अमेरिका के "मानवाधिकार रक्षक" बेशर्म

2020-06-11 20:13:08
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हाल ही में अमेरिकी नागरिक अधिकार गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र संघ को अपने एक पत्र में संयुक्त राष्ट्र संघ से अमेरिकी पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों का हिंसक दमन करने की जांच करने की मांग की। और कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए अमेरिकी सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिये।

बीते दसेक दिनों में अमेरिकी अश्वेत नागरिक जार्ज फ्लॉयड की मौत की वजह से देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। उधर अमेरिका में बीस लाख लोगों को संक्रमित करने वाली कोविड-19 महामारी से मृतकों की संख्या भी 1.1 लाख तक जा पहुंची है। नस्लभेद और कमजोर लोगों के अधिकारों के उल्लंघन के कारण अमेरिका को मानवाधिकार की आपदा में फंसाया गया है।

प्रदर्शन का भीषण होने के बावजूद अमेरिकी पुलिस ने और अधिक मानवाधिकार त्रासदी को जन्म दिया है। और यहां तक प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने वाली मीडिया पर भी बार बार प्रहार किया जा रहा है। उधर अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए बल का प्रयोग करने की बात की। इस सब से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका में वे "मानवाधिकार रक्षक" वास्तव में मानवाधिकार आपदा पैदा करने वाला ही है। ब्रिटेन की मीडिया द इंडिपेंडेंट पत्र ने कहा कि अमेरिका में मानवाधिकार और जनता की जान की उपेक्षा की जा रही है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने वक्तव्य में कहा कि अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों से वाशिंगटन का दोहरे मापदंड दिखता है।

अमेरिका की राजनीतिक पत्रिका पॉलिटिको ने कहा कि अगर अमेरिका में जो घटित हो रहा है वह दूसरे देश में होता तो, तब अमेरिका के राजनीतिज्ञ जरूर ही ध्यान में रखकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करने और सरकार से संयम लेने की अपील करते। लेकिन आज यह सब अमेरिका में हो रहा है तब तो बोलने की स्वतंत्रता ,लोकतंत्र और मानवाधिकार आदि सब कुछ को कुचला जा रहा है।

और यह भी चर्चा करने योग्य है कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ अकसर लोकतंत्र और मानवाधिकार के शब्द को लेकर दूसरे देश के अन्दरूनी मामलों के प्रति गैर-जिम्मेदार बयान दिया करते थे। लेकिन आज वे अपने देश में हुए प्रदर्शनों के प्रति खामोश हैं। अमेरिका में नस्लवाद का अंतरविरोध लाइलाज मरीज माना जाता है। वह आधुनिक काल में मानवाधिकार और अमेरिकी समाज के लिए शोक और दुर्भाग्य की बात है।

( हूमिन )

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