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(फोटो) चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में भारी संभावनाः चीन-भारत के विद्वान

2018-04-25 20:00:28
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27 से 28 अप्रैल तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के हुबेई प्रांत के वूहान शहर में अनौपचारिक भेंट करेंगे। इस यात्रा का चीन-भारत सहयोग संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, चीन और भारतीय मीडिया इस पर ध्यान दे रही है। इंडियन ओवरसीज बैंक के अर्थशास्त्री धर्मलिंगम वेणुगोपाल का मानना है कि पीएम मोदी की चीन यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के विकास के लिए मौके प्रदान करेगी।

(फोटो) चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में भारी संभावनाः चीन-भारत के विद्वान

उन्होंने कहा कि भारत में अगले साल चुनाव आयोजित होने हैं, पीएम मोदी फिर से प्रधानमंत्री चुनाव मैदान में उतरेंगे। चीन की यात्रा उनके चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है। इससे पहले चीन और भारत के संबंधों में सुधार हुआ है, लेकिन हमारे बीच विकास के मौके बहुत अधिक हैं, हमें और ज्यादा सहयोग करने की जरूरत है।

(फोटो) चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में भारी संभावनाः चीन-भारत के विद्वान

छिंगह्वा विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध अध्ययन संस्थान की प्रोफ़ेसर लीली ने कहा कि चीन और भारत के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार राशि सिर्फ चीन की कुल आयात-निर्यात राशि का 2 प्रतिशत है। उन्हें विश्वास है कि भारत में आर्थिक विकास के साथ-साथ, भारतीय निर्यात राशि में इजाफा होगा। उनका मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति में चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की व्यापक संभावना है।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन और भारत के बीच आम हित मौजूद हैं। चीन और भारत दोनों उभरती अर्थव्यवस्था हैं, आर्थिक वैश्वीकरण और स्वतंत्र-खुली बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की रक्षा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

धर्मलिंगम वेणुगोपाल इस विचार से सहमत है, उन्होंने कहा कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग दोनों देशों के लिए लाभदायक है। विशेषकर रोजगार बढ़ाने, उद्यम विकास को बढ़ाने, बुनियादी ढांचा निर्माण, कृषि उद्योग, सूचना उद्योग, पर्यटन उद्योग, खेल व सांस्कृतिक उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन निर्माण पर सक्रिय प्रभाव पड़ता है।

(फोटो) चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में भारी संभावनाः चीन-भारत के विद्वान

भारतीय आदित्य बिड़ला ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री अजित रानाडे का मानना है कि चीन और भारत को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के विकास पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि इस प्रणाली से न सिर्फ चीन और भारत, बल्कि दूसरे देशों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस से पहले चीन ने “मेड इन चाइना”योजना लागू की , जबकि भारत ने“मेक इन इंडिया”योजना शुरू की। कुछ लोगों के विचार में यह चीन और भारत के बीच प्रतियोगिता है। लेकिन इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है। हमारे राष्ट्रीय स्थिति समान है, अभी “मेड इन चाइना” के उत्पाद पूरे दुनिया में मिलते हैं। लेकिन और ज्यादा विदेशी निवेश को आकर्षित करना “मेक इन इंडिया” का उद्देश्य है।

(मीरा)

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