वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख महामारीविद् से ख़ास चर्चा

2020-05-26 10:05:56
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जब से नोवल कोरोनोवायरस महामारी, जिसे कोविड-19 के रूप से भी जाना जाता है, दुनिया में फैली है, तब से सभी का निगाहें वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पर आकर टिक गई हैं। इस कोरोनावायरस ने अब तक वैश्विक स्तर पर 50 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है, और करीब साढ़े 3 लाख अपनी जान गंवा चुके हैं। इस कोरोना की वजह से दुनिया भर में लॉकडाउन, अर्थव्यवस्थाओं की हालत पतली कर दी है।

पिछले साल दिसंबर में कोरोना का पहला मामला सामने आया था, तब से वैज्ञानिक वायरस के उद्गम का पता लगाने लगे, ताकि वैक्सीन तैयार किया जा सके। इस बीच, साजिश के तहत दोषारोपण के खेल शुरु हो गया, और यह शक जताया जाने लगा कि यह चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से “लीक” हुआ है। जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस प्रकृति में पैदा हुआ है, न कि मानव-निर्मित है।

चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीन चीनी राष्ट्रीय टीवी चैनल सीजीटीएन ने इस बारे में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की एक प्रमुख महामारीविद् शी चंगली से ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह एक नये तरीके का वायरस है, और यह जानवर से पैदा हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके इंस्टीट्यूट ने वायरस के जीनोम अनुक्रम का पता लगाने के बाद 12 जनवरी, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन को सौंप दिये थे। उसी समय, उन्होंने रोगज़नक़ों की पहचान करने और वैक्सीन बनाने के लिए को भी दुनिया भर की सरकारों और वैज्ञानिकों के लिए जीआईएसएआईडी नामक एक जीन लाइब्रेरी में अन्य अनुक्रमों को भी अपलोड कर दिये थे।

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख महामारीविद् शी चंगली ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि कोरोना महामारी के फैलने बाद उनके वैज्ञानिक दल ने बहुत ही कम समय में, एक साथ रोगज़नक़ अलगाव, जीनोम अनुक्रमण और पशु संक्रमण प्रयोग किये, और बिना किसी देरी के इन सभी कामों को पूरा किया।

उन्होंने आगे कहा, “हमने वास्तव में साल 2004 में चमगादड़ कोरोनावायरस का अध्ययन करना शुरू कर दिया था। 15 साल बाद, हमारे दल ने बड़ी संख्या में सामग्री, प्रौद्योगिकी, विधियों और अनुसंधान मंचों को इकट्ठा किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके दल में कई प्रतिभाशाली व्यक्ति भी शामिल हुए हैं, इस तरह बहुत कम समय में अस्पष्टीकृत निमोनिया के कारण को समझने में सक्षम हुए हैं।

प्रमुख महामारीविद् शी चंगली ने यह भी कहा कि उनका अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मूल लक्ष्य दुनिया भर के सभी लोगों के स्वास्थ्य की सेवा करना है क्योंकि फैलने वाले संक्रामक रोग कोई सीमा नहीं जानते हैं। यह दुनिया भर के वैज्ञानिकों और सरकारों को खुले, पारदर्शी और सहकारी होने की आवश्यकता है, जो नए संक्रामक रोगों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इसलिए शुरुआत में, हमारा लक्ष्य सहयोग करना था। सहयोग के माध्यम से, हम पारस्परिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और वायरस को जल्द से जल्द समझ सकते हैं।”

(अखिल पाराशर)

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