चीन-भारत संबंध: चीन और भारत के बीच तुलना

2017-11-14 14:05:55
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

चीन और भारत के बीच तुलना करना एक व्यापक टॉपिक है और तमाम विश्लेषकों ने इस सवाल को लेकर कई लेख लिखे हैं । अब आइये सुनते हैं, चाइना रेडियो इंटरनेशनल के बुजुर्ग टिप्पणीकार की इस बात पर समीक्षा ।   

 

सपना – यह चाइना रेडियो इंटरनेशनल है। सभी श्रोताओं को सपना की नमस्ते । 

 

हू – और सभी श्रोता दोस्तों को हूमिन का भी नमस्कार ।

सपना – चीन और भारत की अकसर तुलना की जाती है और तमाम विद्वानों और विश्लेषकों ने इस सवाल को लेकर कई लेख लिखे हैं । मुझे अच्छी तरह पता है कि आप लंबे समय तक भारत में रह चुके हैं और इन दो महान देशों की तुलना में आपके भी अपने विचार हैं । और आपने ऐसे विश्लेषण को खारिज किया है कि चीन-भारत संबंध एक ड्रैगन और एक हाथी जैसे प्रतियोगिता वाले संबंध हैं । आपके विचार में चीन और भारत जंगल में घूमने वाले दो हाथी हैं या साथ-साथ खड़े दो पेड़ों के जैसे  हैं ।

 

हू – जी हां । मैं हमेशा से इस बात पर कायम रहा हूं कि चीन और भारत की तुलना में केवल आर्थिक आंकड़े बताना बेकार है । आर्थिक विकास की मात्रा या आंकड़े आसानी से बदल सकते हैं । लेकिन किसी राष्ट्र का भाग्य इसकी आंतरिक गुणवत्ता से संबंधित है । मैं इसीलिए ड्रैगन और हाथी के वर्णन से सहमत नहीं हूं, क्योंकि बहुत से विश्लेषकों का मानना है कि चीन और भारत के संबंध प्रतियोगिता और दुश्मनी के जैसे हैं । लेकिन मेरे विचार में चीन और भारत एक ड्रैगन और एक हाथी नहीं, पर दो भाइयों के जैसे होते हैं । चीन और भारत समान देश हैं, वे जंगल में साथ-साथ रह रहे दो हाथी या दो पेड़ ही हैं । 

 

सपना – लेकिन मुझे याद है कि आप भी कई बार कह चुके थे कि भारत एक धार्मिक देश है जबकि चीन सेक्युलर है । इसमें जो फर्क है वह बहुत बड़ा है । इसलिए चीन-भारत संबंधों के अनुसंधानक्रताओं को इस बात पर जरूर ध्यान रखना पड़ता है ।

 

हू – जी हां । मैं बहुत लंबे समय से चीन-भारत संबंधों के विकास पर ध्यान देता आया हूं और मेरे भारत के प्रति निष्कर्ष का बदलाव भी निरंतर जारी है । कई साल पहले मुझे विश्वास था कि भारत एक पूरी तरह धार्मिक देश है जबकि चीनी लोग सेक्युलर हैं, इसी स्थिति में दोनों के बीच बातचीत करने में हमेशा से बाधा मौजूद है । लेकिन कुछ साल बाद मैं अपने प्रारंभिक विचारों को बदलने पर मजबूर हुआ, मैंने अपने विचारों का कई बार खंडन किया । भारतीय लोगों के साथ लंबे समय तक रहने के बाद यह तर्क निकला है कि भारतीय लोग भी व्यवहारवादी हैं और चीनी लोग भी आदर्शवादी हैं ।

 

सपना – आप क्यों ऐसे बोलते हैं ?

 

हू – मैं क्यों ऐसा बोलता हूं ?क्योंकि मैं भारत में लगभग कई वर्ष रह चुका हूं । मैंने वहां के लोगों के दिल को अंदर से छुआ और यही निष्कर्ष निकाला ।

 

सपना – कैसे ?विस्तृत रूप से बताएं ?

 

हू – सुनिये, मेरे भारत में बहुत से दोस्त हैं जो अधिकांश तौर पर एजुकेटेड पीपल हैं । इन के अलावा मैंने मज़दूरों, भिखारियों, चालकों, दुकानदारों और साधुओं जैसे तरह तरह के व्यक्तियों से भी संपर्क किया था, उनमें हिन्दू भी थे, दूसरे धर्म के भी थे । मुझे यह बताया गया था कि हमें अपना अस्तित्व क्यों महसूस होता है, क्योंकि हमारी आत्मा होती है । आत्मा जहां से आती है वहीं वापस जाती है। आत्मा की तुलना में दूसरी सबकुछ बाह्य चीज़ें हैं । जैसे धन, कार, मकान, संपत्ति और यहां तक शरीर, सब कपड़े की तरह चीज़ें हैं । आसमान में स्वतंत्रता से उड़ान भरने की आत्मा, हम ही हैं ।

 

सपना – चीन में भी ऐसा कहना है । मुझे विश्वास है यह कहावत बौद्ध धर्म के साथ-साथ भारत से चीन आयी थी ।

 

हू – बिल्कुल । चीन ने बौद्ध धर्म के साथ-साथ भारत से बहुत कुछ सीखा । लेकिन आत्मा मौजूद होने का बहुत लंबा इतिहास है । पर यहां मैं यही बताना चाहता हूं कि चाहे चीनी लोग या हिन्दुस्तानी, उनकी जो आत्मा है, वह एक ही है ।  

 

सपना – मैं इस बात से सहमत हूं । विश्व में सभी जातियों के लोग समान हैं । हमारा मन एक ही है, हम सब सुखमय जीवन चाहते हैं, और सुरक्षा और सामान्य हितों के लिए भी हमारी समान अभिलाषा है । इसी बात को लेकर चीनी लोगों और भारतीय लोगों के बीच में क्या फर्क है । 

 

हू – चीन और भारत के बीच फर्क बताने की तुलना में इनकी समानता को साफ करना ज्यादा महत्वपूर्ण है । चीन और भारत, जिनकी महान सभ्यताओं को साम्राज्यवाद द्वारा रौंदा गया था, आज अपने अपने पुनरुद्धार की समान दिशा में बढ़ रहे हैं । दोनों देशों के एजुकेटेड पीपल के दिमाग में एक ही भावना मौजूद है, यानी प्राचीन काल की उज्जवल संस्कृति का गौरव और आधुनिक काल में पिछड़ेपन की उदासीनता साथ-साथ रहती है । इसी दृष्टि से चीनी और भारतीय लोगों के बीच में फर्क क्या है ?उनका दिल समान ही है ।

 

सपना – जी हां, मैं इससे सहमत हूं । इतिहास में शानदार सभ्यता का निर्माण किया था, आधुनिक काल में साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद से दबाया गया था , और आज राष्ट्रीय पुनरुद्धार की महान योजनाएं साकार करने के लिए कोशिश कर रहे हैं, हां जी, इसी दृष्टि से देखें तो चीनी जनता और भारतीय जनता समान ही है । 

 

हू – इसलिए भारत में जब भी किसी ने पूछा कि आप किसी कंट्री से आते हैं, तब मैं हमेशा जवाब देता था कि हम हिन्दुस्तानी हैं । जब किसी ने आगे भी पूछा कि आप क्यों देखने में परदेशी हैं, तब मैं ने जवाब दिया कि मुख से परदेशी तो हैं पर दिल में हिन्दुस्तानी हैं । मेरी बात सुनकर लोग इसे मज़ाक समझते थे, पर उन्हें नहीं मालूम था कि यही मेरी फिलोस्फी है । क्योंकि मेरे ख्याल में आत्मा की दृष्टि से देखें, चाइनीज़ और हिन्दुस्तानी एक ही है ।

 

सपना – आज की दुनिया में चीन चाइना बन गया है और भारत भी इंडिया बना है । इसी स्थिति में इन दो देशों के बीच जो समानता है वह अधिक बनी है कि नहीं ?

 

हू – हां, हम देख रहे हैं कि आज चीन और भारत दोनों ने आधुनिकीकरण के निर्माण का समान लक्ष्य बनाया है और दोनों के घरेलू शासन और विदेश सिद्धांत भी मिलते जुलते हैं । लेकिन हम भी देख पाते हैं कि चीन और भारत इन दो भाइयों के बीच पारंपरिक समझ और विश्वास का अभाव मौजूद है ।

 

सपना – इसीलिये आप ने यह सुझाव पेश किया है कि हमें सबसे पहले अपने दिल को साफ साफ समझना चाहिये । और दिल के अन्दर में जो आत्मा है, वह क्या है, उसकी उम्मीद क्या है, इसे साफ करने के आधार पर दूसरे के साथ विचार साझा कर सकते हैं । क्या यह ठीक है ?

 

हू – जी, जी, यह सही है । मतैक्य हासिल करने के आधार पर लोग एक दूसरे के साथ सहयोग कर सकेंगे । लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिये कि हम कौन हैं, कहां से आते हैं, क्या लेना चाहते हैं, इतनी जल्दी में क्यों होते हैं ?अपने दिल की सफाई करने के बाद दूसरे लोगों की समझ में आना भी आसान होगा । क्या आप इस बात पर सहमत हैं ?

 

सपना – आप की ये बातें मैंने पहली बार सुनी हैं, आपके विचार इतने गहरे हैं कि सोचने के लिए समय की जरूरत है । लेकिन फिर भी, आपके विचार सोचने योग्य हैं ।

 

हू – मेरा विचार थोड़ा अलग होता है,लेकिन मैं दूसरों के साथ विचारों का आदान प्रदान करने को तैयार हूं ।

 

सपना – जी, मेरा भी यही मानना है । अच्छा श्रोताओ, आज का कार्यक्रम यही समाप्त होता है, अब आप आज्ञा दें, नमस्ते ।

 

हू – नमस्ते । 

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories