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चीन में नागरिकों को मारे जाने की खबरों का आखिर क्या है सच ?

2020-02-19 11:40:06
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दुनिया की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी एएफपी के फैक्ट चेक में पुष्टि हो गयी है कि चीन में नागरिकों को मारे जाने की खबरें फर्जी हैं। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में सुप्रीम कोर्ट से 20 हज़ार लोगों को मारने की अनुमति लेने की खबर निराधार है। एएफपी का कहना है कि इस बात में कोई सच्चाई नहीं है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा कोई फैसला नहीं सुनाया है। रिपोर्ट कहती है कि जिस वेबसाइट पर चीनी नागरिकों को मारे जाने की खबर जारी हुई थी, उसमें पहले भी कई बार फेक न्यूज़ छपती रही है।

अनिल आज़ाद पांडेय, बीजिंग, चाइना मीडिया ग्रुप

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। यह खतरनाक वायरस अब तक लगभग 1550 लोगों की जान ले चुका है, जबकि हज़ारों की तादाद में लोग इस वायरस के संक्रमण से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं इस वायरस के खिलाफ चल रहे अभियान में चीन सरकार और नागरिक पूरी शिद्दत के साथ जुटे हैं। चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग और राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस महामारी से निपटने के लिए चल रहे प्रयासों और अभियान पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। लेकिन इस दौरान विदेशी मीडिया खासतौर पर सोशल मीडिया पर मानो चीन के खिलाफ अभियान सा चल गया है कि चीन की छवि को खराब किया जाय। इसकी शुरुआत कुछ पश्चिमी मीडिया की खबरों से हुई और अब कई जगहों पर ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जैसे कि चीन की सरकार जन-विरोधी है। वह अपने नागरिकों को मारने की तैयारी कर रही है, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति ली जाने वाली है। इतना ही नहीं ऐसी अफवाह भी फैलाई जा रही है कि, चीन ने हूबेई प्रांत और उसकी राजधानी वूहान में हज़ारों लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है।

हाल में दुनिया की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी एएफपी के फैक्ट चेक में इसकी पुष्टि हो गयी है कि उक्त खबरें फर्जी हैं। एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में सुप्रीम कोर्ट से 20 हज़ार लोगों को मारने की अनुमति लेने की खबर निराधार है। एएफपी का कहना है कि इस बात में कोई सच्चाई नहीं है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा कोई फैसला नहीं सुनाया है। रिपोर्ट कहती है कि जिस वेबसाइट पर चीनी नागरिकों को मारे जाने की खबर जारी हुई थी, उसमें पहले भी कई बार फेक न्यूज़ छपती रही है।

वैसे सोशल मीडिया पर चीन के खिलाफ चल रही कुछ खबरों का उदाहरण देना चाहूंगा, जिसमें लोग कह रहे हैं कि "चीन में अब तक पचास हज़ार लोग मर चुके हैं और हज़ारों को मारने की तैयारी हो रही है। इस तरह की अमानवीय हरकत करने जा रही है चीन सरकार"। इस तरह की अफवाहों को सुन और देखकर मैं खुद को यह लेख लिखने से नहीं रोक सका। मैं हर जगह पर लोगों से अपील कर रहा हूं कि बेवजह की अफवाहों पर ध्यान न दें। यह ऐसी मुश्किल की घड़ी है, जिसमें हम सभी लोगों को मिलकर चीन और वहां के नागरिकों के साथ खड़ा होना चाहिए। क्योंकि यह एक ऐसी महामारी है जो किसी देश की सीमा को नहीं मानती है। भले ही इस वायरस की शुरुआत चीन से हुई हो, लेकिन इसमें चीनी लोगों का क्या दोष है ? किसी भी देश पर कभी भी ऐसी आपदा आ सकती है, मानवता यही कहती है कि हमें दुख और मुसीबत के समय पीड़ित लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए।

अब आप देखें कि चीन में फैल रहे वायरस पर दुनिया इतना हंगामा मचा रही है, जबकि अमेरिका में अब तक इस सीज़न में इंफ्लुएंजा की चपेट में आकर 10 हज़ार से ज्यादा लोग मर चुके हैं। ये आंकड़े अमेरिका के सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा जारी किए गए हैं। इतना ही नहीं रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में इस तरह के फ्लू से हर साल लगभग 12 हज़ार लोग मर जाते हैं। इससे भी चौंकाने वाली रिपोर्ट यह है कि 2017-18 के फ्लू सीज़न में अमेरिका मे करीब 61 हज़ार लोगों की मौत हुई और लगभग 4.5 करोड़ इससे संक्रमित हुए। अब जरा सोचिए कि अमेरिका में हज़ारों लोगों के मरने पर भी दुनिया की मीडिया में न के बराबर खबरें हैं, जबकि चीन में फैले वायरस ने अब तक 1600 लोगों की जान ली है। इससे पहले ही विश्व के कई देशों ने चीन के लिए अपनी विमान सेवाएं बंद कर दी और अपने लोगों को चीन न जाने की सलाह दी है। विदेशों में मौजूद चीनी लोगों को भी भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा है। क्या कभी आपने सुना कि किसी देश ने अमेरिका के लिए उड़ाने रद्द की हों या अमेरिकी लोगों के साथ भेदभाव किया गया हो ?

यहां रहते हुए मैंने महसूस किया है कि चीन सरकार अपने नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य का बहुत खयाल रखती है। साथ ही चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था कई देशों से बेहतर भी है। चीन कभी भी ऐसा काम नहीं कर सकता है, जिससे उसके नागरिकों की जान खतरे में पड़े। अगर चीन सरकार को अपने लोगों को कोई चिंता न होती तो क्या सरकार की ओर से हज़ारों डॉक्टरों, नर्सों और सैनिकों को हूबई प्रांत भेजा जाता ? क्या दस दिन के भीतर दो हज़ार से अधिक बेड वाले अस्पतालों का निर्माण किया जाता ? इतना ही नहीं केंद्र सरकार को इस महामारी की ख़बर मिली तो बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही को रोकने का मकसद भी उनकी जिंदगी को बचाना था। ताकि वायरस का प्रभाव और व्यापक न हो सके। लेकिन दूसरे देशों में कहा जा रहा है कि चीन ने अपने नागरिकों को बंद करके रख दिया, इस तरह की खबरों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है।

कहना होगा कि चीन अतीत में भी महामारी को नियंत्रित कर चुका है, और इस बार भी चीन सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों से कोरोना वायरस पर जरूर विजय पायी जा सकेगी। संकट के इस वक्त पर पूरी दुनिया को चीन के साथ भेदभाव करने या अफवाह फैलाने के बजाय, इस महामारी के मुकाबले में साथ देना चाहिए। क्योंकि इस तरह की आपदा कभी किसी अन्य देश के सम्मुख भी आ सकती है।

पुलिस द्वारा लोगों को गोली मारे जाने के वायरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर आजकल एक वीडियो भी कुछ समय से वायरल हो रहा है, जिसमें चीनी पुलिस द्वारा वायरस से प्रभावित लोगों को मारे जाने की बात की जा रही है। 21 सेकेंड के इस वीडियो में रिवॉल्वर के साथ तीन पुलिसकर्मियों को एक कार से उतरकर आवासीय कॉलोनी में घुसते हुए दिखाया गया है। इसी वीडियो के अगले हिस्से में दिख रहा है कि कुछ लोग घायल होकर ज़मीन पर पड़े हैं और उनको प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत के ईवू के फूथ्यान पुलिस की है। वीडियो में ऐसा लग रहा है जैसे कि स्थानीय पुलिस नागरिकों को गोली मार रही हो।

इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई को जानने के लिए 13 फरवरी को सीजीटीएन की टीम ईवू पुलिस मुख्यालय पहुंची और मामले की पड़ताल की। इसके साथ ही सीजीटीएन ने स्थानीय लोगों से भी इस बारे में जानने की कोशिश की। जिसमें पता चला कि उक्त वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी वहीं के हैं, लेकिन वे लोगों को मारने नहीं बल्कि एक पागल कुत्ते से निपटने के लिए ऐसा कर रहे हैं। बताया जाता है कि स्थानीय लोगों ने अपने इलाके में एक पागल कुत्ते द्वारा आतंक मचाए जाने की शिकायत दर्ज की थी। जिस पर तीन पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और कुत्ते से निपटने के लिए अभियान चलाया। दरअसल घटना एक फरवरी की है, जब ईवू में फूथ्यान पुलिस को एक पागल कुत्ते द्वारा लोगों को परेशान किए जाने की खबर मिली। घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिस ने कुछ ही देर में कुत्ते को मार गिराया।

शायद किसी व्यक्ति ने इस घटनाक्रम को वीडियो में कैद कर लिया और फिर दूसरी घटनाओं वाली क्लिप को इसके साथ जोड़कर वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। पड़ताल में सामने आया कि वीडियो का एक हिस्सा जरूर उक्त पुलिसकर्मियों का है। लेकिन दूसरा हिस्सा जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैँ और उन्हें उपचार दिया जा रहा है। वह 29 जनवरी का हूबेई प्रांत में एक मोटरसाइकिल दुर्घटना की फुटेज़ है। जिसमें एक 15 वर्षीय किशोर अपने चचेरे भाई के साथ कहीं जा रहा था, तभी दुर्घटना का शिकार हो गया। सूचना पाकर स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर वहां पहुंचे और प्राथमिक उपचार दिया। वह किशोर दुर्घटना में बुरी तरह से जख्मी हो गया था।

इस तरह साबित होता है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है, अब पुलिस वीडियो फुटेज़ को सोशल मीडिया पर डालने वाले व्यक्ति की तलाश में जुटी है।

लेखक चाइना मीडिया ग्रुप के वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दस वर्षों से चीन में हैं।

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