अमेरिकी राजनेता ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सवाल पर निरंतर झूठी बातें फैलायी

2020-05-20 20:26:23
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अमेरिकी राजनेता ने 18 मई को ट्विटर पर लिखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस के समक्ष अपना एक पत्र सार्वजनिक किया जिसमें यह धमकी दी गयी है कि भावी तीस दिनों के भीतर विश्व स्वास्थ्य संगठन का भारी परिवर्तन करना होगा नहीं तो अमेरिका इस संगठन को अपना वित्तीय सहायता खत्म करेगा और इसमें से हटने पर भी विचार करेगा।

उधर एक महीने पहले अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपनी वित्तीय सहायता बन्द करने का निर्णय लिया। आज अमेरिका ने एक बार फिर इस संगठन पर नयी धौंस धमकी दी है। नये कोरोना वायरस महामारी फैलने से लेकर अब तक व्हाइट हाउस में राजनीतिज्ञ की मूर्खता नजर आयी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन आदि दूसरों पर दोष मढ़ने का अथक प्रयास किया है। अमेरिका ने चीन के बारे में अपार्दशिता और चीनी प्रयोगशाला रिसाव आदि झूठी बातें फैलायी और चीन को भुगतान करवाने का दावा किया। आम चुनाव के नजदीक आने के चलते अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने भिन्न भिन्न तमाशे खेलना शुरू किया है। लेकिन तथ्यों, नैतिकता और विज्ञान के सामने अमेरिकी राजनीतिज्ञों की झूठी बातों को तोड़ा गया है। अमेरिकी सीडीसी के प्रधान ने हाल में संसद में परामर्श देते समय कहा कि अमेरिकी सीडीसी ने 1 जनवरी से ही चीनी रोग नियंत्रण केंद्र के साथ संपर्क रखा और महामारी पर विचार विमर्श किया। 3 जनवरी से चीन ने नियमित तौर पर अमेरिका को महामारी की सूचनाएं प्रदान शुरू किया। और फरवरी में चीन का दौरा करने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि मंडल में दो अमेरिकी वैज्ञानिक भी हुए।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार अमेरिकी राजनीतिज्ञ महामारी को रोकने में जाहिर अपनी कमजोरी को अस्वीकृत नहीं कर सकेंगे। उन की बेकारता से अमेरिका ने मूल्यवान समय बर्बाद किया और आज अमेरिका में संक्रमित मामलों की संख्या 15.2 लाख और मृतकों की संख्या 91 हजार तक जा पहुंची है।

चीन को छोड़कर अमेरिका ने अपने मित्र देशों की भी आलोचना की है। अमेरिकी राजनेता ने मार्च माह में नागरिक उड़ानों को बन्द नहीं करने पर यूरोपीय संघ की आलोचना की। जिससे अमेरिका में संक्रमित रोगियों का प्रवेश हुआ। और क्रुर की बात है कि अमेरिका ने अनेक बार विश्व स्वास्थ्य संगठन के खिलाफ अकारणीय निन्दा की। वाशिंग्टन पोस्ट ने अपने एक संपादकीय में कहा कि अमेरिकी नेता ने महामारी की रोकथाम में अपनी विफलता के लिए "बलि का बकरा" तलाशना चाहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राजनीतिज्ञों की दूसरों पर दोष मढ़ने की कार्यवाही शर्महीन है। जिससे अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच संबंधों को ���राब बनाया जाएगा।

( हूमिन )

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