भारत में चीनी दूतावास:“यात्रियों के साथ संवाद”शीर्षक गतिविधि आयोजित

2018-10-13 17:16:29
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भारत के कैलाश मानसरोवर यात्रा संघ के अध्यक्ष तरुण विजय भाषण देते हुए

भारत में स्थित चीनी दूतावास ने 12 अक्तूबर को“यात्रियों के साथ संवाद”शीर्षक पहला कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रियों का आदान-प्रदान गतिविधि आयोजित की। कैलाश पर्वत यानी कांरिनबोचे पर्वत (Kangrinboqe) और मानसरोवर यानी माफाम युत्सो (Mapham Yutso) झील चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में स्थित है। चीनी राजदूत लुओ चाओहुई भारत के कैलाश मानसरोवर यात्रा संघ के अध्यक्ष तरुण विजय, भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी, सरकारी और गैर-सरकारी तीर्थयात्रियों के प्रतिनिधियों समेत 70 से अधिक लोगों ने इस गतिविधि में भाग लिया।

राजदूत लुओ चाओहुई ने भाषण देते हुए कहा कि तीर्थ यात्रा न केवल भारतीय श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत विश्वास से संबंधित है, बल्कि चीन-भारत संबंध का एक भाग भी है, जो चीन-भारत गैर-सरकारी मैत्री सेतु के रूप में द्विपक्षीय गैर-सरकारी आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्हें आशा है कि तीर्थ यात्री चीन में यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों को अपने मित्रों से अवगत करेंगे, चीन की अधिक जानकारी पाएंगे और चीन से अधिक प्रेम करेंगे। राजदूत लुओ ने कहा कि इस वर्ष अप्रैल महीने में चीनी और भारतीय नेताओं ने वूहान में अनौपचारिक भेंट वार्ता की। अब दोनों देश संबंधित आम सहमतियों के कार्यान्वयन में लगे हुए हैं। चीन और भारत के बीच उच्च स्तरीय मानविकी आदान-प्रदान व्यवस्था का पहला सम्मेलन वर्ष के अंत में नई दिल्ली में आयोजित होगा। चीन तीर्थ यात्रा के क्षेत्र में भारत के साथ अधिक घनिष्ठ सहयोग करेगा, ताकि दोनों देशों के बीच गैर-सरकारी मैत्री और आपसी समझ बढ़ायी जा सके।

भारत के कैलाश मानसरोवर यात्रा संघ के अध्यक्ष तरुण विजय ने भारतीय श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा के लिए चीन सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि कैलाश और मानसरोवर हिंदू अनुयायियों के मन में अपरिहार्य तीर्थ स्थान मौजूद है। वे श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा से संबंधित कार्य को और अच्छी तरह संगठित कर नागरिक मैत्री और भारत-चीन संबंध के स्वस्थ स्थिर विकास को आगे बढ़ाने को तैयार हैं।  

गतिविधि में भारत के सरकारी और गैर-सरकारी तीर्थयात्रियों ने अपने अनुभव साझा किये और चीन सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने चीन के तिब्बत में प्राप्त विकास उपलब्धियों और सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि वे चीन और भारत के बीच नागरिक दूत के रूप में द्विपक्षीय मैत्री और सहयोग को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।   

(श्याओ थांग) 

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