अनार के बीजों की तरह साथ रहना चीन से सीखे दुनिया

2020-06-12 17:08:44
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चीन लगभग 1 अरब 40 करोड़ की बड़ी आबादी वाला देश है। इतने बड़े देश में विविधता होना लाजिमी है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के शब्दों में, अनार के बीजों की तरह एक साथ रहने की जरूरत है। उनका यह वक्तव्य चीनी नागरिकों पर सटीक बैठता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में विभिन्न जातियों के लोग सौहार्द के साथ रहते हैं।

किसी भी देश की सरकार और नागरिकों की कर्मठता और देशप्रेम का असली इम्तिहान संकट के वक्त ही होता है। पिछले कुछ महीनों से फैल रही कोविड-19 महामारी ने भी चीन समेत समूचे विश्व के सम्मुख बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसा नहीं है कि चीन या दुनिया में पहली बार किसी स्वास्थ्य आपदा ने दस्तक दी हो। इससे पहले 1920 में स्पेनिश फ़्लू ने पूरी दुनिया में आतंक मचाया था। वहीं इस दशक में सार्स, इबोला और मर्स आदि महामारियों ने भी लोगों की नींद उड़ायी थी। इस बीच खबर आ रही है कि अफ्रीका में इबोला ने फिर दस्तक दे दी है। इस तरह की स्वास्थ्य आपदाओं को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखना चाहिए। क्योंकि ये कभी भी किसी भी देश के नागरिकों को अपना शिकार बना सकती हैं।

उधर चीन के सर्वोच्च नेता ने हाल ही में दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत के एक ग्रामीण इलाके का दौरा करते हुए कहा कि, अनार के बीजों की तरह एक साथ रहें। जैसा कि हम जानते हैं कि चीन में अनार के फल को शुभ माना जाता है। यह शुभ संदेश ऐसे वक्त में दिया गया है जब चीन कोरोना वायरस का अच्छी तरह से मुकाबला करने में सफल रहा है। असल में शी अपने देश में मौजूद 56 जातियों की मजबूत एकता और उनकी विविधता का वर्णन कर रहे थे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोविड-19 महामारी के संकट के सामने चीन की सभी जातियों के नागरिकों ने एकजुटता दिखाई। क्योंकि वायरस किसी जाति या नस्ल के बीच कोई अंतर नहीं करता है और न ही किसी देश की सीमा को मानता है। ऐसे में मिल-जुलकर वैज्ञानिक तरीके अपनाते हुए वायरस से संघर्ष किए जाने की आवश्यकता होती है, जैसा कि चीन ने कर दिखाया है। इस वर्ष की शुरुआत में जब इस खतरनाक वायरस के प्रसार का पता चला तो लगा कि चीन संकट में घिर चुका है। लेकिन चीन सरकार, विभिन्न विभागों, चिकित्सकों और लोगों के जज्बे ने इस महामारी को कंट्रोल करने में बड़ी भूमिका निभाई। वायरस के केंद्र हूबई प्रांत में हज़ारों चिकित्सा कर्मियों को भेजा गया, वहीं दस दिन में दो बड़े अस्पताल भी तैयार कर दिए गए। इस तरह कुछ ही समय में चीन ने वायरस के प्रसार को फैलने से रोकने में बड़ी सफलता हासिल की।

गौरतलब है कि अभी सारी दुनिया वायरस की चपेट में है और कई देश इस संकट से जूझ रहे हैं। इसे देखते हुए कहा जा सकता है चीनी नागरिकों ने अनार के बीजों की तरह एकजुट होकर बड़े संकट का सामना किया। आज चीन इसी कहावत पर कायम रहकर दूसरे देशों को मदद दे रहा है, जो अपने आप में एक बड़ा संदेश है। कहने का मतलब यह कि एकता में ही अखंडता होती है, और किसी भी दुश्मन के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से मिल-जुलकर ही जीत पायी जा सकती है।

 

लेखकः अनिल आज़ाद पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप के पत्रकार हैं

 

 

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