टिप्पणीः विश्व स्वास्थ्य संगठन के नये फैसले का मतलब चीन पर अविश्वास नहीं है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने स्थानीय समयानुसार 30 जनवरी की रात घोषणा की कि नये कोरोना वायरस से संक्रमित न्यूमोनिया महामारी अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली आपात सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना बन गयी है । इस के साथ उन्होंने बल दिया कि इस फैसले का मतलब नहीं है कि चीन के प्रति अविश्वास वोट पड़ा है ,इस के विपरीत विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन की महामारी पर नियंत्रण करने की क्षमता पर विश्वास करता है और चीन पर पर्यटन और व्यापार प्रतिबंध लगाने का विरोध करता है ।
वर्तमान में नया कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है ।इस के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो नया फैसला किया ,वह अंतरराष्ट्रीय संसाधन जुटाने और कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था होने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय मदद देने के लिए मददगार होगा।इस से महामारी का वैश्विक फैलाव नहीं होगा ।
उल्लेखनीय बात है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने फैसले की घोषणा करने के साथ सात सुझाव भी पेश किये ,जिन में अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल और व्यापार पर अनावश्यक हस्तक्षेप न करना ,कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था होने वाले देशों को समर्थन देना और टीके के अनुसंधान में तेजी लाना जैसे विषय शामिल हैं ।ऐसा रूख चीन में महामारी की रोकथाम और नियंत्रण कार्य के उच्च मूल्यांकन और निहित प्रभाव के सावधानी आकलन पर आधारित है ,जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अविवेकतापूर्ण भावना शिथिल करने और संबंधित देशों व क्षेत्रों द्वारा चीन के खिलाफ ज्यादती बरतने से बचने के लिए लाभदायक होगा ।
वैश्वीकरण में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा घटना की राष्ट्रीय-सीमा नहीं है ।नये कोरोना वायरस के फैलाव के सामने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समन्वय मजबूत कर एक साथ चुनौती का सामना करना है ।चीन खुले ,पारदर्शी और जिम्मेदार रवैया अपनाकर विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभन्न देशों के साथ सहयोग बरकरार कर यथाशीघ्र ही महामारी को पराजित करने का विश्वास और क्षमता भी है ।
(वेइतुंग)