टिप्पणीः ब्रेक्सिट के बाद शायद और कठिन समय आएगा
साढ़े तीन साल के बाद ब्रिटेन आखिरकार 31 जनवरी की रात औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ से अलग हो गया ।ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जोनसन ने बताया कि नया युग शुरू होगा ,लेकिन ब्रिटेन-यूरोपीय संघ संबंध और भू-राजनीतिक परिवर्तन से पैदा कई अनिश्चितताएं चिंताजनक हैं ।
बीबीसी की एक टिप्पणी में कहा गया कि ब्रेक्सिट शीतयुद्ध के बाद यूरोप में सब से बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव है ।बहुत लोगों की चिंता है कि यूरोपीय संघ से अलग होने वाला दूसरा देश समय पर निकल सकेगा ।
ब्रेक्सिट से यूरोपीय संघ को विभिन्न पक्षों के हितों का समायोजन करना पड़ेगा ।भावी ब्रिटेन-यूरोपीय संघ व्यापार की लागत में वृद्धि आना अनिवार्य होगी ।इस के अलावा यूरोपीय संघ को एक साल 10 अरब यूरो के अभाव का सामना करना पड़ेगा ।वर्तमान 27 सदस्य देशों के नाते कैसे किफायती खर्च करना एक ध्यानाकर्षक मुद्दा होगा ।
ब्रिटेन के लिए ब्रेक्सिट के कारण लोकमत में भारी दरार पैदा हुई है ।इस घटना से स्कॉटलैंड में ब्रिटेन से अलग होने की भावनाएं जरूर बढ़ जाएंगी ,जो एक स्पष्ट राजनीतिक खतरा है ।ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के लिए एक दूसरे के संबंधों का निपटारा एक बड़ी चुनौती भी है ।ब्रिटेन को अपना नया स्थान खोजना होगा ।
क्या ब्रिटेन का नया युग शुरू होगा ?क्या ब्रेक्सिट से पूरे विश्व पर क्या दीर्घकालिक असर पड़ेगा ? समय जवाब देगा ।
(वेइतुंग)