उकसावे पर ध्यान न दें, महामारी की रोकथाम में सहयोग सबसे अहम

2020-05-30 19:10:43
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अब कोविड-19 महामारी दुनिया भर में फैल रही है। चीन ने सबसे पहले महामारी की रिपोर्ट प्रस्तुत की और इस संकट का सामना किया। महामारी फैलने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने खुद रोकथाम के काम का नेतृत्व किया। चीनी नेता हमेशा नागरिकों के जीवन की सुरक्षा और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्राथमिकता देते हैं। चीन ने महामारी की रोकथाम के लिए सबसे सख्त कदम उठाए और कठिन प्रयास के बाद महामारी पर विजय पाई।

भारत ने भी महामारी फैलने के बाद शीघ्र ही कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडॉउन होने की घोषणा की। हालांकि उस समय भारत में पुष्ट मामलों की संख्या सिर्फ 519 थी, लेकिन सरकार ने फिर भी निर्णायक उपाय किया। भारत के विभिन्न जगतों ने सहमति बनाई और सरकार के कदम का समर्थन किया। भारतीय लोग भी नियम का पालन करते हैं और अपने घर में रहते हैं। लॉकडॉउन लागू होने के बाद से अब तक सामाजिक व्यवस्था स्थिर बनी है।

अब हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देखते हैं। लंबे समय से ट्रंप कोविड-19 महामारी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। महामारी की चर्चा करते समय उन्होंने कहा था कि “चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। सब काबू में हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि अल्ट्रावायलट रेज़ वायरस को मार सकता है या हम शरीर में कीटाणुनाशक का इंजेक्शन लगा सकते हैं। उनकी बातों ने सभी लोगों को चौका दिया। 23 मई को मीडिया ने रिपोर्ट की कि ट्रंप वर्जीनिया स्टेट के एक निजी क्लब में दो दिन गोल्फ खेलने गए। 27 मई को अमेरिका में कोविड-19 के मौत के मामलों की संख्या 1 लाख से अधिक रही, लेकिन ट्रंप ने इस पर कोई चर्चा नहीं की। अमेरिका में महामारी की स्थिति बिगड़ रही है। ट्रंप ने इसकी जिम्मेदारी चीन को कसूरवार ठहराया।

महामारी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की दृष्टि से देखा जाएं, चीन ने मानव समुदाय के साझे भविष्य की विचारधारा से दुनिया के साथ महामारी की रोकथाम के अनुभव साझा किए और अन्य देशों को भरसक समर्थन दिया। चीन विभिन्न देशों के साथ विश्व सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य को बढ़ाने में प्रयास कर रहा है। 29 मार्च को 1.3 लाख एन 95 मास्क, 17 लाख सर्जिकल मास्क और 50 हजार सुरक्षा कपड़ों से लदा हवाई जहाज चीन के शांगहाई से न्यूयॉर्क के कैनेडी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे में पहुंचा। इसका मतलब है कि चीन द्वारा अमेरिका को सहायता दी गई पहली खेप की चिकित्सा सामग्री अमेरिका में पहुंचाई गई है।

उधर, भारत ने घरेलू मांग सुनिश्चित करने के लिए 4 अप्रैल को एंटीमलेरिया दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का निर्यात स्थगित करने की घोषणा की। लेकिन अमेरिका के दबाव में भारत ने 6 अप्रैल को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन समेत 14 दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध हटाया, क्योंकि ट्रंप को लगता है कि यह दवा कोविड-19 निमोनिया के उपचार के लिए कारगर है।

हम देखते हैं अमेरिका ने दुनिया के लिए क्या किया। जब जापान और दक्षिण कोरिया महामारी से ग्रस्त थे, अमेरिका आंखें मूंदे बैठा रहा। जब यूरोपीय देश महामारी से ग्रस्त थे, अमेरिका ने भी सहायता नहीं दी। मित्र देशों के लिए अमेरिका का उदासीन रवैया चौंकाने वाला है। अमेरिका ने चीन को कोई ठोस सहायता नहीं दी, इसके विपरीत बार बार चीन पर कालिख पोती। चीनी कहावत है कि मुसीबत में असली भाव दिखता है। कोवीड-19 महामारी कसौटी है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि महामारी हमें बताती है कि सभी देशों के लोगों का स्वास्थ्य घनिष्ठ से जुड़ता है। हम एक वैश्विक गांव में रहते हैं। मानव जाति भाग्य समुदाय है। वायरस की कोई राष्ट्रीय सीमा नहीं है। सभी लोगों को इस चुनौती का सामना करना पड़ता है। विभिन्न देशों को एकजुट होकर मानव समुदाय के साझे भविष्य का निर्माण करना चाहिए और पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए।

महामारी फैलने के बाद चीन और भारत ने घनिष्ठ संपर्क और सहयोग कायम किया। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने एक दूसरे को पत्र भेजा और फोन पर बातचीत की। महामारी की रोकथाम में भारत ने चीन को जोश दिलाया, चीन ने भारत को सहायता दी। चीन लगातार भारत के साथ चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करेगा। दुनिया में सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश होने के नाते चीन और भारत के बीच सहयोग विश्व सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य बनाए रखने और अंततः महामारी पर विजय पाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस साल चीन-भारत राजनयिक संबंध स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। हम हाथ मिलाकर महामारी की रोकथाम करें।

(ललिता)

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