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भारत और चीन को फिल्मी आदान-प्रदान में सहयोग करना चाहिए- किशोर जावड़े

2019-01-23 16:58:33
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भारत और चीन को फिल्मी आदान-प्रदान में सहयोग करना चाहिए- किशोर जावड़े

भारत और चीन को फिल्मी आदान-प्रदान में सहयोग करना चाहिए- किशोर जावड़े

इधर के सालों में चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आवाजाही बढ़ रही है। इंडिया-चाइना फिल्म सोसाइटी के अध्यक्ष किशोर जावड़े ने हाल में मुम्बई में चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ संवाददाता को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि चीन-भारत सांस्कृतिक आवाजाही के सबसे अहम माध्यम की हैसियत से वे आशा करते हैं कि भविष्य में दोनों देशों की अधिक से अधिक फिल्में एक-दूसरे बाजार में प्रवेश कर सकेंगी। भारत और चीन की फिल्मों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। दोनों को द्विपक्षीय आवाजाही में एक दूसरे से सीखना चाहिए।

किशोर जावड़े ने जयपुर में चीनी अंतरारष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजन में भाग लिया और भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर चीन में आयोजित चिनचि पाईहुआ यानी गोल्डन मुर्गा और सौ फूल फिल्म महोत्सव में हिस्सा लिया। लम्बे समय तक वे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं और दोनों देशों के फिल्म उद्योग की वर्तमान स्थिति से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन सभ्यता वाले देश होने के नाते भारत और चीन का इतिहास बहुत पुराना है। दोनों देशों की फिल्में भी अपनी-अपनी विशेषता और शैली हैं।

जावडे ने कहा कि दैनिक जीवन में भारतीय लोग परम्परागत पारिवारिक विचारधारा को बड़ा महत्व देते हैं, इसलिए दर्शक बॉलीवुड फिल्मों में संबंधित कई तत्व देख सकते हैं। जबकि चीनी फिल्मों में कुंफू एक विशेषता है। अनेक चीनी फिल्मी सितारों के भारत में भी बहुत फैन हैं। दोनों देशों की फिल्मों की भिन्नताओं को मद्देनजर दोनों सहयोग कर सकते हैं। फिल्मी आदान-प्रदान में भारी निहित शक्ति मौजूद ही नहीं, उसका भविष्य भी सुनहरा होगा

भारत और चीन को फिल्मी आदान-प्रदान में सहयोग करना चाहिए- किशोर जावड़े

किशोर जावड़े 2018 "बेेल्ट एंड रोड"अंतरराष्ट्रीय फिल्म आदान प्रदान प्रदर्शनी में भाग लेते हुए

गत शताब्दी के 80 के दशकों में जावड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। वे कभी कभार अपने सहपाठियों के साथ हांगकांग कुंफू वाली फिल्में देखने सिनेमा घर जाते थे। उन्होंने कहा कि आज भी वे जैकी चेन के दिवाने हैं।

चीन और भारत के बीच फिल्मी आदान-प्रदान को विस्तार करने, एक दूसरे से सीखने की चर्चा करते हुए जावड़े ने कहा कि दोनों देशों की फिल्मों की अलग विशेषता और शैली हैं। भारतीय बाज़ार में चीनी फिल्म के प्रवेश को संगीत और भावनाओं से संबंधित तत्व शामिल किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही बॉलीवुड फिल्मों को चीनी कुंफू फिल्मों की श्रेष्ठता से सीखना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, गत शताव्दी के शुरु में हांगकांग फिल्म भारतीय बाजार में प्रवेश किया था और कुछ समय तक भारत में विदेशी फिल्मों का 10 प्रतिशत भाग बनता था। लेकिन चीन के भीतरी इलाके में कई फिल्में फिल्म महोत्सव की प्रदर्शनी के माध्यम से भारत पहुंची हैं। 20वीं सदी के 70 और 80 के दशकों में कारवां और आवारा जैसी फिल्में चीन में बहुत लोकप्रिय थीं। इसके बाद कई सालों तक चीन में भारतीय फिल्म कम दिखाई गई। लेकिन हाल के वर्षों में भारतीय फिल्मों के चीन में प्रवेश की नई लहर उभरी।

भारत और चीन को फिल्मी आदान-प्रदान में सहयोग करना चाहिए- किशोर जावड़े

किशोर जावड़ेचीन में आयोजित 27वें चिनचि पाईहुआ फिल्म महोत्सव में भाग लेते हुए

इंडिया-चाइना फिल्म सोसाइटी के अध्यक्ष किशोर जावड़े के विचार में विश्व में बड़े फिल्म बाज़ार और बड़ी संख्या में फिल्म दर्शक होने के नाते, भारत और चीन के बीच फिल्मी सांस्कृतिक आदान प्रदान में बड़ी निहित शक्ति मौजूद है और इसका भविष्य भी बहुत उज्ज्वल होगा।

गत वर्ष के अंत में चीन-भारत उच्च स्तरीय सांस्कृतिक आदान प्रदान प्रणाली का पहला सम्मेलन आयोजित हुआ। दोनों पक्षों ने संस्कृति, मीडिया, फिल्म और टीवी जैसे क्षेत्रों में व्यापक आम सहमतियां प्राप्त कीं। इसके प्रति जावड़े बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने आशा जतायी कि भविष्य में और ज्यादा भारतीय फिल्में चीनी दर्शकों के सामने आ सकेंगी। भारत भी और अधिक चीनी फिल्मों को अपने यहां लाना चाहता है। यह दोनों देशों की जनता के बीच आपसी समझ को बढ़ावा दे सकेगा।

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