चीन को हर तरह का चावल निर्यात करने में सक्षम है इंडिया - इंटरव्यू

2018-11-02 09:56:09
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चीन को हर तरह का चावल निर्यात करने में सक्षम है इंडिया - इंटरव्यू

चीन को हर तरह का चावल निर्यात करने में सक्षम है इंडिया - इंटरव्यू

भारत और चीन ने द्विपक्षीय व्यापार को सौ अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में चावल, सोयाबीन, चीनी और अन्य नए उत्पाद अहम भूमिका निभा सकते हैं। पिछले दिनों चीनी आयातकों के साथ चर्चा के लिए चीन पहुंचे भारतीय निर्यातक दल के प्रमुख और एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडेक्ट्स एक्सपोर्ट डिवेलपमेंट अथॉरिटी(एपीडा) के निदेशक ए.के.गुप्ता ने सीआरआई संवाददाता अनिल आजाद पांडेय के साथ खास बातचीत की।

ए.के.गुप्ता कहते हैं कि हमारे संस्थान का प्रमुख उद्देश्य भारतीय कृषि उत्पादों का भारत से निर्यात करवाना है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चीन और भारत दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होने के साथ-साथ कृषि प्रधान देश भी हैं। ऐसे में हम एक-दूसरे को बहुत से उत्पाद निर्यात कर सकते हैं, क्योंकि हमारे बाजार बहुत बड़े हैं। ऐसे में सहयोग की व्यापक संभावना नजर आती है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच जून महीने में हुई वार्ता के बाद चावल के आयात के संबंध में समझौता संपन्न हुआ। इसी सिलसिले भारत के छह चावल निर्यातकों के साथ चीन पहुंचे हैं। इस दौरान बीजिंग और शंघाई में चीनी खरीददारों और आयातकों के साथ बैठकें होनी हैं, जिसमें भारतीय चावल की गुणवत्ता, कीमत और गैर बासमती या बासमती चावल के विभिन्न प्रकारों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। वे उम्मीद हैं कि चीन के साथ इस बाबत जल्द ही चावल की आपूर्ति को लेकर समझौते होंगे।

ए.के.गुप्ता कहते हैं कि चीन एक बड़ा बाजार है, हमें उम्मीद है कि हम चीन के साथ अच्छा सहयोग कर सकते हैं। हम पिछले 7 सालों से विश्व में चावल के सबसे बड़े निर्यातक देश हैं। हमारे यहां लगभग एक हजार किस्म का चावल पैदा होता है। जिसमें से कुछ बहुत मशहूर हैं, और करीब 130 देशों को चावल निर्यात करते हैं। चाहे गुणवत्ता के लिहाज से बात करें या फिर कीमत के लिहाज से, हम चीन के लिए बहुत बड़ी रेंज उपलब्ध करा सकते हैं। चीन में चावल का उपयोग इंडस्ट्री में भी होता है, चावल से दूसरे खाद्य पदार्थ भी बनाए जाते हैं। उसमें अकसर टूटा हुआ चावल इस्तेमाल होता है। भारत बहुत बड़ी मात्रा में टूटा हुआ चावल भी मुहैया करा सकता है। इसके साथ ही हम बहुत तरह के खुशबूदार चावल भी उपलब्ध करा सकते हैं, जिसमें बासमती के अलावा गैर बासमती भी शामिल है। विभिन्न तरह के चावल का अपना स्वाद और खुशबू होती है। ऐसे में चीन में रहने वाले भारतीय भी भारत से अपनी पसंद का चावल यहां मंगवा सकते हैं। और इस तरह वे अपने यहां के चावल का स्वाद विदेश में भी ले सकते हैं।

  बासमती की दुनिया भर में पहचान बनी है। हिंदुस्तान में उसे सेंटिड पर्ल यानी खुशबूदार मोती के नाम से भी पुकारते हैं। बासमती का एक-एक दाना मोती के समान होता है। जिन लोगों ने यह चावल पहले खाया है, उन्हें तो यह अच्छा लगेगा ही। वहीं गैर बासमती चावल में भी उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, हर राज्य से चावल की एक-दो किस्में बहुत विशेष होती हैं। जो समय आने के साथ-साथ अपना बाजार धीरे-धीरे बनाएंगी। इस सब विविधता को देखते हुए हम कीमत की बात करें तो कीमत की भी बहुत बड़ी रेंज मौजूद है। आमतौर पर गैर बासमती चावल के दाम 300 डॉलर प्रति टन और बासमती 1100 डॉलर प्रति टन तक जाते हैं। जबकि कुछ गैर बासमती चावल की किस्में इतनी अच्छी हैं कि वे भी 1100 डॉलर प्रति टन तक बिक जाती हैं। अपनी पसंद और कीमत के मुताबिक शायद सब तरह का चावल भारत से चीन में लाया जा सकता है।

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