चीन कैसे हासिल कर पाएगा गरीबी खत्म करने का लक्ष्य? जानिए अखिल पाराशर के विश्लेषण से

2020-05-22 20:24:29
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क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में अभी भी कितने लोग अति-गरीबी में रहते हैं? करीब 70 करोड़, इसलिए मेरे विचार में गरीबी खत्म करना एक वैश्विक और चुनौतीपूर्ण मिशन है।

दुनिया का सबसे बड़ा विकासशील देश चीन लंबे समय से गरीबी से लड़ रहा है। पिछले 70 वर्ष पहले जब चीन एक नया चीन बना था, और सन् 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई थी, उसके बाद से चीन 80 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से उभार पाने में कामयाब रहा है।

हालांकि, गरीबी से पार पाने के लिए चीन में निरंतर प्रयास किए गए हैं, फिर भी साल 2015 में चीन में गरीबी में रहने वाले 5 करोड़ से अधिक लोग थे। और देश ने साल 2020 तक अपने सभी नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया।

सच में अभी भी चीन के सामने कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ता है। पहला, वहां किस तरह के आधुनिक उद्योग लगाये जाएं? क्योंकि उत्पादन और उत्पाद वहां की स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित होना चाहिए। दूसरा, लाभ कैसे कमाया जाए? लागत और आगाम का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। तीसरा, योग्य श्रमिकों को कहां खोजा जाए? क्योंकि अधिकतर युवा नौकरी की तलाश में शहरों की ओर कूच कर जाते हैं, जबकि वहां रह जाने वाले स्थानीय लोगों में नौकरी करने या कोई ट्रेनिंग लेने की प्रेरणा में कमी नजर आती है।

खैर, मेरे विचार में इन सभी चुनौतियों का सामना ख़ास रणनीति अपनाकर ही की जा सकता है। चीन का जो गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य है, उसे व्यावहारिक, अनुकूलन, और वैज्ञानिक रणनीति के साथ ही पूरा किया जा सकता है।

देखा गया है कि चीन सरकार ने सतत सहायता देने के लिए एक प्रणाली अपनाई है। उस प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है, जिसके तहत वहां लोगों को आर्थिक गतिविधियों में संलग्न होने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसा कि सरकार से वित्तीय सहायता लेने वाले लोगों को खुद का व्यवसाय या काम-धंधा चलाने के लिए मुनाफा कमाने की आवश्यकता होती है। हरेक गाँव को स्थानीय सरकार का समर्थन मिलता है। स्थानीय सरकार की एक टीम गांववासियों की मदद के लिए सलाह और सहायता देती है।

पश्चिमोत्तर चीन के शिन्च्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश में कुओछिया गांव है। अब वो गांव निर्धन नहीं रहा। पिछले साल उसे आधिकारिक तौर पर गरीब गाँवों की सूची से हटा दिया गया है। उस गांव ने अपने समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर एक पर्यटन उद्योग विकसित किया है, जैसे कि रेगिस्तान, आर्द्रभूमि और एक सुनहरा चिनार का जंगल। इन सबसे से पर्यटकों को आकर्षित किया गया है और सेवा उद्योग में तेजी आई है, जिससे स्थानीय रोजगार दर में वृद्धि हुई है। पिछले साल, इस गांव में 234 गरीब परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति औसत आय लगभग 10,000 युआन (1 लाख रुपये) तक पहुंच गई। स्थानीय सरकार का कहना है कि गरीबी में वापस फिसलने वाले लोगों की संख्या 0.65 प्रतिशत तक कम है।

साल 2019 के अंत तक, देश भर में साढ़े 50 लाख लोग गरीबी में जी रहे थे। इस साल, कोविड-19 महामारी के अचानक फैल जाने से नई चुनौतियां सामने आयी हैं। इस महामारी से चीन पर बड़ा असर पड़ा है। अब तो यह डर भी सता रहा है कि जिन कुछ लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी है, कहीं दोबारा गरीबी में वापस न चले जाएं।

अब सवाल उठता है कि चीन इस साल के अंत तक गरीबी खत्म करने के अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंच सकता है? दरअसल, गरीबी उन्मूलन चीन सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। इस साल के संसदीय सत्र में एनपीसी प्रतिनिधि और सीपीसीसी सदस्य इस सवाल का समाधान खोजेंगे। चीन बिल्कुल चाहेगा कि उसका गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य इसी साल ही पुरा हो जाए। चीन इस साल पूर्ण गरीबी को मिटाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के बेहद करीब है, क्योंकि पिछले 10 वर्षों में चीन की गरीबी दर 10 प्रतिशत से कम होकर 0.6 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

(लेखक : अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप में पत्रकार हैं)

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