बेहतर चीन भारत संबंध से ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा मिलेगा : भारतीय विद्वान

2018-07-26 11:11:24
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बेहतर चीन भारत संबंध से ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा मिलेगा : भारतीय विद्वान

 प्रोफेसर हेमंत अदलखा सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

ब्रिक्स देशों का 10वां शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में आयोजित हो रहा है। ब्रिक्स सदस्यों में तेज़ आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने वाले दो बड़े देशों के नाते चीन और भारत के बीच सहयोग ब्रिक्स व्यवस्था के विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा?ब्रिक्स व्यवस्था में चीन की भूमिका पर भारतीय लोगों का क्या विचार है?हाल में नई दिल्ली स्थित सीआरआई संवाददाता ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के चीन और दक्षिण-पूर्वी एशियाई अनुसंधान केंद्र के उप प्रोफेसर हेमंत अदलखा के साथ एक खास साक्षात्कार किया।

जोहानसबर्ग में आयोजित मौजूदा 10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की थीम है“अफ्रीका में ब्रिक्स:चौथी औद्योगिक क्रांति में समावेशी वृद्धि और समान समृद्धि की खोज”। इसकी चर्चा करते हुए प्रोफेसर हेमंत ने कहा कि चीन चौथी औद्योगिक क्रांति का सबसे आदर्श प्रतिनिधि है, जिसने शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। अब चीन अपने विकास के लाभ को ब्रिक्स सदस्यों, यहां तक कि सारी दुनिया को पहुंचा रहा है।

प्रोफेसर हेमंत के विचार में ब्रिक्स देशों में एकता और मैत्रीपूर्ण आवाजाही जैसे क्षेत्रों में चीन ने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। याद है कि ब्रिक्स की स्थापना की शुरुआत में पश्चिमी विकसित देशों को चीन के प्रति संदेह था। उनका मानना था कि ब्रिक्स संगठन में चीन मनमाने ढंग से काम करेगा। लेकिन दस साल बित चुके हैं। ब्रिक्स बेहतर विकास करता हुआ लगातार विस्तार कर रहा है। तथ्यों से जाहिर है कि ब्रिक्स सहयोग के विकास में चीन सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। 

पिछले 10 से अधिक सालों में ब्रिक्स व्यवस्था का स्थिरता से विकास हो रहा है, जो विकासमान देशों के बीच एकता, सहयोग, समान विकास बढ़ रहा है। उल्लेखनीय बात यह है कि ब्रिक्स नव विकास बैंक की स्थापना से इस संगठन के सदस्यों और विभिन्न विकासशील देशों, खास कर भारत को बड़ा लाभ मिला है।

प्रोफेसर हेमंत के विचार में ब्रिक्स व्यवस्था में दो बड़ी ताकतों और नवोदित आर्थिक समुदायों के रूप में, इधर के सालों में चीन और भारत के बीच चाहे आर्थिक व्यापारिक सहयोग हो, या मानविकी आदान-प्रदान, या फिर उच्च स्तरीय आवाजाही ही क्यों न हो, लगातार बढ़ोत्तरी की सीढ़ी चढ़ते जा रहे हैं। दोनों देशों के सर्वोच्च नेताओं के बीच कई बार मुलाकातें हुई हैं, जिनसे चीन-भारत संबंध के विकास में मजबूत नींव डली है। पिछले वर्ष चीन और भारत के बीच व्यापारिक रकम 84 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो इतिहास में एक रिकोर्ड है। इसे चीन भारत संबंध के आगे विकास के लिए सक्रिय चिन्ह भी माना जा सकता है।

यह सर्वमान्य है चीन और भारत विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाले देश, सबसे बड़े विकासशील देश और एशिया में पड़ोसी देश हैं। चीन और भारत सहयोग करके समान विकास साकार कर सकेंगे। दोनों देशों को समान कदम उठाते हुए आपस में सहयोग और समन्वय मजबूत करना चाहिए। इससे समान विकास को बखूबी अंजाम दिया जा सके। चीन-भारत संबंधों में सुधार और इसका विकास, द्विपक्षीय सहयोग की गहराई से ब्रिक्स सहयोग व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे वैश्विक विकासशील देशों के विकास और प्रगित को भी अवसर मिलेगा। 

(श्याओ थांग)

 

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