कोलकाता : चीन भारत आदान-प्रदान अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

2018-09-30 16:08:56
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/6
कोलकाता स्थित चीनी कौंसल जनरल मा चानवू भाषण देते हुए

कोलकाता स्थित चीनी जनरल कांसुलेट और शांति निकेतन विश्वविद्यालय के चीनी कॉलेज का संयुक्त तत्वावधान में“नए युग में चीनी और भारतीय सभ्यता का आदान-प्रदान— पुराना इतिहास और भावी विकास”शीर्षक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 28 से 29 सितंबर तक आयोजित हुई, जिसके विषयों में चीन और भारत के इतिहास, संस्कृति, पर्यटन और चीन-भारत संबंध आदि शामिल हैं। पेइचिंग विश्वविद्यालय, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय आदि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों, चीनी शिक्षा विकास रणनीति संघ, भारतीय अंतरराष्ट्रीय संबंध और विकास अनुसंधान केंद्र आदि संस्थाओं के विद्वानों और दोनों देशों की मीडिया जगत के संवाददाताओं समेत सौ से अधिक लोगों ने संगोष्ठी में भाग लिया।   

कोलकाता स्थित चीनी कौंसल जनरल मा चानवू ने उद्घाटन समारोह में भाषण देते हुए कहा कि इस वर्ष चीन में सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ है। पिछले 40 सालों में चीन और भारत के तेज़ आर्थिक सामाजिक विकास के चलते दोनों देशों के बीच मित्रवत आवाजाही लगातार बढ़ रही है। चीन और भारत प्राचीन और युवा देश हैं। दोनों ने अभूतपूर्व उच्च स्तरीय आदान-प्रदान और सहयोग किया। पहला, आने-जाने वाले लोगों की संख्या अभूतपूर्व है। 21वीं शताब्दी में दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले लोगों की संख्या दो गुनी बढ़ी। पिछले साल यह संख्या 10 लाख से अधिक हो गई और अब लगातार बढ़ रही है। दूसरा, द्विपक्षीय आवाजाही की विविधता अभूतपूर्व है। पहले दोनों देशों के बीच अधिकतर व्यापारी और धार्मिक लोग आते जाते थे। लेकिन आज यह दायरा राजनीति, संस्कृति, शिक्षा और खेल आदि क्षेत्रों तक बढ़ गया है। तीसरा, उच्च स्तरीय वार्ता और स्थानीय आवाजाही अभूतपूर्व है। इस वर्ष राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 4 महीनों में 3 बार मुलाकात हुई। खास कर दोनों नेताओं ने वूहान में हुई अनौपचारिक भेंटवार्ता में चीन-भारत संबंध के विकास को लेकर महत्वपूर्ण आम सहमतियां प्राप्त कीं, जिस से द्विपक्षीय संबंध का नया अध्याय जोड़ा गया है। चौथा, आर्थिक व्यापारिक सहयोग की घनिष्ठता अभूतपूर्व है। साल 2017 में द्विपक्षीय व्यापारिक रकम 84 अरब 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो वर्ष 2016 की तुलना में 20.3 प्रतिशत से अधिक रही और यह एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बन गया। पांचवां, थिंक टैंक और सांस्कृतिक शैक्षिक आदान-प्रदान अभूतपूर्व है। मौजूदा संगोष्ठी में 10 से अधिक चीनी और भारतीय थिंक टैंक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के 20 से ज्यादा विद्वानों ने भाग लिया। वर्तमान में 20 हज़ार से अधिक भारतीय छात्र चीन में अध्ययन कर रहे हैं। योग और बॉलीवुड फिल्में चीन में बहुत लोकप्रिय हैं। छठा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे पर सलाह मशविरा और सहयोग अभूतपूर्व है। दोनों देशों ने व्यापार संरक्षणवाद का विरोध करने, आर्थिक वैश्विकता को आगे बढ़ाने, आतंक का विरोध करने, और गरीबी उन्मुलन आदि क्षेत्रों में समान रूख अपनाते हुए व्यापक समन्वय और सहयोग किया।    

कौंसल जनरल मा चानवू ने बल देते हुए कहा कि चीन और भारत के बीच मित्रवत आदान-प्रदान के जोरदार विकास से द्विपक्षीय संबंध जीवन शक्ति से ओतप्रोत हुआ। इससे न केवल दोनों देशों के नागरिकों को लाभ मिलेगा, बल्कि मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय के निर्माण के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा, और एशिया, यहां तक कि सारी दुनिया को लाभ पहुंचाया जाएगा। विश्वास है कि आने वाले 40 सालों में चीन और भारत के बीच मित्रवत आदान-प्रदान, आपसी लाभ वाले सहयोग का और विकास होगा।  

संगोष्ठी में शांति निकेतन विश्वविद्यालय के उप प्रधानाचार्य सबज कोली सेन ने कहा कि प्राचीन समय से आज तक भारत और चीन एक दूसरे से सीखते हैं। महान साहित्यकार, शांति निकेतन विश्वविद्यालय के संस्थापक रविन्द्रनाथ टैगोर भारत और चीन के बीच पारस्परिक समझ, दोनों सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। विश्वास है कि मौजूदा संगोष्ठी भविष्य में दोनों देशों के बीच मित्रवत आवाजाही के लिए मददगार सिद्ध होगी। 

(श्याओ थांग)

शेयर