टिप्पणीः पश्चिम की गैर हाज़िरी और नैनसी पेलोसी की दुविधा

14 फरवरी को आयोजित म्युनिख सुरक्षा सम्मेलन पर अमेरिकी प्रतिनिधि सदन की अध्यक्ष नैनसी पेलोसी ने चीन पर दूर संचार तकनीक कंपनी हुआ वेइ के ज़रिये डिजिटल तानाशाही का निर्यात करने का आरोप लगाया और दावा किया कि चीन उन देशों से आर्थिक बदला लेने की धमकी देगा जो हुआ वेइ की तकनीक का प्रयोग नहीं करते ।पेलोसी की बात पर बैठक स्थल पर मौजूद पूर्व चीनी विदेश मंत्री फूइंग ने फौरन ही आशंका जतायी ।उन्होंने बताया कि सुधार और खुलेपन के 40 से अधिक वर्ष में चीन ने तरह तरह की पश्चिम की तकनीकों का आयात किया ,लेकिन ये तकनीक चीनी राजनीतिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं है। इसके विपरीत इन्होंने चीन की सफलता में मदद की।
गैर भेदभाव का सिद्धांत बाज़ार अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांतों में से एक है। दुर्भाग्य है कि कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने हुआ वेइ की 5 जी तकनीक के मुद्दे पर इस महत्वपूर्ण सिद्धांत को बर्बाद किया और अपने यूरोपीय साझेदारों को हुआ वेइ के साथ सहयोग करने से रोकने की पूरी कोशिश की।
हुआ वेइ की 5 जी तकनीक पश्चिम के लोकतंत्र के लिए चुनौती नहीं है । ये सवाल पश्चिमी देशों के अंदर पैदा हुआ है ।
इस म्युनिख सुरक्षा सम्मेलन का मुख्य विषय है कि पश्चिम की गैर हाजिरी। सम्मेलन के अध्यक्ष वोल्फ गांगइस्चिनगर ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम पहले की तरह नहीं दिखता और विश्व भी पहले की तरह नहीं दिखता ।इसके पीछे मूल कारण अमेरिका का कई मुद्दों पर एकतरफावाद का घमंड दिखाना रहा है। इसी कारण यूरोपीय महाद्वीप में चिंता का भाव फैल रहा है।
वर्तमान परिस्थिति में नवोदित देशों के साथ सक्रियता से सहयोग चलाना परंपरागत बड़े यूरोपीय देशों का परिशान दूर करने का अच्छा उपाय होगा ।यूरोप का चीन समेत नवोदित देशों के साथ व्यावहारिक सहयोग चलाने से अंत में कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञ प्रभावित होंगे और जागेंगे।
(वेइतुंग)