काराकोरम राजमार्ग के निर्माण में जान का बलिदान दिए चीनी निर्माताओं की स्मृति

2019-04-06 16:06:21
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उत्तरी पाकिस्तान के गिलगित शहर के पूर्वी उप नगर में एक चीनी शहीदों का कब्रिस्तान है, जहां काराकोरम राजमार्ग के निर्माण के दौरान जान का बलिदान देने वाले 88 चीनी निर्माता हमेशा से बसते हैं। पाकिस्तान स्थित चीनी राजदूत, चीनी पूंजी वाले उद्यमों, मीडिया संस्थाओं, पाकिस्तान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों और गिलगित शहर के विभिन्न स्तरीय सरकारी अधिकारियों तथा कब्रिस्तान में पाक स्वयं सेवकों ने 5 अप्रैल को शहीदों की स्मृति में भव्य रस्म आयोजित की।

गिलगित शहर के उप मेयर समीउल्लाह फारूक ने कहा कि हम काराकोरम राजमार्ग के निर्माण में जान का बलिदान देने वाले चीनी शहीदों को याद करने के लिए आए हैं और उन्हें सर्वोत्तम समादर और संवेदना व्यक्त करते हैं। यह कब्रिस्तान एक ऐतिहासिक अर्थ वाला स्थल है, जो पाकिस्तान और चीन के बीच सच्ची दोस्ती का सबूत है। भविष्य में इस प्रकार की दोस्ती को और ज्यादा मजबूत किया जाना चाहिए। मुझे आशा है कि पाकिस्तान और चीन के बीच दोस्ती ज्यादा से ज्यादा गहरी होगी, ताकि दोनों देशों को लाभ मिल सके।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1966 में चीन और पाकिस्तान के बीच थलीय रास्ता खोलने, उत्तरी पाकिस्तान में आर्थिक लाइन खोलने के लिए दोनों देशों ने काराकोरम राजमार्ग का निर्माण शुरु किया। तत्कालीन संधि में निर्धारित किया गया कि दोनों देश अपने-अपने भीतर के मार्ग का निर्माण करेगा। लेकिन पाकिस्तान में निर्माण कार्य बहुत कठिन होने की वजह से उसे खुद समाप्त करने में सक्षम नहीं था, इस तरह 1968 में चीन सरकार ने पाकिस्तान में राजमार्ग के निर्माण की सहायता के लिए निर्माताओं को भेजा। 1978 में काराकोरम राजमार्ग का निर्माण पूरा हुआ, जिसकी लंबाई 1224 किलोमीटर है, जो हिमालय, काराकोरम और हिंदू कुश तीन पर्वतों और पामीर पठार से गुज़रता है। जटिल भूवैज्ञानिक स्थितियों की वजह से इस परियोजना का निर्माण बहुत कठिन था, चीन और पाकिस्तान के 700 से अधिक निर्माता अपनी जान का बलिदान दिया।

1978 में काराकोरम राजमार्ग का निर्माण पूरा होने के समय पाकिस्तान सरकार ने बलिदान देने वाले चीनी निर्माताओं के लिए शहीद कब्रिस्तान का निर्माण किया, जहां 88 चीनी शहीद दफ़नाए गए हैं।

(श्याओ थांग)

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