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टिप्पणीः अमेरिका जानबूझकर चीन को कर रहा है बदनाम

2020-03-24 19:46:22
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अमेरिकी द डेली बीस्त द्वारा हाल में जारी एक आंतरिक टेलीग्राम ने खुलासा किया कि राजनीतिक दबाव का स्थानांतरण करने और आम चुनाव के मतों को बचाने के लिए अमेरिकी ह्वाइट हाऊस राष्ट्रीय मशीन से चीन को बदनाम देने की कुचेष्टा कर रहा है।

लेख में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि उन्हें सूचित किया कि बाहर बात करते समय इस पर जोर दिया जाना चाहिए कि सब चीन से संबंधित है। निसंदेह हालिया गंभीर महामारी की परिस्थिति के मद्देनजर अमेरिकी राजनेताओं ने जिम्मेदारी से बचने के लिए चीन को बदनाम करने की कोशिश की और अकसर कोविड-19 वायरस को चीनी वायरस बताया।

संयुक्त राष्ट्र विशेष रिपोर्टर टेनदयी अछिउमे ने 23 मार्च को बताया कि खास रोग के कोई एक राष्ट्र या देश से संपर्क करने की कथनी गैरजिम्मेदार और चिंताजनक है। एक दिन से पहले साईंस पत्रिका के साथ साक्षात्कार में अमेरिकी संक्रामक रोग संस्थान के निदेशक एनटोनी फॉसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वायरस की नस्लवादी अभिव्यक्ति को कभी स्वीकार न करें।

 चीन को बदनाम करने की कुचेष्टा सफल न होने की वजह से अमेरिकी राजनेताओं ने चीन और अन्य देशों के संबंधों का अलगाव करने की कोशिश की। चीन में महामारी की स्थिति बेहतर हो गयी है। चीन ने समय पर अन्य देशों को सहायता दी। उदाहरण के लिए चीन ने इटली को दो चिकित्सक विशेषज्ञ दल और आपात चिकित्सक सामग्री भेजी। इतालवी नेटीजनों ने सोशल मीडिया पर चीन को धन्यवाद दिया। ये सब देखकर अमेरिकी राजनेता नाखुश हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पेओ ने हाल में फॉक्स टीवी स्टेशन के साथ साक्षात्कार में चीन और इटली के संबंध को अलगाव करने की कोशिश की। कुछ अमेरिकी राजनेता राजनीतिक वायरस फैलाकर अंतर्राष्ट्रीय महामारी के सहयोग में बाधा डालते रहे हैं।

महामारी के सामने अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय कर्तव्य और बड़े देश की जिम्मेदारी नहीं दिखायी, बल्कि अन्य देशों को चीन की सहायता पर गैर जिम्मेदार टिप्पणी की। यह अमेरिका फर्स्ट का प्रतिबिंब है।

महामारी के सामने चीन ने खुद की कठिनाइयों को दूर कर अन्य देशों व क्षेत्रों को हरसंभव मदद दी। चीन जिम्मेदार बड़े देश के कर्तव्य निभाता है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सराहना मिली है।

वायरस का मुकाबला करना एक वैज्ञानिक समस्या है, सिर्फ बातें करने से ही विजय नहीं पायी जा सकती है। हम अमेरिकी राजनेताओं से जिम्मेदारी उठाकर अमेरिकी नागरिकों के जीवन व स्वास्थ्य की रक्षा करने की अपील करते हैं। येल विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता स्टीफन रोच ने एक समीक्षा में चेतावनी दी कि अमेरिका के पास गर्व करने का समय नहीं है। अगर कदम तेजी से नहीं उठाए गए तो तमाम अमेरिकी लोगों की जान जा सकती है।

(श्याओयांग)

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