में आयोग के पास लगभग दस लाख शब्दों का संग्रह मौजूद है। दस लाख अंग्रेजी शब्दों के हिंदी व अन्य भाषाओं में पर्याय निर्धारित किए गए हैं। जहां तक तकनीकी शब्दों को पढ़ने में लिखने में आने वाली दिक्कत की बात है तो ये शब्द अपने आप में विशेष होते हैं, जो कि किसी विषय से संबंधित होते हैं। इसलिए आम लोगों को शायद ये मुश्किल लगते हैं।


इसके साथ ही केंद्रीय हिंदी निदेशालय का नेतृत्व कर रहे अवनीश कहते हैं कि 1960 में इस निदेशालय की स्थापना की गयी थी। निदेशालय का मुख्य कार्य, देवनागिरी लिपि के मानकीकरण के अलावा हिंदी, अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं में मानक कोश बनाने का है। निदेशालय हिंदी से हिंदी में कोश तैयार करता है। वहीं हिंदी से सभी 22 भारतीय भाषाओं में कोश का निर्माण किया जाता है। जबकि उक्त 22 भाषाओं से हिंदी में भी कोश बनाए जाते हैं।


अनिल आज़ाद पांडेय



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