टिप्पणीः कहां से आ रही हैं चीन के खिलाफ अफवाहें?

इधर के दिनों में न्यूयार्क टाइम्स ने लेख जारी कर अमेरिकी राष्ट्रीय व्यापार कमेटी के अध्यक्ष पीर्टर नवारो ने चीन को रोग इनक्यूबेटर बताया। 2009 में अमेरिका में एच1एन1 फ्लू का प्रकोप हुआ। अंत में विश्व के 6 करोड़ इससे संक्रमित हुए। करीब 3 लाख लोग मारे गए थे। गत वर्ष अमेरिका में भी कम से कम 2.2 करोड़ से अधिक लोग फ्लू से संक्रमित हुए और करीब 12 हजार लोग इससे मारे गये। मृतकों की संख्या के मद्देनजर ये सब हालिया कोविद-19 की मृतकों की संख्या से कहीं बड़ी है। तो कुछ अमेरिकी राजनयिकों के तर्क में अमेरिका रोग इनक्यूबेटर ही है।
वास्तव में इस कोविद-19 के प्रकोप के बाद न्यूयार्क टाइम्स ने अनेक बार चीन सरकार के रोकथाम कार्य पर अफवाहें फैलायी। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक तेद्रोस अधनोम गेब्रेयेसुस ने मूल्यांकन कर चीन के रोकथाम कार्य के प्रयास की बड़ी सराहना की और कहा कि चीन ने महामारी की रोकथाम के लिए नया मापदंड स्थापित किया है। उन्होंने एक ब्रिटिश प्रतिनिधि के हवाले से कहा कि चीन का वुहान शहर एक वीर की तरह है, जिससे विश्व के अन्य स्थल और सुरक्षित हो गये हैं।
अमेरिकियों द्वारा फैलायी गयी अफवाहों से लोगों को यह पता चला कि वे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ पर ध्यान देते हैं, जबकि विश्व के लोगों की सुरक्षा को महत्व नहीं देते। वायरस की कोई सीमा नहीं होती। भूमंडलीकरण के युग में अगर चीन जल्द ही महामारी के मुकाबले में विजय पाता है, तो विश्व का अर्थतंत्र व व्यापार, व्यापारिक यात्रा, लोगों की आवाजाही आदि सामान्य हो सकेगी। यह चीन और विश्व के हित में है।