शांति निकेतन में “नयी अवधि में चीन-भारत संबंध” संगोष्ठी आयोजित

2018-01-09 18:25:30
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

शांति निकेतन में “नयी अवधि में चीन-भारत संबंध” संगोष्ठी आयोजित

शांति निकेतन में “नयी अवधि में चीन-भारत संबंध” संगोष्ठी आयोजित

कोलकाता में चीनी वाणिज्य दूतावास जनरल और विश्व-भारती विश्वविद्यालय के चीनी भवन ने 8 जनवरी को शांति निकेतन में “नयी अवधि में चीन-भारत संबंध” संगोष्ठी का संयुक्त आयोजन किया। चीनी काउंसिल जनरल मा चानवू, विश्व-भारती विश्वविद्यालय के कार्यकारी उप राष्ट्रपति स्वपन कुमार दत्ता और चीन - भारत के संबंधित विशेषज्ञ और विद्वानों समेत लगभग 200 लोगों ने इस संगोष्ठी में भाग लिया।

इस संगोष्ठी में मा चानवू ने भाषण किया कि वर्तमान में सारी दुनिया बड़े विकास, बदलाव और समायोजन के दौर से गुजर रही है। इस अवधि में चीन और भारत की आर्थिक विकास गति काफी तेज़ है। दोनों देशों की अंतर्राष्ट्रीय स्थिति लगातार बढ़ रही है। मतभेदों की तुलना में दोनों देशों के बीच सामान्यता और आम हित और बड़े हैं। चीन और भारत को संयुक्त प्रयास करना और मतभेदों को ठीक से संभालना चाहिये। इसीलिये वे मित्रवत मेलजोल और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को मज़बूत करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के स्वस्थ्य और स्थिर विकास को बढ़ाएंगे। उम्मीद और विश्वास है कि यह संगोष्ठी चीन-भारत आपसी समझ और मानविकी विनिमय को बढ़ाने के लिये सकारात्मक प्रभाव डालेगी।

स्वपन कुमार दत्ता ने कहा कि भारत के लिये चीनी विकास का अनुभव ग्रहण करने लायक है। चीनी विशेषज्ञों और विद्वानों को चीन के अध्ययन पर आगे ध्यान देना चाहिये।

प्रतिनिधियों ने कहा कि चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यता संपन्न देश हैं और नवोदित बाज़ार देश भी हैं। चीन-भारत संबंध दोनों देशों, इस क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिये काफी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों को आपसी विश्वास, संपर्क और संचार, सहयोग को मजबूत करना चाहिये।


123MoreTotal 3 pagesNext

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories