आरसीईपी से हटने से भारत जीडीपी बढ़ाने का मौका गंवाएगा

2020-07-07 15:33:34
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चीनी एप्स पर बैन लगाने और बायकॉट चाइना अभियान चलाने के बाद भारत ने हाल में घोषणा की कि वह चीन के नेतृत्व वाले किसी भी व्यापारिक समझौते में भाग नहीं लेगा, जिसमें क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (आरसीईपी) भी शामिल है।

आपको बता दें कि आरसीईपी 10 आसियान देशों की पहल पर स्थापित मुक्त व्यापार समझौता है। इसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और भारत को भी आमंत्रित किया जाता है। आरसीईपी का उद्देश्य टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधा कम करने के जरिए 16 देशों के लिए एकीकृत बाजार स्थापित करना है। अगर समझौता संपन्न होगा, तो इसमें लगभग 3.5 अरब लोग शामिल होंगे। समझौते से जुड़ा क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बन जाएगा।

चीनी विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा था कि आरसीईपी पर चीन की मुख्य भूमिका नहीं है। यह आसियान के नेतृत्व में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण सहयोग समझौता है। चीन हमेशा आसियान के मुख्य स्थान और भूमिका का सम्मान करने के आधार पर विभिन्न पक्षों के साथ सहयोग करता है और वार्ता की प्रक्रिया बढ़ाता है।

अब विभिन्न सदस्य देश वार्ता को आगे बढ़ा रहे हैं। योजना है कि इस साल आरसीईपी संपन्न होगा और अगले साल के मध्य में प्रभावी होगा। वार्ता 7 साल के अधिक समय तक चली, इस दौरान भारत ने कई बार खलल डाला। भारत की अपनी चिंताएं हैं। भारत के उद्योग जगत और किसान चिंतित हैं कि अगर चीनी उत्पादों पर टैरिफ कम किया जाए, तो और अधिक सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश करेंगे। वहीं भारत व्यापार प्रतिकूल संतुलन बढ़ने पर भी परेशान है।

भारत के आरसीईपी से हटने के फैसले को लेकर चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के प्रमुख चांग शाओकांग ने कहा कि आरसीईपी का द्वार भारत के लिए हमेशा खुला है। चीन किसी भी समय में और किसी भी जगह पर भारत के साथ वार्ता बहाल करना चाहता है, ताकि दोनों पक्षों के लिए संतोषजनक समझौता संपन्न हो सके। आसियान के वर्तमान अध्यक्ष देश वियतनाम ने भी आशा जताई कि भारत आरामदेह स्थिति में आरसीईपी में शामिल होगा। वहीं दो हफ्ते पहले आरसीईपी की मंत्री स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित हुई। इसमें जारी संयुक्त वक्तव्य में विश्वास जताया गया कि भारत की भागीदारी क्षेत्र के विकास और समृद्धि में योगदान देगी।

लेकिन भारत ने चीन के साथ सीमा मुठभेड़ के बहाने पूरी तरह से आरसीईपी के साथ वार्ता बंद कर दी है। अगर अन्य 15 देश आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं, तो समझौता प्रभावी होने के बाद इन 15 देशों को काफी बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचेगा। अनुमान है कि 15 देशों की जीडीपी 1 खरब 37 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचगी। तो इस तरह भारत के हाथ से जीडीपी बढ़ाने का अच्छा मौका निकल सकता है।

(ललिता)

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