टिप्पणी:माइक पोम्पिओ ने केवल मौखिक तौर पर सहायता दी है

2020-04-11 17:25:33
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने हाल ही में कहा कि अमेरिका महामारी की रोकथाम के लिए विश्व को 22 करोड़ 50 लाख अमेरिकी डालर सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने यह दावा भी किया कि "कोई भी देश अमेरिका की तरह उदार नहीं हो सकता है"।

लेकिन इस वर्ष के फरवरी में ही पोम्पिओ ने चीन को दस करोड़ अमेरिकी डालर सहायता प्रदान करने का दावा किया था। मार्च में उन्होंने एक बार फिर 27.4 करोड़ डालर की विदेश सहायता घोषित की। लेकिन इस धनराशि में पहले के दस करोड़ डालर शामिल है। और बाकी 17.4 करोड़ डालर की सहायता में से 6.4 करोड़ डालर को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थियों के लिए उच्चायुक्त कार्यालय को दिया जाता है। बचे हुए 11 करोड़ डालर को 64 देशों को वितरित किया जाएगा।

उधर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल में कहा कि चीन को एक सिक्का की अमेरिकी सहायता भी नहीं मिली है। उधर माइक पोम्पिओ ने बार बार यह दावा किया कि "महामारी के खिलाफ संघर्ष करने के लिए अमेरिका द्वारा दी गयी अंतर्राष्ट्रीय सहायता की धन राशि चीन से अधिक है।" वास्तव में माइक पोम्पिओ ने महामारी की रोकथाम में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बजाये राजनीतिक उद्देश्य से चीन के खिलाफ घर्षण पर अधिक ध्यान दिया है। तथ्य यह है कि महामारी के फैलने से चीन ने सबसे पहले महामारी को नियंत्रित किया है और तुरंत ही दूसरे देशों को यथासंभवतः सहायता प्रदान करना शुरू किया। अभी तक चीन ने 127 देशों और 4 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को चिकित्सा सामग्रियों की आपूर्ति की है। चीन ने इरान, ईराक, इटली, सर्बिया आदि 11 देशों में चिकित्सा दल भेजे हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन को दो करोड़ अमेरिकी डालर प्रदान किया। चीन ने भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ महामारी की रोकथाम पर सूचनाओं और निदान को साझा किया।

इटली की एनसा न्यूज़ एजेंसी ने 7 तारीख को एक जनमत ग्रहण के हवाले से कहा कि आधे से अधिक उत्तरदाताओं का मानना है कि चीन ने महामारी से लड़ने में इटली की सबसे अधिक मदद की है। उधर, अमेरिका की प्रशंसा दर केवल 3 प्रतिशत रही। इराक, स्पेन आदि देशों ने चीन की चिकित्सा सहायता की भुरि-भुरि प्रशंसा की है।

लेकिन पोम्पिओ ने अपने राजनीतिक उद्देश्य से चीन के खिलाफ "मुखौटा कूटनीति" तथा "भू-राजनीतिक उद्देश्य" जैसे दोष लगाया। उन्होंने शीत युद्ध के विचार से चीन और दूसरे देशों के बीच संबंधों के बीच दरार डालने की कोशिश की। वर्तमान में विश्व भर में महामारी की रोकथाम के दौरान विभिन्न देशों के बीच एकता और इमानदारता की जरूरत है। आशा है कि माइक पोम्पिओ अपनी मौखिक तौर पर सहायता छोड़कर दूसरों को वास्तविक मदद दे सकेंगे।

( हूमिन )

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories