दूसरे के सिर पर दोष लगाने की कोशिशें बेकार

2020-04-11 17:16:52
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अभी तक विश्व में नये कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों की संख्या 15.2 लाख तक जा पहुंची है और स्थितियां गंभीर बनने के साथ-साथ कुछ लोगों ने महामारी फैलने का दोष दूसरे के सिर पर मड़ना चाहा।

भारतीय वेबसाइट की खबर है कि भारत के किसी संस्थान के प्रधान अदीस सी. अग्रवाल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष मामला उठाकर चीन से महामारी के नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति की मांग की, लेकिन यह आरोप बिल्कुल निराधार और अनैतिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेताओं ने भी अनेक बार ऐसे आरोपों का खंडन किया। चीन ने खुले, पारदर्शिक और जिम्मेदारना रुख से प्रथम समय पर रोगजनकों की पहचान की, विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ पूरे वायरल जीन अनुक्रम को साझा किया और सबसे शक्तिशाली, सख्त और व्यापक रोकथाम कदम उठाये। साथ ही चीन ने 120 से अधिक देशों और चार अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को चिकित्सा सहायता प्रदान की। प्रसिद्ध चिकित्सा पत्रिका "द लैंसेट" के जनरल संपादक ने बीबीसी के कार्यक्रम में कहा कि चीन की तरफ से भेजा गया संदेश स्पष्ट है, लेकिन हमने दो महीनों का समय बर्बाद किया।

व्यंग्य की बात है कि अदीस सी. अग्रवाल का संगठन वास्तव में दूसरे औपचारिक संगठन के नाम का इस्तेमाल कर एक नकद वाला संगठन है। इसके साथ-साथ चीन के खिलाफ मामला उठाने वाले कार्यक्रम में शिरकत दूसरे संगठन ने भी भारत के औपचारिक वकील संगठन ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के नाम का इस्तेमाल लिया है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने अपने अफसल वक्तव्य जारी कर कहा कि उस के तथाकथिक आरोप लगाने के साथ कोई संबंध नहीं है।

और यह तथाकथित शिकायतकर्ता अदीस सी. अग्रवाल भी एक बेतुका पात्र है। उसके सिर पर लगे जो दसेक टाइटल हैं, सब उस खुद के द्वारा सौंपा गया है। और उसने ग्रहित तथाकथित जो सबूत है, वो भी सब मीडिया और वैबसाइट से तलाश किये गये हैं। उधर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद संयुक्त राष्ट्र महासभा के तहत संस्था है जो 47 सदस्य देशों से गठित राजनीतिक संस्था है। वह मानवाधिकार के आदान-प्रदान व सहयोग को बढ़ाने में संलग्न है।

महामारी के फैलाव के बाद कुछ और व्यक्तियों ने कानून की आड़ में राजनीतिक तमाशा किया है। मिसाल के तौर पर अमेरिका के फ्लोरिडा के एक कानून फर्म ने भी चीन से मुआवजा करवाने की घोषणा की। कनाडा और अमेरिका की कुछ मीडियाओं ने भी महामारी का स्रोत होने और चीन की अपारदर्शीता पर सनसनी पैदा करने की कोशिश की। इनका तर्क बेतुका तो है, पर इन का मकसद चीन को बदनाम करना ही है। महामारी का राजनीतिकरण बनाने से देशों के बीच विरोधाभास और विभाजन पैदा किया जाएगा, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के वातावरण में जहर घोलने से सभी पक्षों की महामारी रोधी कोशिशों को रोका जाएगा।

( हूमिन )

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