टिप्पणी : चीन के खिलाफ “राजनीतिक वायरस” को दूर करें अमेरिका

वर्तमान में चीन एकता से नये कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ काम कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने चीन के कदमों की खुब प्रशंसा की है। लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की राजनीतिक व्यवस्था को "युग की धमकी" बताकर आलोचना की। इस तरह चीन के विरूद्ध गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से न सिर्फ मानवता का उल्लंघन होता है, बल्कि चीन-अमेरिका सहयोग को भी बाधित किया जा रहा है।
पोम्पिओ ने हाल ही में ब्रिटेन यात्रा के दौरान यह बात कही। दरअसल, ब्रिटेन ने अपने 5जी तकनीक निर्माण में ह्वावेई कंपनी की भागीदारी को मंजूरी दी। उधर अमेरिका ने चीन की उच्च तकनीक कंपनियों को दबाने का निरंतर प्रयास किया और अपने मित्र देशों पर चीनी कारोबारों के लिए बाजार न खोलने का दबाव बनाया। लेकिन अमेरिका के विरोध के बावजूद ब्रिटेन ने अपना स्वतंत्र चयन किया जिससे अमेरिका की कोशिशों पर पानी फिर गया।
विदेश मंत्री बनने के बाद पोम्पिओ ने हांगकांग और शिच्यांग मामलों पर अनेक बार गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया है और इस बार उन्होंने सीधा चीनी राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना की है। उनका मानना है कि चीन के विकास से अमेरिका के हितों पर प्रभाव पड़ेगा। इसी सामरिक विचारधारा से पोम्पिओ तथा अमेरिका के अन्य लोगों ने चीन-अमेरिका संबंधों के विकास में बाधाएं पहुंचाने की निरंतर कोशिश कीं।
बीते 70 सालों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में चीन ने कठोर प्रयास कर उल्लेखनीय प्रगतियां हासिल की हैं। सुधार और खुलेपन की नीति अपनाने के बाद चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों की संख्या में 80 करोड़ की कटौती हुई है। चीन की बेल्ट एंड रोड पहल विश्व में सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक वस्तु बन चुकी है और इससे संबंधित देशों को विकास का अहम मौका तैयार है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में सबसे ज्यादा सिपाही भेजे हैं और जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्ष के समाधान में चीन की रचनात्मक भूमिका साबित हुई है।
वर्तमान में महामारी की रोकथाम में चीनी राजनीतिक व्यवस्था की श्रेष्ठता दिख रही है। सर्वोच्च नेतागण के मार्गनिर्देशन में चीन ने सबसे सख्त और पूर्ण कदम उठाये हैं। चीन के कदमों से सिर्फ अपने देश में जनता की जान-माल की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व की सार्वजनिक चिकित्सा सुरक्षा की गारंटी भी की जाएगी।
उधर, अमेरिका ने सबसे पहले वुहान से अपने राजनयिक लोगों को वापस बुलाया और चीनी नागरिकों के प्रवेश को सीमित किया। यह कहा जा सकता है कि पोम्पिओ द्वारा चीनी व्यवस्था के खिलाफ की गयी बातें चीन-अमेरिका सहयोग को बाधित करने का “राजनीतिक वायरस” ही है।
वर्तमान में चीन में महामारी रोकने की स्थितियां फिर भी गंभीर हैं। चीन अपनी व्यवस्थागत श्रेष्ठता के सहारे महामारी के विरूद्ध लड़ाइयों में विजय पाने के प्रति काफी आश्वस्त है। इसके बाद चीन बेहतर विकास प्राप्त करेगा और विश्व शांति की रक्षा में और अधिक भूमिका अदा कर सकेगा।
( हूमिन )