टिप्पणी:वैश्विकरण और 2020 दावोस आर्थिक मंच

2020 दावोस विश्व आर्थिक मंच स्विट्ज़रलैंड में आयोजित होने वाला है। इसी वक्त पर तीन साल पहले चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा इस मंच में दिये गये व्याख्यान की याद की गयी है। इधर तीन वर्षों में चीन और उसके सहपाठियों के बीच वैश्विकरण की कथाएं विचारार्थ हैं।
तीन साल पहले जब सारी दुनिया में आर्थिक मंदी, क्षेत्रीय मुठभेड़, आतंकवाद और शरणार्थी आदि चुनौतियों का सामना हो रहा था, तब कुछ व्यक्तियों ने समस्याएं उभरने का दोष वैश्विकरण पर लगाया था। इसे लेकर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दावोस आर्थिक मंच में यह निष्कर्ष स्पष्ट किया यानी कि विश्व में समस्याएं उभरने का दोष वैश्विकरण पर लगाना गलत है और तथ्यों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विकरण का मौका लेने और चुनौती का सामना करने के लिए सहयोग के माध्यम से ही वैश्विकरण का मार्गनिर्देशन किया जाएगा।
इसी विचारधारा के तहत इधर तीन वर्षों में चीन ने अपने सहपाठियों के साथ वैश्विकरण की कड़ाई से रक्षा की है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि के लिए सकारात्मक योगदान पेश किया। चीन ने अधिक खुलापन कराने के जरिये वैश्विक बाज़ार के विस्तार से अपना मौका और लाभ खोजा और इससे उभय जीत हासिल की।
उधर चीन ने सीमा शुल्क एकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुविधा लाने का रूपांतर किया। साथ ही चीन ने बैंक, प्रतिभूति और बीमा में विदेशी पूंजी की पहुँच को उदार बना दिया। दूसरी तरफ चीन ने "विदेशी निवेश कानून" के प्रकाशन, शेनचेन आदर्श क्षेत्र, शांघाई स्वतंत्र व्यापार क्षेत्र और छह स्वतंत्र व्यापार परीक्षण क्षेत्र स्थापित किये। इसी से चीन बाजारीकरण की दिशा में उच्च स्तरीय खुलेपन में प्रविष्ट होने लगा है।
इसी दौरान चीन ने उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट एंड रोड निर्माण, चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो के आयोजन से वैश्विक सहयोग को बढ़ाया। अभी तक कुल 160 से अधिक देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने चीन के साथ बेल्ट एंड रोड सहयोग दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये। चीन में आयोजित दो आयात एक्सपो में 129 अरब अमेरिकी डॉलर व्यापार संपन्न हुआ। चीनी बाज़ार में दूसरे देशों की तकनीक, सेवा और माल के प्रवेश से आर्थिक वृद्धि को ज़ोर लगाया गया है। विश्व बैंक में कार्यरत अर्थशास्त्री “म्वांगी वाचिरा” ने हमारे संवाददाता से कहा कि चीन ने अपनी ठोस कार्यवाहियों से व्यापार उदारीकरण और आर्थिक वैश्वीकरण का समर्थन किया है। जिससे चीन की जिम्मेदारना और आत्मविश्वास जाहिर हो गया है।

राष्ट्रपति शी ने तीन साल पहले यह बता दिया कि विश्व अर्थतंत्र के सामने सबसे अहम समस्या है विकास की कमजोरी। इसमें नवाचार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। इधर तीन सालों में चीनी नवाचार से विश्व के आर्थिक विकास में निरंतर शक्ति लगायी गयी है। विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन द्वारा प्रकाशित नवाचार सूचीकांक रिपोर्ट में चीन 14वें स्थान पर रह गया है। उदाहरण के लिए चीन में 5जी तकनीक काफी प्रभावकारी है। लेकिन चीन हमेशा दूसरे देशों के साथ 5जी और एआई तकनीक का साझा करने को तैयार है। शी ने कहा कि सभी देश, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, अमीर हो या गरीब, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का समान सदस्य है। और वे निर्णय लेने, अधिकारों का आनंद लेने और दायित्वों को पूरा करने में समान रहते हैं। चीन ने वैश्विक प्रशासन के निर्माण में सक्रियता से भाग लिया और विश्व की आर्थिक संरचना को सही और न्यायसंगत दिशा में बढ़ाने का प्रयास किया। वर्तमान में चीन के अनुमोदन से स्थापित एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर बैंक के 102 सदस्य हो चुके हैं। उनमें अधिकांश सदस्य विकासमान देश हैं और उन्हें अधिक अधिकार भी प्राप्त हैं।
बीते तीन सालों में चीन ने अपनी कार्यवाहियों से आर्थिक वैश्वीकरण की प्रवृत्ति को निर्देशित किया। विश्व आर्थिक मंच के वैश्विक एजेंडा के निदेशक सेबेस्टियन बकअप ने कहा कि मौजूदा मंच में चीन अनवरत विकास, तकनीक और आर्थिक वृद्धि इन तीन पहलुओं में अहम भूमिका निभाएगा। यह निश्चित है कि एक खुलेदार चीन वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण और निशेष भूमिका निभाएगा।
( हूमिन )