कृष्ण भट्ट – अभिनय जिनकी रगों में बहता है

2019-04-01 20:45:28
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कुछ वर्षों पहले सब टीवी पर एक मशहूर धारावाहिक लापतागंज दिखाया जाता था जिसमें एक ऐसे कलाकार ने काम किया था जो अपनी हास्य कला से दर्शकों को हंसा हंसाकर लोटपोट कर देता था जिसका नाम है कृष्ण भट्ट इस सीरियल में इन्होंने “एलिजा” टेलर की भूमिका निभाई थी, साथ ही इनके बोलने का ख़ास अंदाज़ और भाव भंगिमा लोगों को बहुत पसंद आई। मशहूर व्यंग्यकार शरद जोशी की कहानी पर बने इस टीवी धारावाहिक ने भारत के मध्यम स्तरीय छोटे शहर में आम जिंदगी की कहानी दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि आजकल आप लापतागंज धारावाहिक को यूट्यूब पर देख सकते हैं।


हिन्दी फिल्मों में निभाई छोटी लेकिन दमदार भूमिका -

कृष्ण भट्ट ने करीब तीस से पैंतीस हिन्दी फिल्मों में भी काम किया है जिनमें अमिताभ बच्चन और तब्बू की फिल्म चीनी कम है जिसमें कृष्ण ने एक रसोईंये की भूमिका निभाई है, इसके साथ कमल हासन की फिल्म अभय, विशेष फिल्म बैनर के तहत बनी फ़िल्म दुश्मन और संघर्ष में भी अपनी दमदार भूमिका निभाई है। हममें से बहुतों को ऐसा लगता है कि कृष्णा भट्ट उत्तराखंड के रहने वाले हैं लेकिन असल में इनका घर भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक के मैंगलूरु शहर में है जहां से हिन्दी फिल्म कलाकार ऐश्वर्या राय, सुनील शेट्टी और शिल्पा शेट्टी भी हैं, यहां इन्होंने अपने स्कूल के दिनों से ही अभिनय जीवन की शुरुआत स्टेज से की। स्टेज पर नाम कमाने के बाद इन्होंने दिल्ली का रुख किया और यहां पर इन्होंने राष्ट्रीय नाट्य मंच में दाखिला लिया।

बचपन से था अभिनय का शौक -

ग्रैजुएशन के दिनों में अभियोक्ता नाम से एक थियेटर समूह से जुड़े, ग्रैजुएशन खत्म करने के बाद कृष्णा को लगा कि आगे की जिंदगी थियेटर में ही बिताई जाए, जिसके लिये इन्हें इनके पिता से अनुमति भी मिली और इन्होंने प्रसिद्ध थियेटर नीनासम ( नीलकंठेश्वर नाट्य सेवा संघ ) ज्वाइन कर लिया, यहां एक वर्ष का कोर्स करने के बाद एक साल रेपेटरी में भी काम किया। नीलासम में कृष्ण की मुलाकात दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य मंच से प्रशिक्षित चितंबर राव जम्बे से हुई, जिन्होंने इन्हें एनएसडी जाने की सलाह दी नीलासम में एक वर्ष का कोर्स करने के बाद कृष्ण का दिल्ली का सफ़र शुरु हुआ और ये दिल्ली आए, इनका दाखिला एनएसडी में आसानी से हो गया जहां पर कृष्ण ने तीन वर्ष का कोर्स किया और चार वर्ष तक वो यहां विज़िटिंग फैकेलटी में रहे, दिल्ली रहते हुए ही कृष्ण ने मालदीव, डेनमार्क समेत कई देशों में नाटक के शो किये।


मुंबई का संघर्ष -

एक दिन अचानक किसी दोस्त के ये कहने पर कि असल संघर्ष मुंबई में होता है कृष्ण ने इस चुनौती को स्वीकार किया और मुंबई आ गए। यहां पर वो पहले पंद्रह दिनों तक अपने मित्र, एनएसडी के बैचमेट और मशहूर एक्टर कुमुद मिश्रा के घर पर रहे। बाद में कृष्ण अलग कमरा लेकर रहने लगे, अगले ढाई महीनों तक कोई काम नहीं मिला, एनएसडी से पास आउट होने के बाद आत्मविश्वास से भरे कृष्ण हर जगह ऑडिशन्स होते रहे, लेकिन राह आसान नहीं थी। लेकिन शुरुआत हुई और वो टीवी धारावाहिक माधुरी दीक्षित, कभी इधर कभी उधर और मुंगेरी के भाई नवरंगी लाल जैसे मशहूर सीरियलों से। कृष्ण के दोस्त गिरीश धमेजा जो कि महेश भट्ट की विशेष फिल्म्स के लिये स्क्रिप्ट लिखने का काम करते थे, उनकी जान पहचान से भट्ट कैम्प में कृष्ण का आगमन हुआ जिसके बाद इन्हें दुश्मन फिल्म में छोटा सा रोल मिला, फिर संघर्ष फिल्म में महेश भट्ट ने काम दिया और उसके बाद पिछले काम के आधार और अच्छे व्यवहार के चलते कृष्ण भट्ट को काम मिलता चला गया।


उतार चढ़ाव जीवन का हिस्सा -

काम के दौरान उतार चढ़ाव हर एक के जीवन में आते रहते हैं लेकिन इससे मन में कुंठा को नहीं पनपने देना चाहिए, ये मूलमंत्र लेकर कृष्ण भट्ट मुंबई आए थे और ये कम लेकिन गुणवत्ता वाला काम करना पसंद करते हैं। नियति में यकीन रखने वाले कृष्ण भट्ट मानते हैं कि “जितना काम मेरे हिस्से में लिखा है वो सिर्फ़ मुझे ही मिलेगा”, इसलिये काम को लेकर कृष्ण बहुत संतुष्ट रहते हैं साथ ही अपने काम को शत प्रतिशत देने में विश्वास रखते हैं।

(पंकज श्रीवास्तव)


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