चीनी अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो की प्रसार गतिविधि दिल्ली में आयोजित
24 मार्च के दोपहर को चीनी वाणिज्य मंत्रालय और भारतीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने भारत की राजधानी दिल्ली में संयुक्त रूप से चीनी अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो की प्रसार गतिविधि का आयोजन किया। इस मौके पर चीन-भारत व्यापारिक परियोजनाओं की हस्ताक्षर रस्म का आयोजन भी किया गया। चीनी वाणिज्य मंत्रालय की विदेशी व्यापार ब्यूरो के प्रधान रन होंगपिन, भारत स्थित चीनी दूतावास के मिनिस्टर ली बीच्येन, भारतीय उद्योग व वाणिज्य संघ और पीएचडी वाणिज्य चैम्बर के अधिकारियों ने भाग लिया और भाषण भी दिया। चीन और भारत से आए 120 से ज्यादा सरकारी विभागों, व्यवसाय संघों और कारोबारों के प्रतिनिधि गतिविधि में उपस्थित थे।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय की विदेशी व्यापार ब्यूरो के प्रधान रन होंगपिन ने कहा कि इधर के सालों में चीन और भारत के आर्थिक व व्यापारिक संबंधों में तेज विकास की प्रवृत्ति पर बरकरार है। द्विपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक सहयोग में यथार्थ उपलब्धियां हासिल हुई हैं। चीन का तेज विकास विश्व के लिए मौका भी है। चीन भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण सहयोग और खुलेपन व समावेशी के आधार पर एक दूसरे से सीखना चाहता है और आपसी लाभ व समान उदार वाली रेशम मार्ग की भावना को लेकर द्विपक्षीय बहुक्षेत्रीय सहयोग, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाना चाहता है। चीन भारतीय कारोबारों के पहले चीनी अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सप्रो में भाग लेने का स्वागत करता है।
मिनिस्टर ली बीच्येन ने कहा कि हालिया विश्व में व्यापार संरक्षणवाद नजर आया है और बहुपक्षीय व्यापारिक सिस्टम चुनौतियों का सामना कर रहा है। विश्व अर्थतंत्र के निरंतर व स्थिर विकास भी गंभीर परीक्षण में है। लेकिन शांति, विकास और सहयोग अब भी युग की मुख्य थीम रहा है। चीन और भारत को हाथ मिलाकर सहयोग करना चाहिए, एक साथ व्यापार संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए, अपनी स्वतंत्र व्यापारिक सिस्टम की रक्षा करनी चाहिए और व्यापक विकासशील देशों के समान हितों की रक्षा करनी चाहिए।
इस मौके पर भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो के बारे में चीन के परिचय की सराहना करता है। अनेक भारतीय उद्यमी इस एक्सपो में भाग लेना चाहते हैं। भारत में आर्थिक विकास की अच्छी प्रवृत्ति है। चीन निर्माण उद्योग का बड़ा देश है। दोनों देशों की श्रेष्ठताओं की आपसी आपूर्ति होती हैं। इसलिए द्विपक्षीय सहयोग के विशाल क्षेत्र हैं और उज्जवल भविष्य भी।
हस्ताक्षर रस्म में चीन और भारत की उद्यमियों ने कुल 101 व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनकी कुल रकम करीब 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंची है।
(श्याओयांग)




